जिले में मात्र दस डाकिये कर रहे काम, 178 डाकिये हड़ताल पर
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिला महेंद्रगढ़ में पहले ही डाकियों का अभाव है। पूरे जिले में केवल दस ही डाकिये पक्के हैं। जिनके सहारे जिला के दोनों बड़े शहर नारनौल और महेंद्रगढ़ की डाक आपूर्ति होती है। नारनौल की एक लाख की आबादी पर सात डाकिये हैं। महेंद्रगढ़ की करीब 40 हजार की आबादी पर तीन ही पक्के डाकिये हैं। इन दिनों जिले में अनुबंध के आधार पर गांवों में लगे 178 ग्रामीण डाक सेवक हड़ताल पर हैं। ऐसे में एक सप्ताह से पूरे जिले की डाक व्यवस्था चरमराई हुई है। इस कारण लोगों को परेशानी हो रही है।
बेशक अब जमाना कोरियर का है, शहर में अनेक कोरियर सेवाएं देने वाली कंपनी कार्यरत हैं, मगर अभी भी अनेक महत्वपूर्ण पत्र व्यवहार और कागजी काम डाक विभाग से ही होते हैं। कोरियर को कम भरोसेमंद और डाक विभाग को भरोसेमंद माना जाता है। इस कारण सरकारी विभागों के सभी पत्र, विश्वविद्यालयों और शिक्षा बोर्ड के रोल नंबर आदि डाक द्वारा ही भेजे जाते हैं। ऐसे में डाक विभाग का अभी बहुत महत्व है। जिले में डाकियों का टोटा है। नौ लाख से अधिक आबादी वाले इस जिले में केवल दस ही स्थाई डाकिये हैं। 178 डाक सेवक ग्रामीण क्षेत्रों में अनुबंध के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
हड़ताल पर चल रहे ग्रामीण डाक सेवक
पूरे जिले में लगे करीब 178 ग्रामीण डाक सेवक बुधवार से हड़ताल पर हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों की डाक व्यवस्था चरमराई हुई हैं। हालांकि, हड़ताली डाक सेवकों के कारण उत्पन्न हुई समस्या से निपटने के लिए विभाग उपाय कर रहा है। इसके लिए पक्के डाकियों को आसपास के गांवों में डाक बांटने के लिए कहा गया है। इसके बावजूद ग्रामीणों के साथ-साथ शहरी क्षेत्र के लोगों को परेशानी हो रही है। हड़ताली डाक सेवकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, हड़ताल जारी रहेगी।
2004 तक थे शहर में अनेक डाकिये
1992 से 2004 तक शहर में वार्डों के हिसाब से 14 डाकिए थे। अब नारनौल में वार्ड तो बढ़कर 25 हो गए, परंतु डाकिए घट गए। शहर की आबादी बढ़ती जा रही है। कुछ साल पूर्व तक 70 से 75 हजार की आबादी वाले इस शहर की आबादी अब करीब एक लाख से अधिक हो गई है। शहर की जिस हिसाब से आबादी बढ़ रही है, उस हिसाब से शहर में डाकियों की संख्या नहीं बढ़ रही। डाकियों की संख्या बढ़ने की बजाए कम ही होती जा रही है। अब नारनौल शहर में डाक की आपूर्ति करने के लिए महज सात ही डाकिये हैं।
दो साल से नहीं मिल रहे पत्र
शहर के अनेक ऐसे मोहल्ले हैं, जहां लोगों को दो-दो साल से पत्र नहीं मिल रहे। मोहल्ला सराय के राकेश सैनी, अशोक सैनी, मणीराम, राजेश, सुरेश, रविदास मंदिर मार्ग के दिनेश कुमार, शिवरत्न, एडवोकेट यतेंद्र यादव, अमित कुमार, सन्नी कुमार, मोहल्ला जमालपुर के दिनेश शर्मा, लवी कुमार, ओमी, प्रवीण कुमार, नरेश कुमार आदि ने बताया कि उनको दो साल से कोई पत्र नहीं मिलता। इस कारण वे कई बार मुख्य डाकघर जाकर ही अपनी डाक लाते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने रोलनंबर के अलावा विभिन्न योजनाओं के तहत आने वाले चेक आदि भी प्राप्त नहीं हो रहे। टेलीफोन आदि के बिल भी नहीं मिल रहे। इस वजह से कई बार जुर्माना भी भरना पड़ा है।
एक डाकिये के जिम्मे 28 किलोमीटर
जिला के दोनों शहरों नारनौल और महेंद्रगढ़ शहर में दस ही डाकिये होने के चलते एक-एक डाकिये को कई-कई मोहल्लों, कॉलोनियों का भार मिला हुआ है। एक डाकिये ने बताया कि सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक की ड्यूटी में वह बिल्कुल थक जाता है। उसने बताया कि डाकियों की कमी के कारण एक-एक डाकिये को शहर में करीब 28 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इतना लंबा चक्कर और कई मोहल्लों में जाने से उनको भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि शहर में कम से कम 15 डाकियों की जरूरत है।
सरकारी डाक नहीं लेते कुरियर वाले
कुरियर वाले सरकारी डाक नहीं लेते। यदि आप किसी सरकारी अधिकारी के पास अपनी शिकायत या अन्य कोई डॉक्यूमेंट पहुंचाना चाहते हैं तो डाक विभाग ही उनकी डाक लेता है। कुरियर कंपनी इसके लिए मना कर देती है।
डाकिया समय पर डाक नहीं लाता, इससे उनको काफी परेशानी होती है। अब डाकियों के हड़ताल पर जाने से परेशानी बढ़ गई है।
-धर्मेंद्र कुमार
डाक समय पर नहीं आती। बैंकों से होने वाले पत्र व्यवहार में देरी हो जाती है। इससे काफी समस्याएं आती हैं। हड़ताल के कारण समस्या बढ़ गई है।
-राजकुमार
डाकियों की कमी के कारण टेलीफोन के बिल, बीमा संबंधी कागजात व बैंकों के कागजात समय पर नहीं मिलते। इससे काफी नुकसान हो जाता है।
-हिमांशु
सरकारी विभागों, बीमा कंपनी अपने पत्र व्यवहार डाक से करते हैं। कुरियर का भरोसा नहीं करते। डाकियों की कमी के कारण ऐसे पत्र मिलने में परेशानी होती है।
-प्रियांशु कुमार
डाकिये हड़ताल पर होने के कारण अन्य व्यवस्था की हुई है। ग्रामीण डाकघरों पर जरूरी डाक पहुंचाई जा रही है। ग्रामीण डाक घरों को 24 घंटे खुले रहने के लिए भी बोला गया है। डाकियों की कमी को उच्चाधिकारियों से अवगत कराया हुआ है।
-देवेंद्र कुमार रंगा, सहायक निरीक्षक, मुख्य डाकघर, नारनौल।