फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों को दालों और अन्य फसलों के आय- व्यय का अंतर समझाया

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

महेंद्रगढ़। कृषि विज्ञान केंद्र ने वीरवार को गांव नांवा में चना खेत दिवस का आयोजन किया। इस मौेके किसानों को चना फसल की अच्छी पैदावार के लिए उन्नत कृषि क्रियाओं के बारे में बताया गया। चना की फसल में लगने वाले कीटों और बीमारियों के पहचान, उनकी रोकथाम के उपाय बताए गए। केंद्र के फार्म प्रबंधन के विशेषज्ञ और कार्यक्रम के आयोजक डॉ. अशोक ढिल्लों ने बताया की दालों की जरूरत, उत्पादन में काफी अंतर है। उत्पादन की तुलना में जरूरत अधिक है।
दालों की पूर्ति के लिए सरकार को काफी मात्रा में दालों का आयात करना पड़ता है। आयात खर्च कम करने और किसानों की आमदनी दोगुना करने के लिए दालों का उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को दालों की फसलों और अन्य फसलों से प्राप्त होने वाले के आय व्यय के अंतर के बारे में बताया। केंद्र के वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ. जयलाल यादव ने बताया कि गांव नांवा में चना फसल के 70 एकड़ में प्रदर्शन प्लाट लगाए गए थे। जिनमें उन्नत किस्म का बीज सीएसजे 515, जीवाणु खादों का प्रयोग, संतुलित मात्रा में खादों का प्रयोग, सामयिक खरपतवार नियंत्रण, दीमक और सुंडी की रोकथाम, जड़ गलन और झुलसा रोग की रोकथाम की तकनीकों को प्रदर्शित किया गया।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि चने की फसल में सुंडी के प्रकोप से लगभग 20-30 प्रतिशत तक पैदावर कम हो जाती है। जब पौधों में करीब 50 प्रतिशत टाट बन गए हों या एक सुंडी प्रति मीटर लम्बे खूड में मिले तब इसके नियंत्रण के लिये 150 मि.लि. नोवालुरान 10 ईसी कीटनाशक को 150 लीटर पानी प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें। जरूरत पडने पर दूसरा छिड़काव 15 दिन बाद करें ।
विज्ञापन

केंद्र के वरिष्ठ संयोजक और सस्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश कुमार ने उपस्थित किसानों, महिलाओं को चना फसल के लगाए हुए प्रदर्शन प्लाट की उन्नत कृषि क्रियाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि चना की किस्म सीएसजे 515 एक उन्नत किस्म है। इसकी पैदावार अन्य किस्मों की अपेक्षा अधिक है। उन्होंने किसानों को जिवाणु खादों का प्रयोग, संतुलित मात्रा में खादों का प्रयोग और सामयिक खरपतवार नियंत्रण से होने वाले लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों को उन्नत कृषि क्रियाओं को अपनाना चाहिए। इन तकनीकी के प्रभाव को दिखाने के लिए खेत दिवस के अवसर पर किसानों को चना फसल का प्रदर्शन प्लाट दिखाया गया। इस अवसर पर 50 किसानों ने भाग लिया। गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. पूनम ने किसानों को चना के मूल्य संवर्धन के बारे में जानकारी दी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें