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पर्यावरण जागरूकता और पौधारोपण कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को कर रहे जागरूक

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल।
पर्यावरण की दृष्टि से जिला महेंद्रगढ़ की स्थिति सबसे गंभीर हैं। भूजल का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है और नहरी पानी की उपलब्धता न होने के कारण भूमि के बंजर होने का संकट बढ़ रहा है। इसके बावजूद न तो सरकार और न ही समाज की अपने स्तर पर गंभीर प्रयास दिखाई दे रहे। कुछ जुनूनी लोग अवश्य इस अभियान में जुटे हैं। इन्हीं में से एक हैं गांव नीरपुर निवासी शिक्षक रघुविंद्र यादव।
यादव 1989 से पर्यावरण जागरूकता और पौधरोपण कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने और पर्यावरण बचाने के प्रयासों में लगे हुए हैं। उनके नेतृत्व में अब तक कई हजार पौधे विभिन्न स्थानों पर लगाए गए हैं। उन्होंने करीब तीन दर्जन पर्यावरण गोष्ठियों और पर्यावरण रैलियों का आयोजन करने के अलावा बड़-पीपल लगाओ अभियान, जल साक्षरता अभियान और पर्यावरण चेतना प्रतियोगिताओं का आयोजन कर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने डार्क जोन गांव शहबाजपुर में लगभग तीन एकड़ में बगीचा तैयार करके समाज को नई राह दिखाई।
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उन्होंने कुछ गांवों में खेतों की मेढ़ ऊंची करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया, ताकि खेत का पानी बहकर न जाये। जल साक्षरता अभियान के तहत उन्होंने दर्जनों विद्यालयों मेें जाकर जल के संरक्षण के प्रति भावी पीढ़ी को जागरूक किया है। वर्षा जल के संरक्षण के लिए वे आज भी प्रयासरत हैं और अपने घर पर भी वर्षा जल के संरक्षण का प्रयास करते हैं।
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करवाते हैं पर्यावरण परिचय प्रतियोगिता
यादव ने बताया कि वे जिला स्तर पर पर्यावरण परिचय प्रतियोगिता का आयोजन करवाते हैं और प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को डेढ़ हजार, एक हजार और 750 रुपये का पुरस्कार देते हैं। इस प्रतियोगिता के लिए उन्होंने एक पुस्तक पर्यावरण परिचय का लेखन-संपादन भी किया है। जैव कीटनाशकों को बढ़ावा देने के लिए यादव नीम से कीटनाशक भी बनाते हैं और इसका निशुल्क प्रशिक्षण भी देते हैं। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में जनभागीदारी न होने के कारण वे लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाती। वहीं, सामाजिक स्तर पर भी प्रयास नाकाफी हैं। वे चाहते हैं कि पर्यावरण संरक्षण शासन और प्रशासन की ही नहीं नागरिकों की भी पहली प्राथमिकता बने। इसके लिए जल का व्यावसायिक प्रयोग तुरन्त बंद होना चाहिए। पेयजल के अलावा डीप बोर पर पूर्ण पाबंदी प्रभावी ढंग से लगे, बिजली की स्लैब प्रणाली बंद हो और जल संरक्षण की तमाम योजनाओं में जन भागीदारी सुनिश्चित हो।
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