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मोदाश्रम के पास नपा की जमीन में 100 से 150 मृत गोवंश, कंकाल खुले में पड़े हुए मिले

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अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़। मोदाश्रम के पीछे नगर पालिका की खाली जगह पर सोमवार को मरे हुए गोवंश और कंकाल पड़े मिले। गोवंशों को बहुत कम खुदाई करके दबाया गया था। जिन पर ढकने के लिए मिट्टी भी नहीं डाली गई थी। कुत्ते और पक्षी कंकालों को नोंच रहे थे। जिन्हें देखकर मौके पर पहुंचे गोभक्तों ने रोष जताया। साथ ही खाटूधाम गोशाला के दो कर्मचारियों को मृत बछड़ा मौके पर डालते हुए पकड़ा। इसके बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने गोभक्तों को आश्वासन दिया कि प्रशासन की ओर से जेसीबी मंगवाकर मृत गोवंश को गहरा गड्ढा खोदकर दबा दिया जाएगा। साथ ही गोशाला संचालकों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा जाएगा। मौके पर पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. भूप सिंह भी पहुंचे।

गोभक्तों ने बताया कि शहर में रविवार को एक सांड़ की मौत हो गई थी। उसे दबाने के लिए वो सोमवार को मोदाश्रम मंदिर के पीछे नगर पालिका की खाली जगह पर लेकर गए थे। वहां उन्होंने देखा कि लगभग 100 से 150 मृत गोवंश और कंकाल खुले में पड़े मिले। जिस बारे एसडीएम विनेश को सूचना दी। इसके बाद तहसीलदार सुुुभाषचंद और पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. भूप सिंह मौके पर पहुंचे। उक्त अधिकारियों से गोभक्तों ने गोवंशों को सही तरीके से दबाने और सभी गोशालाओं का निरीक्षण करने की मांग की।
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पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूप सिंह ने बताया कि मृत गाय एक साथ डाली हुई है। दुर्गंध से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है बल्कि बीमारी फैलने का डर रहता है। जहां मृत गोवंश डाला गया है, वह स्थान मोदाश्रम मंदिर से मात्र 500 मीटर दूरी पर है। इस रोड से देवास एवं चितलांग गांव के लोगों का आवागमन रहता है। मंदिर में भी सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग पूजा अर्चना के लिए आते हैं।
वहीं, गोभक्तों ने सोमवार को खाटूधाम गोशाला के दो कर्मचारियों मामूली गड्ढा खोदकर मृत बछड़े को दबाते हुए देखा। मृत बछड़े पर डालने के लिए उनके पास मात्र एक किलो नमक की थैली थी। गोभक्तों ने गोशाला के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कर्मियों ने बताया कि पिछले तीन दिन में यहां दबाने के लिए दो गाय, एक बछड़े को लाए हैं। लगभग दो महीने पहले गायों की रोटियों बेचने के मामलों में खाटूधाम गोशाला सुर्खियों में आई थी। इस गोशाला के प्रधान के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था।

क्या बोले लोग
सरकार की ओर से करोड़ों रुपये गोशालों पर खर्च करती है। गोशाला के नुमाइंदे उन पैसों का दुरुपयोग कर रहे हैं। सरकार के मंत्री और विधायक भी गोशालाओं को लाखों रुपये का दान देते हैं। मरी हुई गाय की भी दुर्दशा हो रही है। फिर उनको पैसा देने का क्या फायदा?
- आशीष।

प्रशासन की ओर से गोशालाओं को हिदायत दी जाए कि मृत गायों को जगह-जगह न डाला जाए। गोशाला के अंदर ही गड्ढा खोदकर और नमक डालकर दबाया जाए। अगर हम हिंदू होने पर भी गोवंशों का इस तरह से डालते हैं तो यह गलत है।
- धीरेंद्र कुमार।

जिले में जितनी भी गोशालाएं है उनका निरीक्षण किया जाना चाहिए। गाय की किस तरह से सेवा हो रही है। उनको खाना पीने में क्या दिया जा रहा है। गोशाला के कर्मचारी बछड़े को दबाने के लिए आए हैं उनके पास नमक तक नहीं है।
- विकास जांगड़ा।

नगरपालिका की एक एकड़ जमीन पर चहारदीवारी खींचकर दो तीन आदमी छोड़े जाएं। एक जेसीबी और नमक का प्रबंध किया जाए। गोवंश को ठीक तरीके से दबाया जाए। लावारिस पशुओं के लिए भी उचित प्रबंध करने की जरूरत है।
- अमित भार्गव

हिंदू धर्म में गायों को माता के रूप में पूजते हैं। लोग गोशालाओं में दान तथा सवामणी लगाकर धर्म कमाते हैं। गायों की दुर्दशा हो रही है। मरने के बाद गायों को मिट्टी में दबा भी नहीं सकें तो यह पूरे समाज के लिए शर्मनाक है। प्रशासन को चाहिए इस मामले में कोई सख्त कदम उठाए।
- कमल तिवाड़ी।

बोले अधिकारी
नपा की जमीन पर डाले गए मृत गोवंश में गोशाला के अलावा लावारिस गोवंश भी हैं। रोड पर जो लावारिस गोवंश मर जाते हैं उनको भी यहां लाकर दबा दिया जाता है। खाटूधाम गोशाला नहीं है बल्कि ट्रस्ट है। अवैध रूप से गोशाला बनाकर गायों को रखा जा रहा है। इसके खिलाफ पहले भी मामला दर्ज है। महेंद्रगढ़ कोर्ट में इसका केस भी चल रहा है। पशु पालन विभाग की ओर से गोशालाओं को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब मांगा जाएगा।
- डॉ. भूप सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग।

वर्जन
मृत गोवंश खुले में पड़े हुए थे। उनको हमने जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर और नमक डालकर दफना दिया है। इसकी रिपोर्ट हमने एडीसी को सौंप दी है। अधिकारियों के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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- सुुुभाष चंद, तहसीलदार महेंद्रगढ़।

वर्जन
ट्रस्ट में कोई गोवंश मर जाए तो उसे सही तरीके से दफन कराया जाता है। हम हादसों में घायल गोवंश को लाकर उपचार देते हैं। इस कारण कुछ गोवंश उपचार के बीच मर जाते हैं। आज दो नए कर्मचारी गए थे। उन्हें जानकारी नहीं होने के कारण दिक्कत रही होगी।
- जयप्रकाश, संचालक, खाटूधाम गोवंश चिकित्सालय, गोशाला ट्रस्ट।
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