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रोज मर रही गायें, फिर भी नहीं संभल रहे हालात

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-गोशाला में हर ओर गंदगी का आलम, पीने के लिए दिया जा रहा खारा पानी
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फोटो नंबर 26 से 30, 61 से 64 तक
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। यहां की गोपाल गोशाला में रोज गायें मर रही हैं। चार दिन पूर्व भी छह गायों की मौत हो गई थी। वहीं 18 माह में यहां से सैकड़ों गायें गायब हो गईं। इतना सब होने के बाद भी हालात संभल नहीं रहे हैं। एडहॉक कमेटी के सदस्य या प्रशासनिक अधिकारी अभी भी गोशाला की सुध नहीं ले रहे। रविवार को जब अमर उजाला की टीम ने गोशाला का दौरा किया तो पाया कि वहां पर हालात अभी भी बहुत ही खराब हैं। गायों की रहने की जगह के चारों ओर गंदगी का आलम है। वहीं उनके लिए सही से न चारा है न ही पानी।
गोपाल गोशाला में कभी पदाधिकारियों का आपस में विवाद रहा है तो कभी यहां पर गायों की मौत या व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। गत 15 दिनों से यहां फिर से गायों की मौत का मामला उठ रहा है। इसका खुलासा वहां पर काम करने वाले कर्मचारियों ने ही मीडिया के सामने किया था। इसके बाद वहां पड़ताल की गई तो एक माह में करीब 109 गायों के मरने की बात सामने आई। इन गायों की मौत कैसे हुई। इस बारे में वहां की एडहाक कमेटी के सदस्यों का अलग अलग जवाब था। जबकि गायों की मौत का मुख्य कारण वहां पर चारे का अभाव माना जा रहा है। अमर उजाला ने रविवार को जब गोशाला के चप्पे-चप्पे का निरीक्षण किया तो वहां अनेक खामियां नजर्र आईं।
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पीने के लिए दिया जा रहा खारा पानी
गोपाल गोशाला में गायों को पीने के लिए वहां के बने ट्यूबवेल का ही दिया जा रहा है। यह पानी गायों के लिए ठीक नहीं माना जाता और इसमें फ्लोराइड की मात्रा भी अधिक है। मगर गायों को वर्षों से यहां यही पानी नसीब हो रहा है। प्रशासन चाहे तो यहां पर टैंकरों से गायों के लिए पीने के लिए पानी की व्यवस्था कर सकती है। खारा पानी पीने की वजह से भी गायें बीमार हो सकती हैं।

कर्मचारियों की कमी, गंदगी का आलम
गोपाल गोशाला में चारों तरफ गंदगी का आलम है। गोशाला में कर्मचारियों का अभाव होने के कारण यहां अब चारों ओर गंदगी ही गंदगी पसरी पड़ी है। यहां मीडिया में मामला उठाने वाले करीब पांच कर्मचारियों को एडहाक कमेटी ने निकाल दिया है। इसके बाद से यहां कर्मचारियों का टोटा बना हुआ है। कर्मचारियों का टोटा होने के कारण यहां पर साफ-सफाई भी सही ढंग से नहीं की गई है। अंदर बाड़े में कहीं पर भी साफ-सफाई नजर नहीं आई।

गायों को नहीं मिल रहा हरा चारा
यहां पर गायों को हरा चारा नसीब नहीं हो रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि गायों के लिए दिन में हरा चारा ज्यादा मात्रा में दिया जाना चाहिए। सूखा चारा कम मात्रा में, वहीं यहां उल्टा हो रहा है। गायों के लिए जहां हरा चारा नसीब नहीं होता, वहीं उनको केवल सूखा चारा ही दिया जा रहा है।

एक-दो को छोड़ नहीं दिखते गोशाला में कमेटी सदस्य
यहां की गोपाल गोशाला की एडहाक कमेटी में 12 सदस्य हैं। मगर गोपाल गोशाला में कभी भी पूरे सदस्य नजर नहीं आते। यहां पर एक या दो ही एडहाक कमेटी के सदस्य दिखाई देते हैं। इनमें एक-दो सदस्य ही ऐसे हैं, जो रोज मिलते हैं। अन्य सदस्य कभी कभार ही गोशाला में मिलते हैं।

पांव टूटने या चोट लगने के बाद भी मर रही अनेक गाय
गोशाला में रविवार को पांच से सात गाय पांव टूटी हुई दिखाई दी। वहीं अन्य जगह चोट लगी गायें भी थीं। हालांकि इन गायों की देखभाल के लिए यहां 24 घंटे के लिए तीन पशु चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है, मगर फिर भी पांव टूटी या चोट लगी गाय ज्यादा दिन तक एक जगह पड़े रहने के कारण मर जाती है।

गायों के लिए हैं तीन पशु चिकित्सक
यहां पर गायों की देखभाल के लिए तीन चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। इन चिकित्सकों का कहना है कि वे तो यहां केवल गायों के स्वास्थ्य संबंधी ही देखभाल कर सकते हैं। गायों की मौत कैसे हुई, यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता लग सकता है, मगर किसी गाय का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता।
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गोशाला में गायों की देखभाल के लिए पशु चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है। जो गायों की अच्छे से देखभाल करते हैं। वहीं समय-समय पर पशु पालन विभाग के डायरेक्टर या वे स्वयं भी गायों की देखभाल के लिए गोशाला जाते हैं।
-डॉ. नसीब सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पशु पालन विभाग, जिला महेंद्रगढ़
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