अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। नगर परिषद नारनौल में शामिल हुए 13 गांवों से आठ गांव बाहर होंगे। इसके लिए जिला प्रशासन ने लोगों से आपत्ति/ सुझाव मांगा है। इसके बाद इन गांवों के बारे में सरकार कोई फैसला लेगी।
गांव मीरपुर, कोजिंदा, शाहरपुर अवल, रघुनाथपुरा, किरारोद अफगान, ताजीपुर (बेचिराग), लुतुफपुर (बेचिराग) व रसूलपुर (बेचिराग) गांव के लोगों को नगर परिषद क्षेत्र से बाहर करने की योजना है। नप की चेयरमैन भारती सैनी ने कहा कि नप में शामिल कुछ गांव बाहर किए जाने की योजना है। यदि किसी को इस पर कोई आपत्ति है तो छह सप्ताह में डीसी को शिकायत दे सकता है। चेयरमैन ने कहा कि आठ गांवों के अलावा अन्य गांवों के लोग भी आपत्ति/सुझाव दे सकते हैं। गांव को बाहर करने और शामिल करने का फैसला सरकार का है। नप के सचिव नवल किशोर ने बताया कि इस बारे में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आठ गांवों के लोग इस बारे में अपनी आपत्ति/सुझाव डीसी को दे सकते हैं। किरारोद अफगान गांव के सरपंच अशीष कुमार ने बताया गांव के लोग नप में शामिल नहीं होना चाहते हैं। इसे लेकर केस भी हाईकोर्ट में चल रहा है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को हर कार्य के लिए नप में आना पड़ेगा। बता दें कि अक्टूबर 2015 को सीएम मनोहरलाल ने नारनौल की विकास रैली में शहर से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों को नगर परिषद में शामिल करके उन्हें शहरों जैसी सुविधा उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के मुताबिक शहर से पांच किलोमीटर के दायरे में 13 गांवों में जैसे मीरपुर, नसीबपुर, नूनी-अव्वल, पटीकरा, कोजिंदा, शाहरपुर अव्वल, रघुनाथपुरा, किरारोद अफगान, ताजीपुर, लुतुफपुर व रसुलपुर (बेचिराग) गांव शामिल है। जिसे लेकर साल 2018 में नोटिफिकेशन जारी कर इन गांवों में नप में शामिल करने की घोषणा कर दी थी। अभी इन गांवों की जिम्मेदारी नप को नहीं मिली है। दूसरी ओर कुछ गांवों के लोगों ने अपने को नप में शामिल होने पर ऐतराज जताया। जिस पर सरकार ने आठ गांवों को नप एरिया से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन गांवों के नप में शामिल होने से पंचायतें खत्म हो रही थी। नगर परिषद में शामिल करने के बाद यहां पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। जिससे गांवों की चौधर समाप्त होकर शहर में चली जाएगी। ऐसे में गांवों की चौधर करने वाले लोग बाहर आने का प्रयास कर रहे हैं।