अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहर के गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए एक और छह एमएलडी का प्लांट बनकर तैयार हो गया है। नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट एसबीआर टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इससे पहले 7.5 एमएलडी का एक प्लांट पहले से चल रहा था। अब दो प्लांट होने से सीवर के पानी का ट्रीटमेंट बेहतर तरीके से हो सकेगा।
जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से कैलाश नगर में 7.5 एमएलडी का एमबीबीआर टेक्नोलॉजी का एसटीपी प्लांट चल रहा है। अभी एक ही प्लांट से पूरे शहर के सीवर का पानी साफ किया जा रहा है। दूसरी ओर नगर परिषद का दायरा भी बढ़ रहा है और नई कॉलोनियां विकसित हो रही है। इसी को ध्यान में दूसरा प्लांट बनाया गया है ताकि गंदे के पानी का ट्रीट करने में कठिनाई न आने पाए। रेवाड़ी रोड पर बने रहे छह एमएलडी का दूसरा का करीब 90 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। करीब एक माह में प्लांट को विभाग को सौंप दिया जाएगा। जनस्वाथ्य विभाग के एसडीओ गोपाल सिंह ने बताया कि कंपनी को प्लांट बनाकर विभाग को सौंपना है। उन्होंने बताया कि इससे शहर के सीवर के पानी को बेहतर तरीके से ट्रीट किया जा सकेगा। इसके बाद पानी को अन्य कार्यों में प्रयोग किया जाएगा। पानी का प्रयोग पार्कों में भी करने की है। हालांकि अभी सीवर के कुछ पानी किसान करते है जबकि शेष पानी का छलक नाले में डाल दिया जाता है।
एसबीआर टेक्नोलॉजी बेस्ट होगा एसटीपी प्लांट
नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनने से शहर लोगों को बरसात के दिनों में नाले ओवरफ्लो होने और सीवर बैक मारने की समस्या से राहत मिलेगी, क्योंकि दो प्लांट होने से अब क्षमता 13.5 एमएलडी की हो जाएगी। जिसकी मशीनरी गंदे पानी को शोधन के लिए अधिक मात्रा में पानी लेगी और उसे स्पीड से शोधित करेगी। गंदे पानी की समस्या को पूर्ण रूप से समाधान करने के लिए पहले कैलाश नगर में 7.5 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया हुआ है। नया छह एमएलडी का प्लांट एसबीआर टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा। जिससे पानी साफ होने के बाद इसमें बीओडी की मात्रा चार प्रतिशत तक हो जाती है जो सिंचाई के लिए बेहतर है।