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कृषि परामर्श केंद्रों पर लटका ताला, किसानों को नहीं मिल रहा मार्ग दर्शन

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अमर उजाला ब्यूरो
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नांगल चौधरी। सरकार के आदेशानुसार सर्कल स्तर पर कृषि परामर्श केंद्र खोल दिए गए। जिनमें किसानों को विभिन्न फसलों की पैदावार बढ़ाने का मार्ग दर्शन निशुल्क मिलेगा लेकिन नांगल चौधरी ब्लॉक के सात परामर्श केंद्रों पर करीब 15 साल से ताला लटका हुआ है। फसलों की बीमारी व उपचार की जानकारी नहीं मिल रही है।
गौरतलब है कि नांगल चौधरी, निजामपुर ब्लॉक में व्यवसायिक संस्थान नहीं। ग्रामीणों की आजीविका पूर्ण रूप से खेतीबाड़ी पर निर्भर हो गई। अधिकांश किसान सरसों, ग्वार, बाजरा व चना आदि परंपरागत फसलें उगाते हैं। इन फसलों को सिंचाई की अधिक जरूरत पड़ती है। विकल्प के रुप में सरकार ने फल व फूलदार फसलों को बढ़ावा देना आरंभ कर दिया। किसानों को जागरूक करने के मकसद से सर्कल स्तर पर परामर्श केंद्र स्थापित कर दिए। नांगल चौधरी ब्लॉक को सात सर्कलों में विभाजित कर दिया गया। प्रत्येक केंद्र पर कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) की पोस्ट सेंक्सन हैं। लेकिन ग्रामीण सेंटरों पर कर्मचारी (एडीओ) उपलब्ध नहीं। ब्लॉक हेड क्वार्टर पर बीएओ की पोस्ट भी रिक्त पड़ी है। कार्यालय में एकमात्र एडीओ नियुक्त है, जिस पर कागजी लेखाजोखा तथा विभागीय मीटिंगों का दबाव बढ़ गया। परामर्श केंद्र बंद होने के कारण किसानों की समस्या बढ़ गई। उन्हें निजी दुकानदारों की सलाह के मुताबिक विभिन्न फसलों की बीजाई व बीमारियों का उपचार करना पड़ता है। किसानों को मनमर्जी दवा थमा देते हैं। गलत दवाई इस्तेमाल करने पर फसल नष्ट होने की संभावना रहेगी। विभाग के एसडीओ डॉ. संजय यादव ने बताया कि नारनौल डिविजन में छह तथा महेंद्रगढ़ डिविजन में आठ एडीओ उपलब्ध हैं। स्वीकृत पोस्टों के मुताबिक 44 होने चाहिए।
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नांगल चौधरी में स्थापित परामर्श केंद्र
किसानों की सुविधा को लेकर सरकार द्वारा ढ़ाणी बाठोठा, भोजावास, धोलेड़ा, नांगल चौधरी, नांगल दुर्गू, शहबाजपुर, थनवास समेृत सात कृषि परामर्श केंद्र स्थापित किए गए थे। ब्लॉक मुख्यालय पर खंड कृषि विकास अधिकारी की पोस्ट स्वीकृत है।

सिर्फ रिकॉर्ड में रह गए परामर्श केंद्र
विभागीय जानकारी के मुताबिक सभी परामर्श केंद्र किराए के भवनों में स्थापित किए गए थे। फिजूल किराया खर्चा रोकने के लिए तीन साल पहले छह केंद्रों को नांगल चौधरी में शिफ्ट कर दिया। अब मौके पर एक भी केंद्र नहीं, केवल रिकार्ड में संचालित हो रहे हैं। कर्मचारी उपलब्ध होने पर दोबारा भवन किराए पर लेने पड़ेंगे।
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दूर-दराज के किसान सुविधा से वंचित
सरकार के निर्देशानुसार विभाग को गांव स्तर पर कैंप लगाने होंगे, ताकि किसानों को आधुनिक कृषि योजना की जानकारी मिल सके। नजदीकी केंद्र बंद होने के कारण किसानों को हेड क्वार्टर पहुंचकर परामर्श लेना पड़ता है। ऐसे में दूर-दराज के किसानों की परेशानी बढ़ गई।
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