नांगल चौधरी। वर्षों पुराना और जर्जर हो चुका कृष्णावती नदी पर बना पुल हादसे को न्योता दे रहा है। पुल की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कई स्थानों पर दरारें भी आ चुकी हैं। सरिया निकले हुए हैं। इसके बावजूद इस पुल से ट्रक, डंपर, रोडवेज बस, स्कूल बस सहित भारी वाहन लगातार गुजर रहे हैं।
भारी वाहनों के निकलते ही पुल में तेज कंपन होने लगता है जिससे छोटे वाहन चालक डर के साए में पुल पार करते हैं। यह पुल नांगल चौधरी कस्बे को आसपास के ग्रामीण इलाकों से जोड़ने का एकमात्र संपर्क मार्ग है।
कॉलेज जाने वाले छात्र, स्कूल के छोटे बच्चे, मरीज, बुजुर्ग पुरुष और महिलाएं सभी मजबूरी में इसी पुल से रोजाना आवाजाही करते हैं। दर्जनों गांवों की जिंदगी इस पुल पर निर्भर है।
बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। पुल पर पानी भरने, फिसलन बढ़ने और पुल के नीचे धंसने का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को पुल की जर्जर स्थिति से अवगत कराया लेकिन आज तक न तो मरम्मत कराई गई और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
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पुल कभी भी गिर सकता है। रोज डर के साये में आना-जाना होता है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।-योगेश्वर निवासी मेघोत गांव
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पूल कभी भी धराशायी हो सकता है लेकिन कोई नहीं बोलता और ना ही सुनता, हमें तो बच्चों को स्कूल भेजते वक्त डर लगता है। हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा। -विक्रम निवासी दिलपुरा गांव
नांगल चौधरी ब्लॉक में कृष्णावती नदी पर बना यह पुल दर्जनों गांवों की जीवन रेखा है लेकिन जर्जर हालत में खड़ा यह पुल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।-संजय निवासी लूजोता गांव
पुल कभी भी गिर सकता है, बड़ी दुर्घटना और जनहानि की आशंका बनी रहती है। पुनर्निर्माण जरूरी है।-सुरेन्द्र निवासी कालबा गांव
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इस पुल से प्रतिदिन 50-69 गांवों के लोग गुजरते हैं। पुल में मजबूती नहीं रही, सरिया निकलने लगा हैं। कभी भी और कुछ भी हादसा हो सकता है।-राजेन्द्र निवासी मेघोत हाला गांव