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सीएम दौरा रद्द होने से पालिका प्रशासन की बची लाज

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-15 अक्तूबर को पेश करनी थी कैटल फ्री और ओडीएफ फ्री की रिपोर्ट, दोनों में कोई भी काम नहीं था पूरा
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फोटो संख्या:47 असैै 48
प्रदीप शर्मा
महेंद्रगढ़। नगरपालिका भले ही खुले में शौच मुक्त और लावारिस पशुमुक्त होने का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। शहर के बाजारों में अभी भी लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। इसके अलावा शहर में सात जगहों पर बनाए जाने वाले शौचालय भी तैयार नहीं हो पाए हैं। मुख्यमंत्री के आदेशानुसार 31 जुलाई तक हरियाणा को कैटल फ्री और 31 अगस्त तक शहरों को ओडीएफ फ्री करना था। किंतु इन दोनों अभियानों में से कोई भी नपा पूरा नहीं कर पाई। 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को महेंद्रगढ़ जिले के दौरे पर आना था। सीएम के समक्ष ही नगरपालिका को ओडीएफ फ्री और कैटल फ्री की रिपोर्ट सौंपनी थी किंतु अज्ञात कारणों के चलते बुधवार को सीएम ने जिले के दौरे का स्थगित कर दिया। इससे नगरपालिका प्रशासन शर्मिंदगी से बच गया।

31 जुलाई को करना था कैटल फ्री शहर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के आदेशानुसार पूरे हरियाणा को 31 जुलाई तक कैटेल फ्री करना था। इसके लिए महेंद्रगढ़ नगरपालिका ने लावारिस गोवंश को पकडक़र गोशाला में डालने के लिए 430 रुपये प्रति गोवंश के आधार पर दिया था। लगभग ढाई महीने बाद भी नगरपालिका लावारिस गोवंशों को गोशाला में नहीं डाल पाई है। पालिका 333 लावारिस गोवंशों को गोशाला में भेजने का दावा किया है। उसके बाद भी शहर में 100 के करीब लावारिस गोवंश बाहर घूम रहे हैं। पालिका के अधिकारी स्वयं 20 से 25 टैग लगे हुए लावारिस गोवंश बाहर घूमतेे हुए देख चुके हैं। इसके लिए पालिका उनको नोटिस भी जारी कर चुकी है और जिला उपायुक्त को भी कार्रवाई के लिए अवगत करवा चुकी है। सितंबर में हुई मीटिंग जिला उपायुक्त राजनारायण कौशिक की ओर से ली गई मीटिंग में पालिका प्रशासन ने इस मामले को दोहराया था। जिला उपायुक्त ने एनिमल हसबैंड्री प्रशासन गोशालाओं के प्रधानों से मिलकर उनको समझाने की बात कही थी। उसके बाद भी टैग लगे लावारिस गोवंश बाहर घूम रहे हैं।
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नहीं हुआ शहर ओडीएफ फ्री
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के आदेशानुसार 31 अगस्त तक शहरों को ओडीएफ फ्री बनाना था। लेकिन नगरपालिका ने अभी तक शौचालयों का निर्माण नहीं करवाया है। पालिका ने जुलाई शहर के 6 शौचालयों के टेंडर किए थे जिनको दो माह में पूरा करना था। अक्टूबर का आधा माह बीतने को है किंतु अभी तक एक ही शौचालय बनकर तैयार हुआ है। शहर में 15 लाख रुपये के सात शौचालय बनने थे जिनमें एक की अनुमति अभी जिला उपायुक्त से नहीं मिल पाई है। शौचालय नहीं बनने के कारण शहर में खरीदारी करने आए ग्राहक और दुकानदार खुले में शौच जाते हैं। इसके अलावा झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोग भी खुले में शौच जा रहे हैं।

27 लाख रुपये के बनने थे 22 शौचालय
31 अगस्त तक नगरपालिका को 28.54 लाख रुपये की लागत से 22 शौचालय बनाने थे। शहर के मुख्य बाजारों में 15 लाख रुपये से 7 शौचालय बनाने थे। ये शौचालय रेलवे रोड, आईटीआई रोड, गोशाला रोड, कोका बंगड़ी, अंबेडकर चौक, मोहल्ला वाल्मीकि आदि स्थानों पर बनने थे। इनमें से आईटीआई का शौचालय बनकर तैयार हो चुका है। शेष टायलेट अभी नहीं बन पाए हैं। इसके अलावा 10 लाख रुपये से 14 प्री कास्ट टायलेट सैट करने थे जिनमें से 4 ही लग पाए हैं। 3.54 लाख रुपये का एक मोबाइल टायलेट शुरू करना था वो भी शुरू नहीं हो पाया है।
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अभी शहर में लगभग 50 लावारिस गोवंश घूम रहे हैं उनको भी 15 अक्टूबर तक पकडक़र गोशालाओं में भिजवा दिया जाएगा। ओडीएफ फ्री करने के लिए शौचालय का काम चल रहा है। एक टायलेट बनकर तैयार हो चुका है। शेष अंडर प्रोसेस है।
-अंकित वशिष्ठ, एमई नगरपालिका महेंद्रगढ़।
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