आधार नंबरों से लिंक नहीं हुए साढ़े दस हजार बच्चों के बैंक अकाउंट
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। कागजी कार्रवाई में सरलता और तत्परता लाने के मकसद से स्कूली योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया गया था। लेकिन, स्कूल प्रशासन हाईटेक होने के लिए तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि जिले में साढ़े दस हजार विद्यार्थियों के बैंक अकाउंट अभी तक आधार से लिंक नहीं हैं। इसलिए पिछले सत्र में उन्हें वर्दी भत्ता नहीं मिला। डाटा अपडेट के लिए अधिकारी अब भी गंभीर नहीं हुए हैं। ऐसे में वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी आर्थिक सुविधा अटकने की संभावना है।
बता दें कि कंप्यूटर क्रांति के चलते विभागीय दफ्तरों को हाईटेक कर दिया गया। सरकार के निर्देशानुसार शिक्षा विभाग ने भी पिछले साल सभी योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया। यहां तक की बच्चों की दाखिला रिपोर्ट भी ऑनलाइन की गई। अब विद्यार्थियों का दो स्कूलों (निजी या सरकारी) में पंजीकरण नहीं हो सकेगा। अप्रैल महीने में वर्दी का बजट सीधा बच्चों के अकाउंट में डालने का निर्णय लिया गया। उच्च स्तरीय निर्णय के मुताबिक स्कूल प्रबंधन कमेटी (एसएमसी) की निर्धारित वर्दी अभिभावक स्वयं खरीदेंगे। इससे पारदर्शिता के साथ अभिभावकों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। निदेशालय ने स्कूल इंचार्जों को विद्यार्थियों के बैंक अकाउंट और आधार नंबर एमआईएस पोर्टल पर डालने के निर्देश दिए थे। लेकिन, अधिकांश शिक्षकों ने विभाग के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। इस कारण 50 से 70 प्रतिशत बच्चों का रिकॉर्ड ही आनलाइन हो सका है। इनका रिकार्ड निर्धारित पोर्टल पर अपडेट हो चुका है और उन्हें बजट उपलब्ध करवा दिया गया है। अन्य विद्यार्थियों के वर्दी भत्ता आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। इसके बारे मेें ब्लॉक स्तर पर पत्र आ चुका। बावजूद इसके अधिकारियों ने आधार नंबरों को मैनेजमेंट इंफोर्मेशन स्कूल (एमआईएस) पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है।
57 में से 32 आवेदन रद्द
नांगल चौधरी प्राथमिक स्कूल के 57 दाखिले पोर्टल पर अपग्रेड किए गए है, लेकिन आधार लिंक नहीं होने के कारण 32 आवेदन रद्द कर दिए गए हैं। बजट से वंचित बच्चे सालभर पुरानी या रंग-बिरंगी ड्रेस पहनकर स्कूल आ रहे हैं। इससे स्कूल का अनुशासन प्रभावित हो रहा है। साथ ही अभिभावक भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
इस साल का बजट भी अटका
नांगल चौधरी ब्लॉक के अंतर्गत विभिन्न स्कूलों में पहली से आठवीं तक नौ हजार बच्चों के दाखिले हो चुके हैं। इन्हें अप्रैल के प्रथम सप्ताह में वर्दी भत्ता मिलना था, लेकिन विभागीय लेटलतीफी और तकनीकी कारणों के चलते बच्चों के अकाउंट में बजट नहीं पहुंचा। पिछले साल वंचित बच्चों के डाटा अभी भी अपडेट नहीं हुआ है।
60 फीसदी अभिभावक मूलभूत सुविधा देने में नहीं है सक्षम
नांगल चौधरी खंड में 103 प्राथमिक पाठशालाएं हैं। सोमवार सुबह विभिन्न गांवों के 45 स्कूलों का सर्वे किया गया। इस दौरान एक भी स्कूल में सरकारी कर्मियों के बच्चों का दाखिला नहीं मिला। 60 से 80 फीसदी बच्चों के अभिभावक मजदूरी करते हैं। वे आर्थिक तंगी के चलते बच्चों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने तक में सक्षम नहीं हैं।
लचर व्यवस्था का खामियाजा भुगत रहे विद्यार्थी
सरकार के निर्देशानुसार बच्चों को अप्रैल महीने में वर्दी का बजट मिल जाना चाहिए था, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया सुविधा में बाधा बन गई। इस कारण अधिकांश बच्चे फटेहाल स्कूल पहुंचते है। अभी तक पढ़ने के लिए किताबें भी नहीं मिली हैं। इस लचर व्यवस्था का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा।
बच्चों का कोई वर्क पेंडिंग नहीं
इस मामले में पीएनबी और सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के प्रबंधकों से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि स्कूल इंचार्जों ने जितने आधार नंबर उपलब्ध करवाए थे, वे अकाउंट से लिंक हो चुके हैं। बच्चों का कोई वर्क पेंडिंग नहीं है। इंचार्जों को सूची का दोबारा अवलोकन करना चाहिए।
बैंकों में जमा करवा दिए आधार नंबर
नांगल चौधरी प्राथमिक स्कूल के इंचार्ज नरेश यादव ने बताया कि बैंक में सभी बच्चों के आधार नंबरों की सूची जमा करवा दी गई है। इसके बाद भी वर्दी भत्ते के आवेदन रद्द कर दिए गए। अकाउंट खुलवाते समय भी आधार कार्ड आईडी के रूप में दिया गया था। इसके बाद भी बैंक कर्मचारी खातों को लिंक नहीं कर रहे।
पिछले दिनों निदेशक के साथ विडियो कांफ्रेंसिंग हुई थी। इसमें विद्यार्थियों के वर्दी भत्ते की समस्या के बारे में बताया गया था। उन्होंने कहा था कि आधार नंबर मैच नहीं होने से समस्या है। टेक्नीशियन एमआईएस पोर्टल को अपडेट कर रहे हैं। पिछले साल और वर्तमान सत्र की राशि जल्द अकाउंट में जमा हो जाएगी।
-प्रेमचंद, एपीसी, शिक्षा विभाग, नारनौल।