जिला शिक्षा विभाग ने 10वीं व 12वीं में 80 फीसदी रिजल्ट लाने का लक्ष्य रखा है। दूसरी ओर जिले में 116 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में से 44 स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं। ऐसे में स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को डीडीओ के सहारे नहीं चलाया जा सकता। स्कूलों में प्रिंसिपल के पद हैं तो नियुक्ति भी होनी जरूरी है।
बता दें कि शिक्षा निदेशालय शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए कई कदम उठा रहा है। इसमें सक्षम योजना के साथ निष्ठा कार्यक्रम के तहत टीचरों को ट्रेनिंग देकर पाठन पाठन में सुधार करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। जिससे सरकारी स्कूलों में शैक्षिक स्तर को सुधारा जा सके। दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में प्रिंसिपल के पद स्वीकृत होने के बाद भी नहीं लगाना गलत है।
उनका कहना है कि सक्षम योजना, एचआरएमएस, स्कॉलरशिप व डायट में बैठकों के अलावा बेहतर पठन-पाठन को लेकर प्रिंसिपल कार्य करता है। ऐसे में जिस स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं, वहां पर सीनियर टीचर को यह सभी कार्य करने पड़ रहे हैं। ऐसे में इस टीचर के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा स्कूलों में भी बेहतर शैक्षिक माहौल नहीं बन पाता है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर स्कूल के माहौल पर पड़ता है। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के जिला प्रधान प्रदीप कुमार ने कहा कि सरकार ने पिछले साल साल तबादला के वक्त सीनियर सेकेंडरी स्कूलों पर कंडीशन लगा दिया था कि जिन स्कूलों में 350 से कम बच्चे हैं, वहां पर प्रिंसिपल नहीं होगा। ऐसे में तबादला के वक्त इन सीटों को कैप्ट कर दिया गया। सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को बैसाखी पर नहीं चलाया जा सकता। इसका प्रभाव बोर्ड के परीक्षा परिणाम पर पड़ सकता है। हसला प्रधान ने कहा कि जब स्कूल में पद है तो उस पर नियुक्ती होनी चाहिए।
कम छात्र बने कारण
जिले में 122 प्राइमरी स्कूलों में बच्चे कम होने पर सरकार बंद करने या मर्ज करने जा रही है। इसे लेकर सरकारी स्तर पर कार्य चल रहा है। यदि शिक्षक संगठनों ने सीनियर सेकेंडरी स्कूलों पर ध्यान नहीं दिया तो उन पर भी संकट आ सकता है क्योंकि 44 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में बच्चों की कम संख्या के आधार पर विभाग ने प्रिंसिपल नहीं लगाया। ऐसे में सरकारी स्कूलों में सरकार को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने होंगे व टीचरों को पठन-पाठन में और सुधार लाना होगा। बता दें कि पिछले साल अक्तूबर में तबादला के वक्त बच्चों की संख्या का कंडीशन लगा दिया गया था।
खंडवार बिना प्रिंसिपल वाले स्कूलों की संख्या
अटेली ब्लॉक में तीन, नारनौल ब्लॉक में तीन, नांगल चौधरी ब्लॉक में 11, कनीना ब्लॉक में 10, महेंद्रगढ़ ब्लॉक में 17 स्कूलों पर प्रिंसिपल नहीं हैं।
सरकार को सभी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों प्रधानाचार्य लगाना चाहिए। अभी सरकार बैसाखी पर काम चला रही है। यदि शिक्षा में सुधार करना है तो प्रधानाचार्य व विषय अध्यापक देने होंगे। सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है। जिले के काफी स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं है। इसके लिए विभाग को पत्र लिखा गया था।
नरेंद्र सांगवान, जिला प्रधान, सलाह
सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में प्रधानाचार्य न होने से पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। इसका असर आगामी दाखिला प्रक्रिया में भी पड़ेगा। 12वीं के स्कूलों में कंडीशन लगाना गलत है। सरकार को सभी स्कूलों पर प्रधानाचार्य की तैनाती करनी चाहिए।
- प्रदीप कुमार यादव, जिला प्रधान हसला
कुछ स्कूलों में प्रिंसिपल रिटायर्ड हो गए और कुछ का तबादला हो गया। ऐसे में कई स्कूलों में प्रिंसिपल का पद खाली हो गया। स्कूलों में शिक्षण कार्य बेहतर चल रहा है।
- अजीत सिंह, डीईओ नारनौल