क्रशरों से उड़ती डस्ट के विरोध में रविवार को ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद सोमवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम एसडीओ आरके भौंसले के नेतृत्व में धौलेड़ा पहुंची। टीम ने यहां ग्रामीणों की शिकायत सुनी। इसके बाद गांगोताना और जैनपुर में चार क्रशरों को सील कर दिया। इसके अलावा टीम ने क्रशर संचालकों को नियमित पानी के छिड़काव के भी आदेश दिए।
हरियाणा में माइंस बंद होने के कारण राजस्थान से पत्थर सप्लाई हो रहा है। क्रशर संचालक पत्थरों की पिसाई के दौरान पानी का छिड़काव नहीं करते। सूखा बुरादा हवा से साथ उड़ता गांव में पहुंच रहा है। दरवाजा व रोशनदान बंद करने के बावजूद बारीक डस्ट से छुटकारा नहीं मिल रहा है। सीमेंटेड डस्ट सांस के साथ शरीर में प्रवेश करनी शुरू हो गई। इसके प्रभाव से गांव में दमा, एलर्जी, आंख आदि रोग पनपने शुरू हो गए।
इस समस्या के समाधान को लेकर ग्रामीण करीब 10 बार सड़क मार्ग जाम कर चुके। हर बार अधिकारी जल्द कार्रवाई का भरोसा देकर जाम खुलवा देते हैं। मापदंडों की अनदेखी करने वाले क्रशर संचालकों पर कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में रोष है। विरोध में नाराज ग्रामीणों ने शनिवार सुबह क्रशर मार्ग बंद कर दिया। देर शाम तक प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों की समस्या सुनने नहीं पहुंचे। जिससे लोगों का गुस्सा उबाल खा गया और रविवार को धौलेड़ा-नारनौल सड़क मार्ग को बाधित कर दिया।
सुबह 10 बजे पहुंची टीम
प्रशासनिक आदेशों के उपरांत प्रदूषण बोर्ड की टीम सुबह 10 बजे क्रेशर जोन पहुंची। निरीक्षण के दौरान धोलेड़ा क्रेशर जोन में उन्हें स्थिति संतोषजनक मिली। इसके बाद गांगोताना तथा जैनपुर में निरीक्षण किया गया। जहां प्रदूषण के मापदंड अधूरे होने के कारण चार क्रेशरों को सील कर दिया गया।
संचालकों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
विभाग के एसडीओ आरके भौंसले ने बताया कि प्रदूषण के मापदंडों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। नियमित औचक निरीक्षण की रूपरेखा बनाई गई है। फिलहाल संचालकों को एक सप्ताह के अंदर नियमित पानी छिड़काव के आदेश दिए हैं। पालन नहीं होने पर क्रशर चलाने की अनुमति नहीं मिलेगी।