अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। केंद्रीय विश्वविद्यालय के गेट नंबर 2 के सामने सोमवार पीड़ित कर्मचारी एवं ग्रामीणों के सहयोग से कानून व्यवस्था को मद्देनजर (धारा-144) को रखते हुए सभी लोगों ने एक निर्णय लेकर सांकेतिक धरना दिया। राकेश ने बताया कि धरने पर मुख्य मांग यह रही कि जो भी कर्मचारी केंद्रीय विश्वविद्यालय से बाहर निकाले हैं उनको वापस लिया जाए। लंबे समय से आरक्षण की जमीन के बदले रोजगार व शिक्षा में आरक्षण की मांग को दोहराया। ग्रामीणों ने कहा कि जाट-पाली के मुख्य रास्ते को बंद कर मालड़ा गांव के रास्ते बंद कर और दोहान नदी के के रास्ते को बंद कर पाली गांव को बाढ़ संकट का खतरा हो रहा है। प्रस्तावित पंचायत के द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालय में जमीनी पानी बोरवैल एक महीने बनवाकर चार बोरवैल और ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर करोड़ों रुपये की निर्माण राशि का गबन किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन क्षेत्र व विद्यार्थियों पर तानाशाही रवैया अपना रखा है। ग्रामीणों ने सरकार व प्रशासन से कुलपति को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त करने की मांग रखी। इस अवसर पर विनोद तंवर पाली, संदीप, सरजीत तंवर, धीरज ने सांकेतिक धरना दिया।