लाखों रुपये दान के बाद भी सुरक्षित नहीं गोवंश
महेंद्रगढ़। जिले की गोशालाओं में गोवंश सुरक्षित नजर नहीं आ रहा है। नारनौल की गोपाल गोशाला में गायों की मौत के बाद अब श्रीकृष्णा सुदामा गोशाला भालखी में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति हो गई। गाय की मौत का कारण फूड प्वाइजनिंग बताया जा रहा है।
गोशाला चला रहे महाराज सुरेश मुनि ने बताया कि दूसरी गोशाला से बासी रोटियां लाई गई थीं। वही रोटियां खाने की वजह से गोवंश की हालत बिगड़ी है। पशु चिकित्सक बलजीत और अरुण जैन ने बताया कि गोवंश को तीन दिन की बासी रोटी खिला दी गई थी, जिससे वे बीमार हो गए। उन्होंने बताया कि लगभग 85 गोवंश बीमार हो गए थे, इनमें से 20 की मौत हो गई। शेष की हालत ठीक है। अभी उनको चरने में दो दिन का समय लग जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले गोपाल गोशाला में सौ से अधिक गोवंश मर चुके हैं। इसके अलावा अन्य गोशालाओं में भी दो-तीन गोवंश मरते रहते हैं जिनको बाद में चुपके से दबा दिया जाता है। आपको बता दें कि जिले में 25 गोशालाएं हैं, जिनमें से 19 रजिस्टर्ड हैं। इनमें पिछले छह महीने में 150 से अधिक गोवंश की मौत हो चुकी है। मरने वालों में अधिक गोवंश रजिस्टर्ड गोशाला की हैं। इन गोशालाओं को गोसेवा आयोग की ओर से पिछले दो वर्ष से 150 रुपये प्रति गोवंश चारा का दिया जा रहा है। इसके अलावा क्षेत्र से भी लाखों रुपये दान दिया जाता है। विगत गोपाष्टमी पर्व पर शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने आठ गोशालाओं में 5-5 लाख रुपये देने की घोषणा की है। इसके अलावा गांव के लोग भी दान देने में पीछे नहीं रहते। उसके बाद भी गोशालाओं में गायें सुरक्षित नहीं रह पा रही हैं और उनका रखरखाव ठीक से नहीं हो पा रहा है। प्रशासन की ओर से गोशालाओं में गायों के मरने के बाद भी जाकर चेक नहीं किया जाता। शुक्रवार को प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।