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छह वर्ष बाद भी अलवर-चरखी दादरी रेलवे लाइन के सर्वे का इंतजार

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अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़। छह वर्ष गुजर जाने के बाद अलवर से चरखी दादरी रेलवे लाइन का सर्वे नहीं हो पाया है। दैनिक रेलयात्री संघ ने अनेकों बार धरना-प्रदर्शन करके इस लाइन का सर्वे करवाने। दिल्ली-सादलपुर लाइन पर नई रेल गाड़ियां चलाने की मांग करते रहे हैं। इससे अलावा रेलवे के उच्च अधिकारियों से इस लाइन का सर्वे कराने की मांग भी की जा चुकी है। इसके बाद भी रेलवे लाइन पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह ने भी इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने के सार्थक प्रयास नहीं किए। इस घोषणा को लेकर प्रदेश के शिक्षामंत्री रेल मंत्री सुरेश प्रभु से कई बार मिल चुके हैं। उन्हें भी रेल मंत्री से केवल आश्वासन ही मिला है। क्षेत्र की जनता ने केंद्र सरकार पर जो उम्मीद जताई थी, सरकार उस पर खरा नहीं उतर पाई है।
आपको बता दें कि केंद्र की यूपी-2 सरकार में रेलमंत्री रहीं ममता बनर्ती ने 2011-12 के रेल बजट में अलवर से चरखी-दादरी तक रेलवे लाइन बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद जिले के लोगों को उम्मीद हुई थी कि अब इस पिछड़े क्षेत्र की तरक्की के रास्ते खुल जाएंगे। साथ ही अन्य शहरों से रेलमार्ग से जुड़ने का सपना भी पूरा हो जाएगा। इसके बाद महेंद्रगढ़ जिला राजधानी चंडीगढ़ से भी जुड़ जाएगा। रेलों की संख्या बढ़ने से लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान होंगे। यूपीए सरकार में सर्वे नहीं होने के बाद क्षेत्र की जनता को भाजपा सरकार से आश थी, लेकिन यह अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
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रेल मंत्रालय ने देश के हर क्षेत्र में रेल लाइनों का जाल बिछाया है, किंतु अलवर से वाया बहरोड़, नारनौल, महेंद्रगढ़ चरखी दादरी तक के रेल यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। इससे जिले के लोगों को दादरी, रोहतक, भिवानी और हिसार आने-जाने में परेशानी होती है।
लाइन बनने से खर्च होगा कम
अलवर से चरखी दादरी की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 160 किलोमीटर है। इसे तय करने में पांच घंटे तक का समय लगता है। इसका बस किराया लगभग 150 रुपये है। यदि रेल सेवा प्रारंभ हो जाए तो एक यात्री पैसेंजर गाड़ी का लगभग 35 रुपये और एक्सप्रेस गाड़ी का 70 रुपये किराया पड़ेगा।
डबल ट्रैक बनने से महेंद्रगढ़ तक बढ़ेंगी गाड़ियां
एनडीए सरकार ने अपने 2014 के पहले हाफ बजट में रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ तक रेलवे लाइन को डबल ट्रैक करने की घोषणा की थी। इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यदि यह ट्रैक बना दिया जाए तो इससे महेंद्रगढ़ की जनता को फायदा होगा। साथ ही रेवाड़ी में रात के समय ठहरने होने वाली गाड़ियों का बोझ भी कम हो जाएगा। ये गाड़ियां रात के समय रेवाड़ी जंक्शन पर खड़ी होती हैं। यदि वे महेंद्रगढ़ आकर खड़ी होंगी तो इससे महेंद्रगढ़ की जनता को गाड़ी मिल जाएगी। इससे रेवाड़ी स्टेशन पर भी गाड़ियों का दबाव कम हो जाएगा।

यूपीए सरकार ने अलवर, नारनौल, महेंद्रगढ़, सेंट्रल यूनिवर्सिटी होते हुए चरखी दादरी रेलवे लाइन सर्वे की घोषणा की थी। वर्तमान में केंद्र सरकार यूपीए सरकार की इस घोषणा की ही पूर्ति नहीं कर पा रही। ऐसा लगता है कि मोदी सरकार ने आने के बाद इस योजना को ड्रॉप कर दिया ह्रै।
-दान सिंह, पूर्व सीपीएस, कांग्रेस।

अभी रेलवे लाइन का कोई सर्वे नहीं हुआ है। यदि कोई रेलवे लाइन बनाने की बात कह रहा है तो वह झूठ है। झूठ के अलावा कुछ नहीं है।
-चौधरी धर्मबीर सिंह, सांसद, महेंद्रगढ़ भिवानी।

अलवर से चरखी दादरी तक रेलवे लाइन बनने से क्षेत्र को बहुत फायदा होगा। महेंद्रगढ़ से रेवाड़ी डबल लाइन होने से ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। इस बात को मैं डीआयूसीसी बीकानेर मंडल का सदस्य होने के नाते सितंबर में होने वाली मीटिंग मेें जरूर रखूंगा।
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-सुंदरलाल जोरासिया, डीआरयूसीसी बीकानेर मंडल।

रेलवे के सर्वे का कार्य हमारे पास नहीं होता। यह कार्य रेलवे बोर्ड का होता है। उन्हें देखना होता है कि सर्वे कहां किया जाना है। हमारे पास इस बारे में किसी प्रकार कोई जानकारी नहीं है।
- सीआर कुमावत, डीसीएम, बीकानेर मंडल
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