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हैंडलिंग एजेंट न होने से किसानों को खुद करनी पड़ रही मजदूरी

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अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़। हैंडलिंग एजेंट नहीं होने कारण किसान मजदूरी भी खुद कर रहे हैं। किसान मंडी में हैफेड के गोदाम से खुद बारदाना लाने को मजबूर हैं। किसान सरसों को ट्रैक्टर से खुद अपनी मजदूरी खर्च कर उतार रहे हैं। पांच दिन में अब तक केवल 704 बोरे सरसों की खरीद हो सकी है। नारनौल मंडी में मंगलवार को 2299 क्विंटल सरसों की खरीद हुई। अब तक करीब 7893 क्विंटल सरसों की खरीद हो चुकी है।
जिले की सभी अनाज मंडियों में हैंडलिंग एजेंटों के जरिए सरसों खरीदी जा रही है। महेंद्रगढ़ की अनाज मंडी में हैंडलिंग एजेंट नहीं होने का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। यहां हैफेड के जरिए सीधी खरीद की जा रही है। हैफेड अधिकारियों के पास पूरी मैनपावर नहीं होने के कारण खरीद में दिक्कतें आ रही हैं। अव्यवस्थाओं के बीच पांचवें दिन मंगलवार को सरसों की तुलाई शुरू हो सकी। हैफेड के अधिकारियों ने किसानों को ही बारदाना लाने के आदेश दे दिए। जिसके बाद किसान ट्रैक्टर ट्राली लेकर हैफेड के गोदाम पहुंचे। यहां खुद बारदाना ट्रैैक्टर में अपलोड किया। बाद में मंडी में लाकर बारदाना उतारा। किसानों ने बताया कि सरसों उतारने में किसी का सहयोग नहीं मिला। आढ़ती सरसों खरीदते थे तो वह अपने मजदूरों से उतरवाते थे। अब किसानों ने अपनी मजदूरी देकर सरसों उतरवाई। जिसमें उनका एक ट्राली पर 800 रुपये खर्च हो गए। मंगलवार को दोपहर बाद तुलाई का काम शुरू हो सका। मंगलवार शाम तक हैफेड ने 704 बोरे सरसों खरीदने का दावा किया। कनीना मंडी में मंगलवार को 984 क्विंटल सरसों की खरीद हुई। यहां अब तक 1471 क्विंटल सरसों की खरीद हो चुकी है। करीब 325 क्विंटल सरसों का उठान हो चुका है।
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गांव बुडीन निवासी कर्मबीर ने बताया कि 29 मार्च को टोकन लिया था। उस दिन अधिकारियों ने मना कर दिया तो वापस चले गए। उस दिन भी ट्रैक्टर-ट्रॉली को किराए पर लाए थे। खुद 25 क्विंटल सरसों को उतारा था। आज सुबह फिर से ट्राली में डाला।

बुडीन निवासी रामबीर ने कहा कि 29 को सरसों लेेकर आए थे। उस दिन केवल टोकन मिल सका था। अब दोबारा से सरसों लेकर आया हूं। ट्रैक्टर वाले ने ही दो हजार रुपये ले लिए। मजदूरों ने सरसों उतारने चढ़ाने के 1200 लिए। दो दिन में करीब साढे़ तीन हजार खर्च हो गए।
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गांव देवास निवासी रमेश, मालड़ा निवासी धर्मपाल, सूरत सिंह ने बताया कि दो दिन से मंडी में डटे हुए हैं। यहां किसी तरह का प्रबंध नहीं है। पानी पीने के लिए भी आढ़तियों के पास जाना पड़ता है। रोजाना चाय व खाने का खर्च अतिरिक्त हो रहा है।
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