फोटो 03 डॉ. प्रिया यादव
नारनौल। वकील गिरीबाला जहां अपने मुवक्किल के लिए अदालत में जज के सामने दलीलें पेश करती हैं, वहीं उनकी बेटी डॉ. प्रिया यादव कॉलेज में बच्चों को ज्ञान का पाठ पढ़ा रही हैं। प्रिया का चयन हाल ही में जैविक विज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है। दादाजी की बातों से प्रेरित होकर प्रिया ने बचपन में ही तय कर लिया था कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में ही अपना भविष्य बनाना है।
प्रिया की प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव नीरपुर से हुई। इसके बाद भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल से बीएस-एमएस की पढ़ाई की और इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी नई दिल्ली से जैविक विज्ञान विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने एचपीएससी की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
प्रिया ने बताया कि साल 2024 में भर्ती निकाली गई थी और इसके बाद से वह रोजाना 9 से 11 घंटे तक अपनी तैयारी में लगी रहीं। साल 2025 में वह पंचकुला में परीक्षा देकर आईं और अपनी मेहनत के बल पर हाल ही में आए परीक्षा परिणाम में अपने पहले ही प्रयास में सफल रहीं।
बचपन से प्रिया की रुचि शिक्षा और अध्यापन के क्षेत्र में रही है। विद्यार्थियों को पढ़ाना, उनका मार्गदर्शन करना और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही उनका सपना रहा है। प्रिया के दादाजी राम सिंह त्यागी ने हमेशा उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रोत्साहन और परिवार के सहयोग से वह अपनी शैक्षणिक यात्रा को आगे बढ़ा पाने में सफल रहीं।
प्रिया का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर मेहनत, अनुशासन, धैर्य और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की कुंजी हैं। युवाओं को चाहिए कि वे बड़े सपने देखें, स्वयं पर विश्वास रखें और चुनौतियों से घबराने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढ़ें। यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।