फोटो नंबर-27प्रशिक्षण शिविर के शुभारंभ पर अध्यापकों के साथ जिला शिक्षा अधिकारी। स्रोत-वि
नारनौल। जिला महेंद्रगढ़ के सभी पांचों खंडों में सोमवार से एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी) का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम विधिवत रूप से प्रारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले के कुल 520 प्राथमिक अध्यापकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को निपुण बनाना व उनकी कमजोर दक्षताओं को दूर करने के लिए अध्यापकों को प्रभावी रणनीतियों से लैस करना है। प्रशिक्षण के दौरान अध्यापकों को प्राथमिक कक्षाओं की रीमेडियल शिक्षण पद्धतियों पर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इसमें बच्चों की कमजोर शैक्षणिक दक्षताओं की पहचान कर उन्हें सुधारने के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण, रोचक अभ्यास, खेल-आधारित अधिगम और सतत मूल्यांकन की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षकों द्वारा बताया गया कि बच्चों को सीखने में रुचि उत्पन्न कर ही उन्हें निपुण बनाया जा सकता है, इसलिए कक्षा शिक्षण को आनंददायक और सहभागी बनाना अत्यंत आवश्यक है।
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. विश्वेश्वर कौशिक ने खंडों में चल रहे प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा किया। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल अध्यापकों से संवाद करते हुए जिले को निपुण बनाने का स्पष्ट लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि एफएलएन कार्यक्रम के माध्यम से प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता और गणनात्मक दक्षताओं में सक्षम बनाना प्राथमिकता है और इसमें अध्यापकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
जिला समन्वयक डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि सेंसस के माध्यम से प्रत्येक बच्चे की कमजोर दक्षताओं का विस्तृत डाटा उपलब्ध हो चुका है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से अध्यापकों को उस डाटा के आधार पर बच्चों की कमजोरियों को समझकर उन्हें सुधारने की दिशा में कार्य करने के लिए तैयार किया जा रहा है।