अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। बाजरे को लेकर किसानों की मुसीबतें शुक्रवार को भी जारी रहीं। आढ़तियों के पास बोरियों की सिलाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण मंडी में करीब 3600 बोरियों का उठान नहीं हो सका। बोरियों का उठान न होने के कारण मंडी में शुक्रवार को खरीद भी नहीं हो सकी।
शुक्रवार को हरियाणा वेयर हाउसिंग को बाजरे की खरीद करनी थी। एचडब्ल्यूसी की परचेजर ऑफिसर रूबी हुड्डा सुबह से ही मंडी में पहुंच गई थी। यहां मंडी में आढ़तियों की दुकानों के बाहर पहले से ही बोरियों पड़ी थी। इस कारण मंडी में बाजरा डालने की जगह नहीं बची। बाजरा लेकर आए किसान चक्कर लगाते दिखाई दिए। बाजरा खरीद को लेकर अधिकारी भी किसानों को जवाब नहीं दे पा रहे थे। अधिकारी बोरियों के उठान को लेकर आढ़तियों से बातचीत करते रहे। वहीं, आढ़तियों ने कहा कि बाजरे की पैकिंग कराना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। हमारे पास मशीन और सिलाई करने वाली लेबर भी नहीं है। ऐसे में एचडब्ल्यूसी ही बोरियों की सिलाई का काम पूरा कराएं। एचडब्ल्यूसी की परचेजर ऑफिसर रूबी हुड्डा ने कहा कि आढ़तियों को आढ़त व दामी इस काम के लिए दी गई है। बाद में आढ़ती बोरियों की सिलाई करने को तैयार हो गए। आढ़तियों ने कहा कि वह दूसरे शहर से सिलाई मशीन मंगवा रहे हैं। इसके लिए उन्हें समय चाहिए। शुक्रवार शाम तक सिलाई का काम शुरू नहीं हो पाया।
नोडल अधिकारी ने हाथ पकड़कर हैफेड मैनेजर को धकलते हुए कहा गेट आऊट
अनाज मंडी में 3600 बोरी का उठान अटके होने के बाद बाजरा खरीद के लिए नियुक्त किए गए नोडल ऑफिसर वत्सल वशिष्ठ शुक्रवार शाम मंडी में पहुंचे। मंडी में पहुंचते ही नोडल ऑफिसर भड़क गए और हैफेड मैनेजर संजीव कुमार को लताड़ते हुए बोले मैं रोज 500 आदमियों से बात करता हूं। जितने लच्छे बातों के तू बनाता है, तेरे से दोगुने लच्छे तो मैं बनाकर दे दूंगा। तीन दिन से खरीद हो रही है तो उठान कौन कराएगा। दोबारा मुझे मिस गाइड करने की कोशिश की तो इलाज मुश्किल हो जाएगा। साथ ही नोडल अधिकारी ने मैनेजर का हाथ पकड़कर गेट आउट बोलते हुुए आगे की ओर धकेल दिया। इसके बाद भी उनका गुस्सा कम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ नहीं पता, रात को ही सभी बैगों का उठान होना चाहिए।
बोले किसान
गांव खेड़ा निवासी रोहताश ने कहा कि शुक्रवार सुबह पांच बजे बाजरा लेकर आए थे। मंडी में बाजरा उतारने की जगह तक नहीं बची है। कब खरीद होगी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा। कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। मंडी में बाजरे की लावारिस पशुओं से सुरक्षा करना भी चुनौती है।
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गांव सिंगड़ा निवासी कृष्ण ने बताया कि 36 क्विंटल बाजरा मंडी में लेकर आया हूं। बाजरा जांचने के लिए कोई अधिकारी नहीं आया। बाजरे के दाम को लेकर भी कोई कुछ नहीं बता रहा। मंडी में बाजरे की बोरियों का उठान नहीं हो पा रहा। किसान बाजरे को लेकर परेशान हैं।
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गांव मुुडायन निवासी महेंद्र बोले 22 क्विंटल बाजरा बेचने आए हैं। यहां तो पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। मंडी में कोई कहीं आराम करने के लिए जगह भी नहीं। आढ़तियों की दुकान में बैठकर तो कभी अपनी बाजरे की ढेरी पर लेटकर टाइम पास कर रहे हैं।
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गांव खायरा निवासी नित्यानंद ने कहा साहब इस बाजरे ने तो दम निकाल दिया है। हमें पता लगा कि अब बोली होने लगी तो हम यहां बाजरा लेकर आए थे। अब शुुक्रवार को कोई बोली नहीं हुई। सुुबह से शाम तक भटक रहे हैं। खरीदना तो दूर कोई बाजरे को देखने तक नहीं आया।
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बाजरे की खरीद में व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस कर्मचारी तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
कनीना। कनीना मंडी में खरीद के शुक्रवार को 4114 क्विंटल बाजरे की खरीद की गई। शुक्रवार को हरियाणा वेयर हाउसिंग की ओर से बाजरे की खरीद की गई। पहले दिन बुधवार को 580 क्विंटल बजारे की खरीद की गई थी। वेयर हाउस के प्रबंधक केकेराव ने बताया कि खरीदे गए बाजरे का उठान भी हाथोंहाथ करवा दिया है।
किसानों को ऑनलाइन टोकन दिए जा रहे हैं। मार्केट कमेटी की ओर से गेट पास अलाट किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से किसानों का बाजरा 1950 रुपये के समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है। जिसमें से 1500 रुपये प्रति क्विंटल की राशि उन्हें दी जा रही है। 450 रुपये की राशि कृषि विभाग की ओर से किसानों के खाते में डाली जाएगी। बाजरे की खरीद के लिए व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस कर्मचारियों की तैनाती की गई है। मार्केट कमेटी चेयरमैन राजकुमार यादव ने कहा कि किसानों के बाजरे की खरीद की जाएगी। इस अवसर पर हैफेड प्रबंधक सतेंद्र सिंह यादव, भरपूर सिंह, राजेश यादव, अशोक कुमार, रोशन लाल, रविंद्र कुमार उपस्थित थे।