जिले को जल्द मिल सकता है लॉजिस्टिक हब
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिले के लिए करीब ढाई साल पूर्व घोषित हुआ लॉजिस्टिक हब का काम अब सिरे चढ़ने लगा है। इसके लिए जमीन लेने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही इस पर निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के साथ लगभग 1200 एकड़ में बनने वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए बुधवार को दुबई की शर्फ कंपनी के प्रतिनिधियों ने जिला के अधिकारियों को साथ लेकर तलोट व घाटासेर के आसपास साइट का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने प्रोजेक्ट के आसपास रेल व रोड़ कनेक्टिविटी का जायजा लिया।
जिले में बनने वाले इस सबसे बड़े प्रोजेक्ट के लिए एचएसआईडीसी व डीएमआईसीडीसी को दो फेज में बनाएगी। पहले फेज में लगभग 886 एकड़ जमीन की जरूरत होगी तथा दूसरे फेज में 300 एकड़ के आसपास की जमीन की जरूरत पड़ेगी। पहले फेज के लिए जमीन लगभग पूरी हो चुकी है। अब तक किसानों से लगभग 833 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है। शेष जमीन भी जल्द खरीदी जाएगी। इसके लिए किसानों से एग्रीमेंट किया जा रहा है।
हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रीज एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कारपोरेशन व दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलेपमेंट कारपोरेशन के संयुक्त तत्वावधान में तैयार होने वाले इस प्रोजेक्ट के संबंध में विगत दिनों मुख्यमंत्री ने दुबई की कंपनियों को निवेश का न्यौता दिया था। उसी कड़ी में बुधवार को एक कंपनी के प्रतिनिधियों ने मौके का जायजा लिया। इस प्रोजेक्ट के लिए कई विदेशी कंपनियां अपना रुझान दिखा रही हैं। इस मौके पर सीनियर टाउन प्लानर रामकुमार, सीनियर मैनेजर एस्टेट एसएस लांबा व एसिस्टैंट टाउन प्लानर प्रदीप कुमार के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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जमीन के बदले किसान को दूसरी जगह मिलेगी जमीन
नारनौल। इस प्रोजेक्ट के बीच में कुछ ऐसे किसान हैं जो अपनी जमीन नहीं बेचना चाहते। अब इस जमीन के बीच में पड़ने वाली जमीन के लिए अब राज्य सरकार द हरियाणा कनसोलिडेटिड प्रोजेक्ट लैंड (विशेष प्रावधान) एक्ट 2017 के तहत किसानों को आस-पास के गांवों में जमीन मुहैया कराएगी। सरकार ने किसी भी प्रोजेक्ट में बीच में पडने वाली ऐसी जमीन जिसको किसान नहीं बेचना चाहते, उसके लिए यह एक्ट बनाया है। इस एक्ट के तहत अगर उसी रेवेन्यू इस्टेट में जमीन उपलब्ध नहीं होती है तो दूसरे रेवेन्यू इस्टेट में भी किसानों को उतनी ही जमीन उपलब्ध कराती है। इस प्रक्रिया को सरकार जल्द ही शुरू करेगी।
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50.40 एकड़ जमीन रास्ते के लिए प्रस्तावित
नारनौल। फ्रेट कॉरिडोर के साथ बनने वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टक हब के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 148 बी तक 60 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए 50.40 एकड़ जमीन रास्ते के लिए प्रस्तावित रखी गई है। इसके अलावा सरकार ने नारनौल का पूर्वी बाईपास भी इतनी ही चौड़ाई का बनाने की योजना भी तैयार की हुई है।
-क्या है यह योजना
यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में व्यापार के लिए दिल्ली को सीधे मुंबई को जोड़ने के लिए नार्थ-वेस्ट कारीडोर के नाम से एक योजना तैयार की गई थी। इस योजना को सिरे चढ़ते-चढ़ते करीब आठ-नौ साल होने को हैं। इसके तहत दिल्ली के बाहर दादरी से मुंबई के पास कांडला बंदरगाह तक रेलवे लाइन बिछाई जानी है। जिसके एक चरण का कार्य पूरा होने वाला है। इसकी लाइनें बिछाने का कार्य चल रहा है। इस योजना के तहत दो लाइनें डाली जा रही हैं, जिनपर तेज रफ्तार की माल गाड़ियां सरपट दौड़ेंगी। इन माल गाड़ियों में आने वाले माल को रखने व आसपास से निर्मित माल को भेजने के लिए बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाया जाएगा। जहां से इस माल को हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल व जम्मू कश्मीर के शहरों में भेजा जाएगा। इस हब में बड़े-बड़े वेयर हाउस बनेंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे कई हजार लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
जमीन खरीदने का काम लगभग पूरा हो गया है। अब जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा। मुख्यमंत्री खुद इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द सिरे चढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के धरातल पर आने के बाद क्षेत्र की तस्वीर व तकदीर बदल जाएगी डॉ. अभय सिंह यादव, विधायक