अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी।
सरसों खरीद में फर्जी गिरदावरी रिपोर्ट के इस्तेमाल पर किसानों में आक्रोश है। उन्होंने जिला उपायुक्त से मामले की जांच कराने की गुहार लगाई है, अन्यथा मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले की शिकायत की जाएगी।
मनोहरलाल, कपूर सिंह, अर्जुन सिंह, महीपाल आदि किसानों ने बताया कि नांगल चौधरी, निजामपुर डार्कजोन में शामिल है। बोरवेलों में जलस्रोत सूख चुका और अधिकतर गांव नहरों से अटैच नहीं हैं। इस कारण किसानों को पलाव करने के लिए पानी नहीं मिला। निजामपुर ब्लॉक में करीब 80 और नांगल चौधरी खंड में 60 प्रतिशत रकबा बीजाई से वंचित रह गया। लेकिन रबी सीजन की गिरदावरी में पटवारियों ने लीपापोती कर दी। कार्यालय में बैठकर पिछले साल की बीजाई के अनुसार इस साल की गिरदावरी कर दी। अबकी बार सरकार ने चार हजार रुपए प्रति क्विंटल सरसों का भाव तय कर दिया।
बाजार में साढ़े तीन हजार के भाव सरसों बिक रही है। मार्जन अधिक होने के कारण किसानों की फर्द लेकर सौदागरों ने माल बेचना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि वास्तविक किसानों को सरसों फसल की गिरदावरी देने में पटवारी आनाकानी करते हैं। 300 से 500 रुपये सुविधा शुल्क वसूलते हैं जिसकी शिकायत पिछले दिनों धोलेड़ा के किसान कर चुके। लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच एकड़ की फर्द में शामिल चार हिस्सेदारों को 5-5 एकड़ की गिरदावरी रिपोर्ट दी जाती है। ऐसे में पांच एकड़ जमीन की फर्द पर 20 एकड़ की निर्धारित सरसों बिकती है। पैसे नहीं देने पर पटवारी रकबा खाली होने की पुष्टि करते हैं। उन्होंने जिला उपायुक्त से फर्जीवाड़े की जांच कराने की गुहार लगाई है।
लिखित शिकायत नहीं मिली
नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार ने बताया कि पैसे लेकर सरसों की गिरदावरी रिपोर्ट देने की मौखिक शिकायत मिली थी जिस पर संबंधित पटवारी को कार्यशैली सुधारने की चेतावनी दी गई थी। लिखित शिकायत मिलने पर जांच संभव होगी। आरोपों की पुष्टि होने पर जिला उपायुक्त को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
1500 क्विंटल सरसों की खरीद
शनिवार को किसान उपस्थित नहीं मिलने के कारण 2500 क्विंटल सरसों की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। सोमवार को करीब तीस किसान पहचान पत्र लेकर ढेरी पर पहुंचे। फोटो मिलान करने के बाद उनकी सरसों खरीद ली गई। खरीद कमेटी में शामिल जगदीश प्रसाद ने बताया कि अभी भी करीब एक हजार क्विंटल सरसों की ढेरी पर किसान नहीं।