डिलवरी के दौरान बच्चे की सही तरीके से जन्म न कराने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने कनीना की एक निजी अस्पताल संचालक पर पांच लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। यह जुर्माना चिकित्सक को शिकायत कर्ता के शिकायत दर्ज कराने के बाद से अब तक 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देना होगा। फोरम ने अपना यह फैसला एक फरवरी को सुनाया।
फोरम के चेयरमैन बुद्धदेव यादव ने बताया कि 25 जून 2008 को छितरौली निवासी सुनील देवी पत्नी बलराज सिंह ने एक बच्चे ने जन्म दिया था। यह डिलवरी कनीना के एक निजी अस्पताल में हुई यहां बीएएमएस चिकित्सक हैं। बच्चे के पिता बलराज सिंह का आरोप है कि जन्म के समय निजी अस्पताल की चिकित्सक ने काफी देरी की। इसके कारण बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं है।
इसके चलते बलराज ने 24 जून 2010 को इसकी शिकायत जिला उपभोक्ता फोरम नारनौल में की। फोरम ने इस बारे में जांच की तो पाया कि बच्चा 100 प्रतिशत तक मानसिक व शारीरिक रूप से विकलांग है। इसके बाद उन्होंने सीएमओ को पत्र लिखकर इस बारे में जांच की तो पता चला कि बच्चा जल्दी पैदा करने के लिए चिकित्सक द्वारा गर्भवती महिला को एक इंजेक्शन की हाई डोज दी गई। जिसके कारण बच्चे के जन्म के समय गलत असर पड़ा। जांच में चिकित्सक की पूरी-पूरी गलती पाई गई। वहीं अस्पताल के पास उस समय किसी प्रकार की एंबुलेंस सेवा का न होना और अन्य लापरवाहियां भी मिली। जांच के आधार पर उन्होंने अस्पताल की चिकित्सक डा. मोनिका, जो की एक बीएएमएस हैं, पर पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना चिकित्सक शिकायतकर्ता के शिकायत दायर करने के समय से ही शुरू होता है, जो अब 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से दिया जाएगा।
बीएएमएस चिकित्सक नहीं दे सकते एलोपैथी दवाईयां
उपभोक्ता फोरम के चेयरमैन बुद्ध देवी यादव ने बताया कि उक्त चिकित्सक बीएएमएस हैं। इन्होंने आयुर्वेद पढ़ा है। एलोपैथी दवा के बारे में इनको कोई ज्ञान नहीं है। इसलिए उक्त चिकित्सक किसी भी सूरत में एलोपैथी दवा नहीं दे सकते, जबकि गर्भवती महिला को चिकित्सक ने एलोपैथी दवा दी। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी उन्होंने नारनौल के एक निजी चिकित्सक पर जुर्माना लगाने का एक आधार यह था कि उक्त चिकित्सक ने एलोपैथी दवाईयां दी। इस दौरान अधिवक्ता उषा यादव और लोकेश नंदवानी आदि थे।