भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता हैं : महाराज
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। स्थानीय अग्रवाल सभा में कारोतिया परिवार और आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को वृंदावन से पधारे कथा वाचक पंडित राधेश्याम शास्त्री ने बताया कि जब जीव के जन्म जन्मांतर के पुण्य एकत्रित होते हैं। तब जाकर इस धरती पर भागवत कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता हैं। भागवत कथा श्रवण करने से धुंधकारी व्यक्तियों की भी युक्ति हो गई है, अर्थात प्रेत मुक्ति का श्रेष्ठ साधन है भागवत कथा।
इस दौरान महाराज ने शुक देव के जन्म की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवत के प्रधान वक्ता शुक देव है। प्रधान श्रोता परीक्षित हैं। उन्होंने कथा में बताया कि कुंती ने श्री कृष्ण से वरदान के रूप में दुख मांगा, क्योंकि दु:ख में प्रभु की याद बनी रहती हैं। सुख के माथे सिल पड़े जो हरि हृदय से जाये, बलिहारी वो दुख की जो पल-पल याद कराए। उन्होंने समझाया कि करनी का फल तो भोगना ही पड़ेगा। द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण ने द्वारिका में आने पर सर्व प्रथम अपने माता-पिता को प्रणाम कर यह संदेश दिया कि हम सबको अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। मंदिर में न मिलेंगे, गुरुद्वारे न मिलेंगे, घर में ही बैठे है तेरे भगवान कर ले मां को प्रणाम, कर ले पिता का प्रमाण। महाराज ने कलियुग की व्याख्या में बताया कि कलियुग का मतलब है कलह। कलियुग का आगमन हुआ और पांडव हिमालय गमन, राजगद्दी परीक्षित को मिली। कलियुग-पांच स्थानों पर रहता है। जुआ घर, कट्टी खना, वेश्यालय, शराब घर और सोना। उन्होंने शिव सती चरित्र के बारे में कहा कि जो व्यक्ति दूसरे को नीचा दिखाने के लिए धार्मिक कार्य का आयोजन करता है, वह मात्र दिखावा होता है, पाखंड होता हैं। ये धर्म नहीं अधर्म ही होता हैं। इस दौरान कथा सुनने वालों को शिव पार्वती के विवाह की कथा के साथ सुन्दर झांकी का दर्शन करवाया गया।