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गांव दौंगड़ी अहीर में स्कूल का नामकरण शहीद के नाम से नहीं होगा, पंचायत ने लिया फैसला

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अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़।
जम्मू कश्मीर में 1992 में आतंकवादियों की गोली लगने से शहीद हुए महाबीर प्रसाद के नाम पर स्कूल के नामकरण को गांव की पंचायत ने रद्द करने का फैसला लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गांव के जिस बेटे ने देश के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए, आज ग्रामीण उसी के परिवार पर स्कूल में कभी किसी प्रकार की सहायता नहीं दिए जाने के आरोप लग रहे हैं। नामकरण पर गांव में किसी प्रकार की अशांति का माहौल न बन जाए इसी को लेकर स्कूल का नामकरण रद्द करने का फैसला लिया गया।
पंचायत ने गांव में शहीद के नाम पर प्रतिमा बनाने के लिए जमीन तो दे दी थी लेकिन नामकरण के लिए मना कर दिया। यह फैसला गांव दौंगड़ा के आर्य समाज मंदिर में शुक्रवार को आयोजित गांव की पंचायत ने लिया। पंचायत की अध्यक्षता सरपंच प्रतिनिधि होशियार सिंह ने की। पंचायत ने कहा कि शहीद के नामकरण को लेकर गांव में झगड़ा एवं अशांति का माहौल पैदा हो सकता है इसलिए उन्होंने नामकरण रद्द करने का फैसला लिया है। इसकी प्रति जिला उपायुक्त गरिमा मित्तल को भेजी गई है।
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बता दें कि पिछले एक सप्ताह से गांव में स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर करने का विरोध चल रहा है। 4 मई को स्कूल में बोर्ड शहीद महाबीर दास राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लिख भी दिया गया था। किंतु ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया था। इस दौरान नायब तहसीलदार भी वहां पहुंचे थे। गांव का विरोध देखने के बाद शहीद के परिजनों ने नाम को पुतवा दिया। उसके बाद से लगातार इस मामले को लेकर गतिरोध बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को कनीना के नायब तहसीलदार ग्रामीणों को समझाने पहुंचे थे किंतु वो ग्रामीण उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुए। इस मामले को सुलझाने के लिए पंचायत ने शुक्रवार को मीटिंग रखी थी और मीटिंग में शहीद के नामकरण को रद्द करने का फैसला लिया गया।
1992 में हुआ था शहीद
शहीद महाबीर प्रसाद के बेटे सुरेंद्र ने बताया कि उसके पिता महाबीर 13 कुमाऊं में लेस नायब के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 1992 में जम्मू कश्मीर में ऑपेरशन रक्षक चला गया था। इस ऑपरेशन के दौरान उनके पिता को आतंकवादियों की गोली लगने से शहीद हो गए थे। इसके बाद राष्ट्रपति ने शहीद महाबीर प्रसाद को मरणोपरांत सेना मेडल से नवाजा गया था।
नवंबर में जारी किया गया था नामकरण का पत्र
स्कूल का नामकरण शहीद महाबीर प्रसाद के नाम पर करने को लेकर निदेशालय शिक्षा विभाग की ओर से 28 नवंबर 2017 को पत्र जारी किया गया था। उसके बाद 4 मई को स्कूल पर नाम लिखवा दिया गया था किंतु ग्रामीणों के विरोध के चलते नाम को मिटाना पड़ा।
वर्जन:
पंचायत ने स्कूल का नामकरण नहीं किए जाने का फैसला लिया गया है। इस फैसले से गांव के 85 प्रतिशत लोग सहमत हैं। इसकी कॉपी जिला उपायुक्त को भेजी गई है।
-अनुराग पूनिया, ग्राम सचिव, दौंगड़ा।
वर्जन:
मेरे पास अभी कोई कागज नहीं आया। जब तक मेरे पास कोई कागज नहीं आ जाता तब तक एक्शन नहीं ले पाउंगी।
-गरिमा मित्तल, जिला उपायुक्त महेंद्रगढ़।
वर्जन:
पंचायत की ओर से नामकरण का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया था। पंचायत की जमीन प्रतिमा के नाम पर भी दे दी गई थी और नाम भी लिखवा दिया गया था लेकिन ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया तो गांव में शांति बहाली के लिए मजबूरी वश पंचायत को नामकरण रद्द करने का निर्णय लेना पड़ा।
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-होशियर सिंह, सरपंच प्रतिनिधि।
वर्जन:
वैसे तो शहीद का अपमान है लेकिन जब आधे से ज्यादा गांव इसका विरोध कर रहा है तो वो क्या कर सकते हैं। जो निर्णय पंचायत ने लिया है वो ठीक है। जब उनके पिता शहीद हुए थे वो छोटे थे। घर पर कमाने वाली उसकी माता थी। अब वो समृद्ध हुए थे।
-सुरेंद्र, शहीद का बेटा
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