अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। रिवासा गांव में बनने वाले क्षेत्रीय पशु चिकित्सा, रोग निदान एवं विस्तार केंद्र कई दिनों से बजट की वजह से अटका हुआ है। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने अप्रैल-2016 में प्रगति रैली में इसका शिलान्यास पत्थर लगाया था। विभाग ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर लीं, इसके बाद भी यह केंद्र बजट के अभाव में अटका हुआ है। इस केंद्र के लिए शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा भी चंडीगढ़ उच्च अधिकारियों से बात कर चुके हैं। इसके बावजूद इसके लिए बजट जारी नहीं हुआ है।
बता दें कि नौ अप्रैल 2016 को महेंद्रगढ़ की सब्जी मंडी में शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने रैली आयोजित की थी। इसमें मुख्यमंत्री मनोहर लाल मुख्य अतिथि थे। उन्होंने रैली के दौरान गांव रिवास की दस एकड़ जमीन पर 18.44 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पशु चिकित्सा रोग निदान एवं विस्तार केंद्र का शिलान्यास पत्थर रखा था। जनवरी में सीएम खट्टर उनके इसके लिए अनुमति दे दी थी। इसके बाद पशु एवं चिकित्सा विभाग ने इसकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को भेज दीं। यह फाइल चंडीगढ़ पहुंच चुकी है। अभी तक सरकार ने इसके लिए बजट अलॉट नहीं किया है। विभाग ने इमारत न बनने तक गांव रिवासा के पंचायत घर में केंद्र शुरू करने की योजना बनाई थी। इसके लिए रिवासा गांव की पंचायत ने प्रस्ताव पास कर सबंधित विभाग को भेज दिया था। इस पंचायत घर में भी केंद्र शुरू नहीं हो सका है।
सात पशु चिकित्सा बैठेंगे केंद्र पर
गांव रिवासा में बनने वाले पशु रोग निदान एवं विस्तार केंद्र के लिए प्रदेश सरकार ने 29 पद स्वीकृत किए है। इनमें से सात पदों पर स्पेशलिस्ट चिकित्सक रहेंगे। इनमें एमडी, गायनी, सर्जरी, रोग निदान अधिकारी, पशु विज्ञान, एक्सटेंशन और डायरेक्टर के पद स्वीकृत हैं। इसके अलावा क्लर्क, पीएन, सफाई कर्मचारी आदि के पद भी स्वीकृति हैं।
आधुनिक मशीनों का होगा प्रयोग
पशु रोग निदान एवं विस्तार केंद्र पर ऑटोमैटिक सोनाग्राफी मशीन लगेगी। मोबाइल एक्सरे मशीन से पशुपालक के घर पर जाकर पशुओं का एक्सरे हो सकेगा। एंबुलेंस और आधुनिक लैब भी स्थापित होगी। इस निदान केंद्र में ऑपरेशन थियेटर भी बनेगा।
प्रतिदिन 35 पशुओं की ओपीडी की क्षमता होगी
रिवासा में खुलने वाले पशु चिकित्सा, रोग निदान एवं विस्तार केंद्र में रीजनल सेंटर होगा। इस सेंटर से गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, झुंझुनू और भिवानी जिले के पशुपालकों को फायदा होगा। चिकित्सकों का मानना है कि सेंटर खुलने के बाद 35 ओपीडी प्रतिदिन होने की संभावना हैं। वैसे वर्तमान में 150 पशुओं का प्रति माह इलाज के लिए हिसार जाते हैं।
पशुपालकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
पशु निदान केंद्र में पशुपालकों के लिए एक्सटेंशन विंग भी खोली जाएगी। इसमें आधुनिक प्रोजेक्टर लगेगा। प्रोजेक्टर एवं चिकित्सकों द्वारा पशुपालकों को पशु पालन से संबंधित और पशुओं को होने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाएगा।
सरकार जब तक पैसे अॅलाट नहीं कर देती, तब तक काम शुरू नहीं किया जा सकता। पैसे अॅलाट होने के बाद हम टेंडर कर आगे की कार्रवाई शुरू कर देंगे।
-डॉ. गुरु दयाल सिंह, कुलपति, लाला लाज पतराय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटनरी एवं एनिमल।