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Mahendragarh-Narnaul News: 80% महिलाओं में एनीमिया का खतरा, गर्भावस्था में पोषण की अनदेखी कारण

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-फोटो 83 : बहादुरगढ़ में सोमवार को निकली तेज धूप और गंतव्य की ओर जाते लोग। संवाद
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बहादुरगढ़। गर्भावस्था के दौरान तांबा, जस्ता, लोहा और कैल्शियम जैसे सूक्ष्म तत्वों की कमी एनीमिया (खून की कमी) का बड़ा कारण बन सकती है। गर्भकाल में इन खनिजों की समय पर जांच कर एनीमिया से बचाव संभव है। नागरिक अस्पताल में पहुंच रही 70-80 फीसदी महिलाओं में खून की कमी की शिकायत मिल रही है।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. राज ने बताया कि ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों से आने वाली महिलाओं में जांच के दौरान एनीमिया की कमी पाई जा रही है। खासतौर पर निम्न और मध्यम वर्ग की महिलाओं में पोषण की कमी अधिक पाई जा रही है।
हालांकि अस्पताल में आने वाली महिलाओं को इसका विशेष तौर पर ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जानकारी के अभाव और लापरवाही के कारण महिलाएं गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में जांच नहीं कराती।
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कई महिलाएं आयरन और कैल्शियम की दवाएं नियमित रूप से नहीं लेती या फिर खानपान पर ध्यान नहीं देती। परिणाम स्वरूप प्रसव के समय जटिलताएं बढ़ जाती हैं और मां व बच्चे दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
एनीमिया के लक्षण
थकान महसूस होना, चक्का आना, ठंड लगना, सांस लेने में दिक्कत होना, चेहरा पीला पड़ना, सिर दर्द होना, दिल की धड़कन तेज होना, भूख में कमी होना, चिड़चिड़ापन एनीमिया के लक्षण हैं। आयरन की मात्रा को पूरा करने के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश, बादाम और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।
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बचाव
-गर्भ ठहरते ही हीमोग्लोबिन और अन्य जरूरी जांच कराएं।
-हर तिमाही में खून की जांच जरूर कराएं।
-आयरन युक्त भोजन करें।
-आयरन-फॉलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां नियमित लें।
-बिना सलाह दवा बंद न करें।
-पर्याप्त नींद लें और ज्यादा थकान से बचें।
-संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई रखें।

-फोटो 83 : बहादुरगढ़ में सोमवार को निकली तेज धूप और गंतव्य की ओर जाते लोग। संवाद

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