तीज नजदीक आते ही बाजार में छा गई हैं पतंगें
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। बेशक इस बार महंगाई की मार पतंगों पर भी दिखाई दे रही हो, मगर पतंगबाजी के शौकीनों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। यही कारण है कि तीज के नजदीक आते ही नारनौल शहर में पतंगों की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगी है। तरह-तरह की पतंगें इस बार बाजार में हैं। पतंगबाजी करने वाले शाम होती ही अपने घरों की छत पर चढ़ जाते हैं। कई-कई बच्चे तो पूरा दिन ही पतंगें उड़ाते नजर आते हैं। इस बार पतंग बाजार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का संदेश देतीं पतंगें भी हैं। बच्चों को कार्टून की पतंगें भा रही हैं।
हरियाली तीज पर महिलाएं झूला झूलती हैं तो नारनौल शहर और आसपास के क्षेत्र में पतंगबाजी होती है। पतंगबाजी के शौकीन तीज के एक माह पहले से ही पतंगें उड़ाने लगते हैं। तीज के नजदीक आते ही बाजार में तरह-तरह की पतंगों की बहार आ गई है। मोहल्ला चांदुवाड़ा स्थित पतंग बाजार में अनेक दुकानें पतंगों से सज गई हैं।
कई प्रकार की पतंग हैं बाजार में
इस बार पतंगों में ज्यादातर पन्नी वाली हैं। कागज की पतंगों का क्रेज भी है। गुड्डा पतंग से लेकर तिरंगी, टोपियल, अंखियल के अलावा इस बार मछली के आकार की और वायुयान शेप की पतंग भी बाजार में हैं। पतंगों पर विभिन्न फिल्मी कलाकारों, राजनेताओं के अलावा क्रिकेटरों के चित्र भी बने हैं।
बढ़ गए हैं पतंगों व रील के दाम
इस बार महंगाई की मार पतंगों और रील पर दिखाई दे रही है। गत वर्षों तक 50 पैसे या एक रुपये में आने वाली पतंग अब बाजार से गायब हो गई हैं। गत सीजन में एक रुपये में आने वाली पतंग अब बाजार में दो रुपये की हो गई है। बाजार में दो, तीन, पांच, दस रुपये और 20 रुपये तक की पतंगें हैं। पतंगबाजी के शौकीन लोगों के लिए विभिन्न आकृतियों की बड़ी पतंगें भी बाजार में हैं। इनकीक कीमत 50 और 100 रुपये है। पहले 50 से 100 रुपए तक के गिट्टे 200 से 250 रुपए तक में मिल रहे हैं। बाजार में इस समय ग्लाइडर, अफजाल, कुरेसी, सिकंदर, जाकिर भाई, जाफरी, वसीम, यासिन खां और महदी हसन के गिट्टे आ रहे हैं।
35 से 50 लाख रुपये का है कारोबार
नारनौल का पतंग बाजार जिले का सबसे बड़ा पतंग बाजार माना जाता है। पूरे शहर में तीज के इस सीजन में 35 से 50 लाख रुपये तक की पतंगों और रील की बिक्री हो जाती है। एक अनुमान के मुताबिक एक दुकान पर कम से कम दो लाख रुपए तक की बिक्री होती है। ऐसे में इस बाजार में कम से कम 20 पतंग विक्रेता हैं। शहर में छोटी-मोटी जगह भी पतंग की दुकानें हैं। ऐसे में एक सीजन में करीब 35 से 50 लाख रुपए तक का कारोबार शहर में होता है।
बरेली से रील और जयपुर से आती हैं पतंग
पतंग विक्रेता रमेश कुमार हैप्पी ने बताया कि शहर में रील बरेली से आती है, जबकि पतंगों का सारा काम जयपुर से होता है। पन्नी से बनने वाली पतंगें अहमदाबाद से आती हैं। उन्होंने बताया कि इस बार पतंग और डोर दोनों के रेट बढ़े हुए हैं।
पहले जैसे शौक नहीं
पतंग विक्रेता रमेश कुमार उर्फ हैप्पी, कपिल गर्ग, राकेश, सीताराम व पारस आदि ने बताया कि पतंगबाजी को लोगों को पहले जैसा शौक नहीं है। पहले तीज के एक माह पहले और 15 दिन बात तक पतंगें उड़ती थीं। अब यह घटकर दस दिन रह गई हैं।
धड़ल्ले से बिक रहीं खतरनाक प्लास्टिक और चाइनीज रील की बिक्री
इस बार पतंग बाजार में धड़ल्ले से प्लास्टिक और चाइनीज रील की बिक्री हो रही है। बच्चे भी उसकी ही ज्यादा मांग कर रहे हैं। मगर यह रील बहुत ही खतरनाक है। गत वर्ष राजस्थान में इस रील से अलग-अलग जगह तीन-चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद इस पर वहां प्रतिबंध है। दिल्ली में भी इस रील पर प्रतिबंध है, मगर नारनौल में यह धड़ल्ले से बिक रही है।