पिलर बॉक्सों में मीटरों पर लगेगी सील
-पिलर बॉक्सों पर लगाएगा ताला, तोड़ने पर होगा केस दर्ज
फोटो नंबर 17
अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के मकसद से गांवों में पिलर बॉक्स लगवाकर मीटरों की तालाबंदी कर दी गई, लेकिन अधिकांश उपभोक्ताओं ने ताले तोड़कर मीटर जला दिए। इस कारण निगम आर्थिक घाटे पर काबू नहीं पा रहा है। समाधान को लेकर निगम ने खराब मीटरों को बदलने और पिलर बॉक्स में ज्वाइंटों पर सील लगाने की योजना बनाई है। मीटर की सील टूटी मिलने पर संबंधित उपभोक्ता के खिलाफ चोरी का केस दर्ज होगा।
बता दें कि सरकार के आदेशानुसार, गांव स्तर पर बिजली सप्लाई पहुंचा दी गई है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए निगम को कर्मचारी एवं संसाधन भी उपलब्ध करवा दिए गए। किंतु अभी भी 50 प्रतिशत से अधिक ग्रामीणों ने मीटर नहीं लगवाए वे अब भी नंगे तारों पर कुंडी कनेक्शन कर बिजली चोरी करते हैं। कई उपभोक्ता मीटर से सीधे कनेक्शन लेकर निगम को चपत लगा रहे हैं। विभिन्न गांवों में बिजली चोरी होने के कारण निगम को प्रतिमाह करीब 40 लाख यूनिट का नुकसान हो रहा है। वहीं चोरी पर अंकुश लगाने के मकसद से निगम के अधिकारी और विजिलेंस टीम छापेमारी करने में जुटी है, परंतु कर्मचारियों की किल्लत के चलते इसके सकारात्मक परिणाम नहीं मिले। इसके बाद करीब चार साल पहले निगम ने गांवों में पिलर बॉक्स लगाने की योजना बनाई। नांगल चौधरी के 25 से अधिक गांवों में 250 पिलर बॉक्स लगाए गए हैं। तर्क दिया कि ट्रांसफार्मर से पिलर बॉक्स तक रबड़ युक्त केबल बिछाई जाएगी और बॉक्स में लगे मीटरों से उपभोक्ताओं के घर तक इसी केबल का इस्तेमाल होगा। बॉक्स की एक चाबी मीटर रीडर और दूसरी चाबी लाइनमैन के पास रहेगी। कुंडी कनेक्शन व मीटरों की डायरेक्ट सप्लाई से छुटकारा मिलने पर उपभोक्ताओं को अधिक वोल्टेज बिजली मिल सकेगी, लेकिन एक महीने बाद ही उपभोक्ताओं के पिलर बॉक्स के ताले तोड़ दिए, वहीं अंधेरा होते ही बॉक्स खोलकर अपने मीटरों की सप्लाई डायरेक्ट कर देते हैं। तारों की बार-बार अदला-बदली होने के कारण 90 प्रतिशत से अधिक मीटर खराब हो चुके। चोरी बढ़ने पर निगम ने खराब मीटरों को बदलने और कनेक्शनों पर सील लगानी शुरू कर दी। रमेश कुमार, सत्यबीर, अशोक, सुरेंद्र यादव व विजय सिंह आदि उपभोक्ताओं ने बताया कि पिछले 2-3 महीने से बिजली के बिलों की राशि करीब तीन गुणा बढ़ गई। जबकि घर में इतनी यूनिट खर्च भी नहीं होती। आरोप लगाया कि शातिर उपभोक्ता दूसरे मीटर में सप्लाई तार जोड़ देते हैं। रातभर हीटर, प्रेस, चक्की व अन्य उपकरण चलते हैं। इसकी यूनिट दूसरे उपभोक्ता के बिल में जुडे़ंगी।
खुले पिलर बॉक्स से जानलेवा खतरा
गांवों में पिलर बॉक्स सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए हैं। इनके आसपास खेल मैदान, मंदिर, स्कूल व आम रास्ता है। वहीं खतरे से अनजान बच्चे बॉक्सों से छेड़छाड़ करने लगते हैं। इस दौरान बॉक्स का दरवाजा खुला रहने से जानलेवा हादसे की आशंका बढ़ गई। इसके अलावा तारों के साथ छेड़छाड़ होने पर शार्ट-सर्किट हो जाएगा। दर्जनों मीटर जलने और नजदीक पड़े ईंधन को आग लग सकती है।
उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ेंगे मीटर के पैसे
पिलर बॉक्स के खराब मीटरों की अधिकारी पहले जांच करेंगे, फॉल्ट साबित होने पर बदले जाएंगे। इसके पैसे कंज्यूमर के बिल में जोड़ने के निर्देश हैं। केबल व अन्य उपकरणों का खर्चा निगम वहन करेगा। बॉक्सों के ताले भी निगम ही खरीदेगा। इसकी निगरानी लाइनमैन व मीटर रीडर को रखनी होगी।
सील तोड़ने पर बनेगा चोरी का केस
निगम के कनिष्ठ अभियंता सत्यपाल सिंह ने बताया कि पिलर बॉक्सों के खराब मीटर बदलने और सील लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। सभी बॉक्सों के ताले लगाए जाएंगे। इसके बाद मीटर की सील टूटी मिलने पर संबंधित उपभोक्ता के खिलाफ चोरी का केस दर्ज होगा। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह में सभी खराब मीटर रिप्लेस कर दिए जाएंगे।