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बैठक में अधिकारी नहीं पहुंचे तो सीईओ ने ली अधिकारियों की हाजिरी

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जिप की बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, पार्षदों ने किया हंगामा
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नारनौल। पंचायत भवन में आयोजित जिला परिषद की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। जिले के अधिकारियों की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट जिला पार्षदों ने बैठक में विरोध जताया। पार्षद के विरोध का जिला प्रमुख राजेश देवी ने भी समर्थन किया और कहा कि मैं भी अधिकारियों के काम से खुश नहीं हूं। अधिकारियों को अपने काम करने का तरीका बदलना होगा। वहीं कुछ पार्षदों ने यह तक कह दिया कि अधिकारी नहीं आते तो वे बैठक का औचित्य ही क्या रह गया। कुछ ने इस मामले को सीएम के समक्ष रखने की बात कही।
वीरवार को जिला परिषद की बैठक पंचायत भवन में सुबह 11 बजे आयोजित की गई। सुबह 11 बजे केवल जिला प्रमुख राजेश देवी अपने पांच पार्षदों के साथ पहुंची। अन्य पार्षदों के लेट आने से करीब आधे घंटे बाद बैठक शुरू हुई। जिला प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए करीब एक माह पूर्व एकत्र हुए जिला पार्षद आधे घंटे तक बैठक में नहीं आने से कानाफूसी होने लगी लेकिन साढ़े 11 बजे उपप्रमुख सुशीला देवी पहुंच गई। इसके बाद पौने 12 बजे तक करीब 19 में से 15 पार्षद बैठक में पहुंचे तब जिला परिषद के डिप्टी सीईओ दीपक यादव ने बैठक की शुरूआत की।
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52 में 15 एजेंडों का अधिकारियों ने दिया जवाब
डिप्टी सीईओ दीपक यादव ने जिप बताया कि पिछली बैठक में 52 एजेंडे पास किए गए थे। जिनको पूरा कराने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों के पास भेजा गया था। लेकिन इनमें से केवल 15 एजेंडों के ही अधिकारियों ने जवाब दिए हैं। इस पर जब डिप्टी सीईओ ने बैठक में मौजूद अधिकारियों से जवाब न देने का कारण पूछा तो पता चला कि कई अधिकारी मौजूद ही नहीं हैं। इस पर पार्षदों ने अधिकारियों के न आने पर हंगामा शुरू कर दिया।
अधिकारी नहीं कर रहे है कोई काम
पार्षद इंद्रपाल यादव ने कहा कि ऐसे में बैठक का औचित्य ही क्या है, क्यों ना इसका बहिष्कार कर दिया जाए। वहीं प्रदीप मालड़ा ने कहा कि दो साल निकल गए लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई काम नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेना होगा तथा डीसी से इस मामले की शिकायत करनी होगी। यदि अधिकारी न मानें तो सीएम से मुलाकात कर इनकी शिकायत करनी होगी। इस पर जिला प्रमुख ने भी कहा कि वे उनके साथ हैं, अधिकारी उनकी भी नहीं मानते।
बैठक में अधिकतर विभागों के अधिकारी मिले अनुपस्थित
जिला परिषद की बैठक में जब अधिकारियों के नहीं आने पर विवाद होने लगा तो पार्षदों को को शांत करने के लिए जिला परिषद के सीईओ जगवीर सिंह अधिकारियों की हाजिरी लेने लगे। हाजिरी लेने पर पता चला कि पीडब्ल्यूडी, नाबार्ड, खाद एवं आपूर्ति व मार्केट कमेटी विभाग समेत अनेक विभागों का कोई भी अधिकारी या प्रतिनिधि बैठक में नहीं है। इसके बाद उन्होंने फोन कर कई अधिकारियों से बैठक में नहीं आने का कारण भी पूछा।
बिना सहमति के पास होते हैं एजेंडे : कुलदीप
बैठक में पार्षद कुलदीप सुरजनवास ने कहा कि हर बार एजेंडे पास हो जाते हैं लेकिन वे कैसे पास होते हैं, इस बारे में बताया जाये। उन्होंने कहा कि बैठक भी टाइम पर नहीं होती। न ही पार्षदों की सहमति ली जाती। बिना पार्षदों की सहमति के एजेंडे पास कर लिए जाते हैं।
पार्षदों और अधिकारियों का बनेगा व्हाट्सएप ग्रुप
बैठक में सीईओ जगवीर सिंह ने कहा कि एजेंडे की कॉपी या अन्य संबंधित दस्तावेज के लिए जिला परिषद का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा। जिसमें जिला के सभी पार्षद व जिला अधिकारी जुड़े होंगे। इस ग्रुप में पार्षद अपनी बात रख सकेंगे। वहीं जो आवश्यक दस्तावेज वे मांगेंगे, उनको इस ग्रुप में डाल दिया जाएगा।
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अपने काम के लिए पैसा, लोगों के लिए नहीं
बैठक में सोलर पावर प्लांट, शौचालय का निर्माण, वाटर कूलर, मीटिंग हाल, डीआरडीए की तीन दुकानों को ऊपर उठाने, वाइस चेयरमैन के लिए कमरा बनाने संबंधी एजेंडे को अधिकारियों ने पार्षदों से कहकर पास करवा लिया। इसके बाद प्रदीप मालड़ा ने जैसे गली का निर्माण करवाने और पानी की टंकी आदि बनवाने की बात उठाई तो अधिकारियों का कहना था कि इसके लिए ग्रांट नहीं है। तब कुछ पार्षदों ने कहा कि यह काम वो किस मद या ग्रांट से करवाएंगे। तब डिप्टी सीईओ ने कहा कि ये सब जिला परिषद की ही ग्रांट से होगा। इस पर कुछ पार्षदों ने कहा कि अपने काम के लिए जिप में पैसा है, जबकि जनता के काम के लिए कोई पैसा नहीं है।
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