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67 गांवों में लिंगानुपात 500 से भी कम

Sat, 12 Dec 2015 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला नारनाैल
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देवेंद्र यादव
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नारनौल। बेशक कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जिला प्रशासन सख्त कार्रवाई कर रहा है, इसके बावजूद जिले में लिंगानुपात में अपेक्षाकृत सुधार दर्ज नहीं हुआ है। हालांकि आंकड़ों में पिछले साल की तुलना में सुधार है। बृहस्पतिवार को भी एसडीएम और डीएसपी के नेतृत्व में महेंद्रगढ़ से लिंग जांच मामले में छापामारी की थी। जिले में 67 ऐसे गांव और ढाणियां हैं, जहां इस साल 1000 के मुकाबले 500 से भी कम कन्याओं ने जन्म लिया है। ऐसे में लिंगानुपात में सुधार जिला प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।

पांच साल में जिले का लिंगानुपात 1000 लड़कों के मुकाबले 800 से ऊपर नहीं गया है। इस बार यह आंकड़ा 802 तक पहुंच गया है, इसके बावजूद जिले के 67 ऐसे गांव हैं, जहां यह आंकड़ा 500 को भी पार नहीं कर पाया है। पाली पीएचसी में 17 गांव और ढाणियां पड़ती हैं। इनमें इस साल नवंबर माह तक 85 बच्चों ने जन्म लिया। 58 लड़के और 27 लड़कियों ने जन्म लिया है। पीएचसी का लिंगानुपात 1000 के मुकाबले 466 रहा, जो जिला में सभी पीएचसी में सबसे कम लिंगानुपात है। बाछौद पीएचसी में 22 गांव आते हैं। यहां नवंबर माह तक 37 बच्चों ने जन्म लिया, इनमें 25 मेल और 12 फिमेल हैं। इस पीएचसी का लिंगानुपात 480 रहा। वहीं तीसरे नंबर पर सिहमा पीएचसी है। यहां इस साल नवंबर माह तक 67 बच्चों ने जन्म लिया। इसमें 45 मेल और 22 फिमेल है। यहां पीएचसी का लिंगानुपात 489 रहा।
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- सीमावर्ती इलाकों में सुधार
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का हर बार तर्क देते हैं कि जिला राजस्थान से लगता है। इसलिए सीमावर्ती गांवों से लिंगानुपात की स्थिति गंभीर है। इस बार के आंकड़ों को देखें तो इस बार सीमावर्ती गांवों में लिंगानुपात में सुधार हुआ है। निजामपुर के पास ब्राह्मणवास पीएचसी में सबसे ज्यादा सुधार हुआ। सात गांवों वाली इस पीएचसी में 1000 के मुकाबले यह अंतर 1200 रहा। यहां कुल 11 बच्चों ने जन्म लिया। इसमें से छह फिमेल और पांच मेल हैं। वहीं नांगल चौधरी के पास 23 गांव और ढाणियों वाली बुढ़वाल पीएचसी में यह 1091 रहा। यहां नवंबर माह तक कुल 46 बच्चों ने जन्म लिया। इसमें 24 फिमेल और 22 मेल हैं। तीसरे नंबर पर दोचाना पीएचसी है, जो गोद बलाहां के पास राजस्थान की सीमा से टच है। यहां लिंगानुपात 879 रहा। 11 गांव और ढाणियों वाली इस पीएचसी में 171 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 91 फिमेल और 80 मेल हैं।
कई बार हो चुकी छापामारी
स्वास्थ्य विभाग इस बार नारनौल और महेंद्रगढ़ के नीतू नर्सिंग होम में दो बार, महेंद्रगढ़ के दीप अस्पताल, जय अस्पताल, यादव अस्पताल में एक बार, राम अस्पताल, यादव अस्पताल, विजय अस्पताल, चौधरी क्लीनिक आदि में एक-एक बार और कनीना में एक बार छापामारी हो चुकी है।
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इस साल जिले में लिंगानुपात
जनवरी    799
फरवरी    809
मार्च    785
अप्रैल    800
मई    798
जून    763
जुलाई    743
अगस्त    891
सितंबर    849
अक्टूबर    824
नवंबर    804
कुल    802
जिला में जन्में बच्चे
कुल        मेल    फिमेल
14746    8184    6562

- पांच साल का आंकड़ा
साल        लिंगानुपात
2009        789
2010        773
2011        735
2012        770
2013        745
2014        738
2015 अब तक        802

जिले में अल्ट्रासाउंड की स्थिति
अल्ट्रासाउंड केंद्र    30
सिटी स्कैन        01
एमटीपी सेंटर        10

जिले में पीएनडीटी एमटीपी एक्ट सख्ती से लागू है। इसके तहत सालभर में कई जगह छापामार कार्रवाई की गई। सरकार के निर्देशानुसार लिंगानुपात को सुधारने के लिए प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही जिला का  लिंगानुपात 900 तक पहुंच जाएगा। जिन गांवों में लिंगानुपात कम है, वहां ज्यादा फोकस किया जाएगा। - डा. अश्विनी कुमार रोहिल्ला, जिला इंचार्ज पीएनडीटी और उप सिविल सर्जन
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