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नहीं शुरू हुई बाजरे की सरकारी खरीद, किसान परेशान

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अमर उजाला ब्यूरा
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नारनौल। इस बार क्षेत्र में अच्छी बारिश न होने के बावजूद भी बाजरे की पैदावार अच्छी है। जिले में कुछ क्षेत्रों में बाजरे की कटाई हो चुकी है तो नारनौल, नलवाटी, गुजरवाटी तथा नांगल चौधरी क्षेत्रों में फसल की कटाई का काम जारी है। जहां फसल कटाई हो चुकी, वहां के किसान मंडी में बाजरा लाने लगे हैं, मगर मंडी में अभी तक बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसान परेशान हैं। वहीं इस कारण किसान अपनी बाजरे की फसल को व्यापारियों को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं।
खरीफ फसल की इलाके में कटाई चालू होने के साथ ही मंडी में बाजरे की आवक भी शुरू हो गई है। सरकार ने बाजरे का समर्थन मूल्य 1450 रुपये प्रति क्विंटल घोषित तो कर दिया है। परंतु सरकार ने मंडियों में अभी तक सरकारी खरीद शुरू नहीं करवाई है। अब तक मंडी में हजारों क्विंटल बाजरे की आवक हो चुकी है। इलाके में खरीफ फसल के दौरान मुख्यत: ग्वार एवं बाजरे की पैदावार ली जाती है। हालांकि कुछ किसान कपास एवं दलहन फसलों की पैदावार भी लेते हैं। मगर दलहन नाममात्र की ली जाती है। अबकी बार मानसून के दौरान बारिश ना के बराबर हुई है। मगर कुछ-कुछ समय के अंतराल पर हुई बारिश से भी बाजरे की फसल उत्पादन अच्छी होने की उम्मीद है। परंतु पिछले सालों की तुलना में इस बार बाजरे की पैदावार कम ही है।
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अधिकांश बाजरा पककर है तैयार
इस समय अधिकांश बाजरा पककर तैयार है और किसानों ने कटाई शुरू कर रखी है। जिन किसानों ने बाजरे की अगेती बिजाई की थी, उन्होंने अपना बाजरा निकालने के बाद उसे बाजार में बेचना शुरू कर दिया है। इसी के चलते नारनौल की अनाज मंडी में बाजरे की आवक होने लगी है।

1150 रुपये क्विंटल खरीदा जा रहा बाजरा
अनाज मंडी में एक सितंबर से अब तक हजारों क्विंटल बाजरा आ चुका है। इस समय बाजरे की सरकारी खरीद नहीं की जा रही और किसान व्यापारियों को बाजरा बेच रहे हैं। इस समय बाजरा 1150 से 1175 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जा रहा है। जबकि हरियाणा सरकार ने बाजरे का न्यूनतम मूल्य 1450 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है।

खुले आसमान के नीचे पड़ा किसानों का अनाज
नारनौल अनाज मंडी क्षेत्र में सबसे पुरानी मंडियों में से एक है। मगर अब तक इसमें किसानों को टीनशेड नहीं मिल पाई। इस कारण किसान खुले आसमान के नीचे अपनी फसलें डालने को विवश हैं। अगर जरा सी भी बारिश हो जाए तो किसानों का अनाज भीगना संभावित है।

छाया व पानी का भी नहीं प्रबंध
अनाज मंडी टीनशेड के साथ-साथ छाया एवं पीने के पानी के लिए कोई खास प्रबंध नहीं हैं। हालांकि अब नांगल चौधरी रोड पर नई अनाज मंडी तैयार की गई है। वहां मंडी बनने के बाद किसानों को थोड़ी राहत मिलने की संभावना है।

मंडी में सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई है, जबकि पैसे की जरूरत रहती है। ऐसे में बाजरे को व्यापारियों को बेचा है।
- किसान रणजीत सिंह

अनाज मंडी में टीनशेड की सबसे बड़ी कमी है। किसान अपना अनाज खुले में डालते हैं। मंडी में पशुओं के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है।
- किसान सुरेंद्र सिंह

बाजरे की सरकारी खरीद अब तक शुरू हो जानी चाहिए। सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को परेशानी हो रही है।
- किसान महेंद्र कुमार

बाजरे की सरकारी खरीद न होने के कारण किसान अपना बाजरा औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। सरकार को जल्द ही बाजरे की खरीद शुरू कर देनी चाहिए।
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- किसान महेश कुमार

बाजरा की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीद करने के अभी तक कोई आदेश नहीं मिले हैं। सरकार से आदेश आते ही किसानों के अनाज की खरीद शुरू कर दी जाएगी। प्रतिदिन 700 से 900 क्विंटल बाजरा मंडी में आ रहा है।
- आदेश कुमार, आक्शन अधिकारी मार्केट कमेटी, नारनौल।
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