कोरोना महामारी के दौरान छह महीने बाद निजी और सरकारी स्कूलों पर छात्र पहुंचे। लेकिन, ज्यादातर निजी स्कूलों में सोमवार को न अध्यापक पहुंचे और न ही विद्यार्थी पहुंचे। नारनौल ब्लॉक में यदुवंशी शिक्षा निकेतन में स्कूल बस में बच्चे पहुंचे। वहीं सरकारी स्कूलों नौंवी 12वीं 22512 में से 696 छात्र स्कूल पहुंचे। कोविड-19 के चलते लंबे लॉकडाउन के बाद सोमवार को स्कूल खोलने के आदेशों हुए थे। जिसमें स्कूल खुलने से पहले स्टाफ को कोरोना टेस्ट करवाना अनिवार्य था। दो दिनों से नागरिक अस्पताल में निजी स्कूल के अध्यापकों की कोरोना टेस्ट के लिए लाइन लगी रही। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना टेस्ट की फीस निर्धारित कर दी। फीस निर्धारित होने के बाद अध्यापकों ने कोरोना टेस्ट नहीं करवाया। कोरोना टेस्ट नहीं होने के कारण ज्यादातर स्कूलों में न तो अध्यापक पहुंचे और न ही विद्यार्थी। कोविड-19 के खतरे को भांपते हुए अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। यदुवंशी शिक्षा निकेतन में बच्चें स्कूल की बसों में बैठकर विद्यालय पहुंचे।
सरकारी स्कूलों में पहुंचा स्टाफ, लेकिन निजी स्कूलों में नहीं पहुंचा स्टाफ
कोरोना वायरस के साये में स्कूलों को खोलने के आदेशों पर सोमवार को अमल हुआ है। जिले में सरकारी स्कूलों में 696 विद्यार्थी अपना डाउट्स क्लियरिंग करने पहुंचे। हालांकि स्कूलों में 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्रों को आने की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन उन्हें भी अपने अभिभावकों से इस संबंध में लिखित अनुमति लेकर स्कूल आना होगा। हालांकि इससे पूर्व ऑनलाइन पढ़ाई चल रही थी। लेकिन, शैक्षणिक पाठ्यक्रम में कुछ ऐसे विषय भी हैं, जिन्हें छात्र ऑनलाइन क्लियर नहीं कर पा रहे थे। इसी के चलते जिन विषयों में छात्रों को कठिनाई पेश आ रही थी, उनकी समस्या के समाधान के लिए स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया गया है, जिसके लिए कई तरह की गाइडलाइंस जारी की गई है। जिसके तहत स्कूलों में मात्र आधा स्टाफ मौजूद रहेगा। स्कूलों में कोविड-19 महामारी को लेकर जारी की गई तमाम गाइडलाइन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। बच्चों को अनिवार्य रूप से मास्क भी पहनना होगा, स्कूल के मुख्य गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग से जांच के बाद ही स्कूल में प्रवेश होगा। जिले में नौंवी और दसवीं में 11945 और 11वीं और 12वीं में 10576 बच्चे पढ़ रहे हैं। वहीं कई स्कूलों पर बच्चे नहीं पहुंचे और टीचर इंतजार करते रहे।
निजी स्कूल रहे बंद, अध्यापकों की कोरोना जांच फ्री में करने की मांग
मंडी अटेली। 9 से 12 वीं कक्षा के विद्यार्थी पठन-पाठन करने के लिए औपचारिक रूप से सोमवार से स्कूल खुल गए। लेकिन स्कूलों में छात्र भी नहीं पहुंचे। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रधान विजय पाल रोहिल्ला स्कूल के लिए कोरोना की जांच करवाई तो रिपोर्ट कोराना पॉजिटिव मिली। उन्होंने कोरोना पॉजिटिव होने की स्वयं जानकारी दी। अभिभावक अब भी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने के लिए तैयार कम दिखाई दे रहे हैं। प्रधान ने निजी स्कूलों के शिक्षकों से जांच के रुपये पर भी सवाल उठाए। निजी स्कूल शिक्षकों की जांच भी निशुल्क हो। अटेली खंड के सरकारी स्कूलों में पहुंचे 42 विद्यार्थी पहुंचे। जानकारी के अनुसार अटेली खंड में 11 हाई व 16 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं।
बीईओ संतोष चौहान ने बताया कि तिगरा हाई स्कूल में 15, बाछौद बाल में 3, नीरपुर में 17, चंदुपरा में 4, राता कला में 3 विद्यार्थी पहुंचे। बीईओ ने बताया कि स्कूलों में मुख्य द्वारा पर सैनिटाइज, पानी-साबुन, बच्चों को मास्क के साथ अध्यापकों को मास्क लगाने की सख्त हिदायतें दी हुई थी।
सरकारी स्कूलों में पहले दिन 696 विद्यार्थी अपना डाउट्स क्लियरिंग करने पहुंचे। जिनका अध्यापकों ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बच्चों के डाउट्स क्लियरिंग किए थे। धीरे-धीरे स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ेगी। कोरोना संक्रमण को लेकर सरकारी स्कूलों में पूरे इंतजाम किए गए थे। किसी भी विद्यार्थी को कोई दिक्कत नहीं आई।
- सुनील दत्त, जिला शिक्षा अधिकारी