मनोज धर द्विवेदी
नारनौल। अगले वित्तवर्ष से जिले के नौ गांवों में शराब के ठेके नहीं खुलेंगे। जिला आबकारी एवं कराधान विभाग को 31 ग्राम पंचायतों ने शराब के ठेके नहीं खोलने का प्रस्ताव दिया था। विभाग ने नौ गांवों में अगले वित्तवर्ष में शराब का ठेके नहीं खोलने की स्वीकृत दे दी है। 22 गांवों में शराब के ठेके बंद नहीं होंगे, क्योंकि इन गांवों में शराब तस्करी के केस पाए गए हैं।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आबकारी अधिनियम के तहत यदि कोई ग्राम पंचायत शराब का ठेका नहीं चाहती हो तो उसे 31 दिसंबर तक आवेदन करना होता है। इसके बाद विभाग ऐसे आवेदनों की जांच कर मुख्यालय चंडीगढ़ भेजता है। ऐसे आवेदनों पर चंडीगढ़ में सुनवाई के बाद फैसला लिया जाता है। नियमों को पूरा करने वाले गांवों में एक अप्रैल से शराब के ठेके नहीं खुलते है। जिले में 31 गांवों की पंचायतों ने प्रस्ताव देकर शराब ठेके बंद कराने का अनुरोध किया था। आबकारी विभाग ने इन सभी आवेदनों को मुख्यालय भेजा गया था। पंचायतों को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। इसमें नौ गांवों को छोड़कर 22 गांवों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए है। 22 गांवों में शराब का ठेका बंद नहीं होंगे। क्योंकि इन गांवों अवैध रुप से शराब बेची जा रही है। बता दें कि जिले में कुल 54 शराब के ठेके खुलेंगे। पहले जिले को 11 जोनों में बांटा गया था। जो अब नौ जोनों में कर दिया गया है। जिले में 92 करोड़ रुपये में शराब के ठेके छोड़े गए हैं। पिछले साल 36 ग्राम पंचायतों ने ठेके बंद करने का प्रस्ताव दिया था। जिसमें से 11 प्रस्ताव स्वीकार हुए थे।
पंचायतों को मिलते हैं पैसे - शराब की बिक्री से केवल सरकार ही नहीं बल्कि ग्राम पंचायतें भी मालामाल हो रही हैं। अंग्रेजी शराब की प्रत्येक बोतल की बिक्री पर संबंधित ग्राम पंचायत को सात रुपये, देशी शराब की बोतल पर पांच रुपये और बीयर की बोतल पर तीन रुपये आबकारी विभाग की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वित्तवर्ष की समाप्ति पर एकमुश्त पंचायत के खाते में डाली जाती है। इसके माध्यम से ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिल जाते हैं।
इन गांवों ने भेजे थे प्रस्ताव-
गांव ढाणा, राजावास, खटोटी खुर्द, छपड़ा सलीमपुर, बास किरारोद, भांखरी,बुडिना, कोथलकलां, कुंजपुरा,शहबाजपुर, दुलोठ जाट, मंडौला,जैदपुर, बनिहाडी, माधोगढ़, हाजीपुर, गहली, ईसराणा, भालखी, रामबास, नानकवास, बवानिया, दोंगली, भूषणकलां,कांवी, मुकुंदपुरा, रामपुरा, गोठड़ी, कौथलखुर्द, निहालावास व पाल गांव शामिल है। आबकारी विभाग के नियमों के अनुसार जो गांव शराबबंदी कराना चाहता है, उसमें पिछले दो साल में शराब तस्करी का कोई केस नहीं होना चाहिए। यदि किसी गांव में एक भी केस हो तो उस गांव में ठेका बंद नहीं होता।
इन गांवों में नहीं खुलेंगे ठेके-
गांव ढाणा, राजावास, खटोटी खुर्द, छापड़ा सलीपुर, बास किरारोद, भांखरी, बुडिना, कोथलकलां व दुलोठ जाट ग्राम पंचायत शामिल है।
31 गांचवों ने शराब के ठेके बंद करने का प्रस्ताव भेजा था। सभी पंचायतों को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया था। विभाग ने नए वित्तवर्ष में नौ गांवों में शराब के ठेके नहीं खोलने का निर्णय लिया है। 22 पंचायतों में पुलिस व एक्साइज विभाग द्वारा दर्ज अवैध शराब बिक्री के मामले चल रहे हैं।
-अजीत यादव, एईटीओ नारनौल
गांव में शराब का ठेके खुलने से लोगों को परेशानी हो रही है। बंद करने का प्रस्ताव आबकारी विभाग को दिया गया था। लेकिन, उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
स्नेहलता, सरपंच ईसराणा पंचायत
गांव में शराब ठेका बंद करवाने के लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा था। चंडीगढ़ मीटिंग में अपनी बात रखी थी। अब गांव में शराब का ठेका नहीं खुलेगा। पहले शराब पीकर गांव झगड़ा करते थे और लोगों को परेशानी हो रही थी।
कांतादेवी, सरपंच बुडिना