अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़।
केंद्र सरकार द्वारा एक फरवरी को पेश किए जाने वालक रेलवे बजट में एक बार फिर महेंद्रगढ़ जिले को राजनीतिक उपेक्षा का शिकार होना पड़ सकता है। सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 7 नई रेल परियोजनाएं भेजी हैं। जिसमें से अलवर-चरखी दादरी (वाया नारनौल, महेंद्रगढ़) रेलवे लाइन परियोजना का कहीं भी नाम नहीं है। इस रेलवे लाइन के संबंध में शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा दो बार तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मिल चुके हैं। उन्हें भी केवल आश्वासन ही मिला था। किंतु क्षेत्र के सांसद ने इस लाइन के लिए कभी भी मुद्दा नहीं उठाया। अगर यह रेलवे लाइन बनती है तो महेंद्रगढ़ जिला हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ तथा राजस्थान की राजधानी जयपुर से जुड़ जाता। प्रदेश सरकार द्वारा महेंद्रगढ़ की अनदेखी किए जाने को लेकर दैनिक रेलयात्री संघ ने इसका विरोध किया है। अगर बजट में इस परियोजना की सुध नहीं ली गई तो वे धरने पर बैठ सकते हैं।
आपको बता दें कि केंद्र की यूपी-2 सरकार में रेलमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने 2011-12 के आम रेल बजट में अलवर से चरखी दादरी रेलवे लाइन का सर्वे की घोषणा की थी। घोषणा के 6 वर्ष बीत जाने के बाद भी रेलवे लाइन का सर्वे ठंडे बस्ते में पड़ा है। एनडीए सरकार बन जाने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इस रेलवे लाइन का सर्वे होने की उम्मीद थी साथ रेलवे लाइन डाले जाने की भी आशा थी। किंतु एनडीए सरकार बनने के लगभग चार वर्ष तथा प्रदेश सरकार के साढ़े तीन वर्ष बीत जाने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस रेल बजट के लिए मुख्यमंत्री ने लोहारु से भिवानी रेलवे लाइन, करनाल से यमुनानगर लाइन की फिजिबिलिटी, चरखी दादरी से गढ़ी हरसरू रेलवे लाइन सहित सात रेलवे परियोजना आम रेल बजट के लिए भेजी हैं। जब आम बजट एक फरवरी को आना है। जिससे लगता है कि इस बार भी अलवर चरखी दादरी रेलवे लाइन का का तोहफा इस रेल बजट में नहीं मिलने वाला। इससे स्पष्ट जाहिर हो रहा है कि एक बार फिर मरू भूमि के इस जिले को राजनीतिक उपेक्षा का शिकार होना पड़ सकता है।
यह होता फायदा:
अगर अलवर से चरखी दादरी रेलवे लाइन डल जाती तो इससे महेंद्रगढ़ जिला राजस्थान की राजधानी जयपुर और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से जुड़ जाता। इसके अलावा श्रद्धालुओं के आस्था केंद्र वृंदावन, मथुरा तथा आगरा से भी जिला जुड़ जाता। अलवर से मथुरा के लिए सीधी रेल लाइन का फायदा क्षेत्रवासियों को भी मिलता। अभी श्रद्धालु रेवाड़ी से अलवर फिर मथुरा जाते हैं, जिससे न केवल आर्थिक रूप से नुकसान होता है बल्कि समय भी अधिक लगता है। जिले की रेलवे से कनेक्टिविटी हो जाने से प्रतिदिन 500 यात्रियों को फायदा होता। लगभग सरकारी नौकरी, कोर्ट केस संबंधित कार्य तथा पढ़ाई के लिए बहुत से छात्र बस से चंडीगढ़ जाते हैं जिनको आर्थिक रूप से काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
राज्य सरकार की सिफारिश पर बन सकती है बात:
आपको बता दें कि 24 जनवरी को रेलवे डिविजन जयपुर के जीएम तेजपाल सिंह ने महेंद्रगढ़ का निरीक्षण किया था। इस दौरान पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि सर्वे के लिए मंत्रालय से बजट जारी नहीं हुआ है। उसी कारण इस रेलवे लाइन का सर्वे रुका हुआ है। दैनिक रेलयात्री संघ का मानना है कि अगर प्रदेश सरकार इस परियोजना की सिफारिश करती तो शायद इस बजट में सर्वे का पैसा मिल जाता।
जयपुर के लिए 600 तथा चंडीगढ़ के लिए 300 यात्री करते हैं यात्रा:
आपको बता दें कि महेंद्रगढ़ जिले से लगभग 600 यात्री जयपुर को जाते हैं। इनमें से अधिकतर मरीज तथा विद्यार्थी होते हैं। जयपुर महेंद्रगढ़ से 195 किलोमीटर दूर पड़ता है। यात्रियों को जयपुर के लिए लगभग 190 रुपये किराया महेंद्रगढ़ से देना पड़ता है। जबकि रेल का किराया 50 रुपये से कम ही लगता है। चंडीगढ़ के लिए 300 यात्री बसों से यात्रा करते हैं। चंडीगढ़ महेंद्रगढ़ से 355 किलोमीटर दूर पड़ता है जबकि इसका किराया लगभग 350 रुपये लगता है। अगर ट्रेन से सीधी कनेक्टिविटी हो जाती है तो यात्रियों का 100 रुपये में काम चल सकता है।
वर्जन:
अलवर चरखी दादरी क्षेत्र की पुरानी मांग है। मुख्यमंत्री ने सात रेल परियोजना में हमारी रेल परियोजना को शामिल न कर क्षेत्र के साथ धोखा किया है। सरकार से जो उम्मीदें थीं, उन पर अभी खरा नहीं उतर पाई है। दक्षिण हरियाणा को एनएसीआर में तो शामिल कर लिया गया किंतु यहां की परियोजनाएं अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
- सुंदरलाल जोरासिया, दैनिक रेलयात्री संघ, महेंद्रगढ़।