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भौगोलिक दृष्टि से गांव पाली मेडिकल कॉलेज के लिए सबसे उपयुक्त स्थान

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नेशनल हाईवे पर स्थित, पानी का स्तर 160 फीट, जिले का बीच का केंद्र, हरियाणा के तीन जिलों के गांवों को होगा फायदा
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फोटो संख्या:45
प्रदीप शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। भौगोलिक दृष्टि से गांव पाली मेडिकल कॉलेज के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। इस गांव में संभावित मेडिकल कॉलेज के लिए जो स्थान निर्धारित किया है, वो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के सभी मापदंडों को पूरा करता है। मेडिकल कॉलेज के लिए ट्रांसपोर्ट सिस्टम, बिजली, पानी और अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां बहुत मायने रखती हैं।
गांव पाली, कोरियावास और मिर्जापुर बाछोद में पाली गांव ही नेशनल हाईवे पर है और पानी का जमीन स्तर भी सबसे अधिक इसी गांव का है। वैसे भी महेंद्रगढ़ सेंटर जिले के बीच का केंद्र है। यह महेंद्रगढ़, नारनौल, अटेली, नांगल चौधरी, चरखी दादरी, भिवानी और झुंझुनू जिलों को कवर करता है। जबकि नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र का गांव कोरियावास जिले के एक तरफ अप्रोच रोड पर पड़ता है जहां पानी का स्तर 700 से 800 फीट गहरा है। यह नेशनल हाईवे से 2 किमी दूर स्थित है। इसके अलावा महेंद्रगढ़ जिले को कम राजस्थान के जिले झुंझुनू, अलवर, सीकर आदि जिलों के गांवों को अधिक फायदा होगा। बता दें कि राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना के आधार पर सरकार जिले में मेडिकल कॉलेज खोलना चाहती है। इसके लिए सरकार ने नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र के गांव कोरियावास, अटेली हलके के मिर्जापुर बाछोद और महेंद्रगढ़ के गांव पाली में जमीन तलाशी है। इन तीनों ही जगहों की पैमाइश एवं रिपोर्ट तैयार कर जिला उपायुक्त गरिमा मित्तल ने उच्च अधिकारियों को भेज दी है।
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पाली की स्थिति
बाबा जयरामदास की भूमि गांव पाली शहर से 5 किलोमीटर दूरी और नेशनल हाईवे पर पड़ती है। गांव की पंचायत ने मेडिकल कॉलेज के लिए 200 एकड़ भूमि का प्रस्ताव पास कर सरकार को दिया है। गांव की पूरी जमीन समतल है। 200 एकड़ भूमि पर 1500 पेड़ खड़े हैं। बिजली के लिए 132 केवी का एक और 33 केवी का एक ट्रांसफॉर्मर है। गांव का जमीनी जल स्तर 160 फीट और मीठा पानी है। है जबकि नहरी पानी की भी सुविधा है। गांव में पानी के चार बड़े टैंक बनाए गए हैं और बूस्टर भी लगाया गया है। गांव से दो किलोमीटर दूर पर जेरपुल पाली और पांच किलोमीटर दूरी पर महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन लगता है।

कोरियावास की स्थिति
गांव कोरियावास में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए पंचायत ने लगभग 80 एकड़ भूमि दी है। कॉलेज के लिए 79 एकड़ भूमि की जरूरत है। यह भूमि समतल तो है किंतु इसके अंदर लगभग 8500 से अधिक पेड़ खड़े हैं। गांव के अंदर बिजली के लिए अलग से कोई पॉवर हाउस नहीं है जिसकी सप्लाई नारनौल से होती है। यह क्षेत्र नारनौल पांच से सात किलोमीटर दूरी पर पड़ता है। अगर पानी की बात करें तो सरकार ने नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र को डार्क जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में पानी 800 फीट गहराई पर है। गांव में पेयजल सप्लाई नहर से होती है जबकि क्षेत्र में नहर में पानी मात्र 15 दिन ही आता है। गांव में नाबार्ड योजना के तहत पानी का टैंक बनाया गया है। यानी पूरा गांव नहरी पानी पर ही आधारित है। अप्रोच रोड पर स्थित गांव कोरियावास नेशनल हाई से 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। अगर रेलवे स्टेशन की बात करें तो पास में 3 किलोमीटर दूर जोरासी रेलवे स्टेशन पड़ता है।
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मिर्जापुर बाछोद की स्थिति
मिर्जापुर बाछोद अटेली विधानसभा क्षेत्र में अटेली और नारनौल रोड पर स्थित है। गांव की पंचायत ने बहरोड़ रोड पर 80 एकड़ जमीन का प्रस्ताव पास कर सरकार को दिया है। इस गांव पर कोई भी नेशनल हाईवे पास नहीं पड़ता है। पानी का जल स्तर 300 फीट पर है, जबकि नहर की सुविधा भी है। गांव का पानी मीठा है और इसकी सीमा राजस्थान के अलवर जिले से जुड़ी हुई है। बाछोद गांव का रेलवे स्टेशन पास लगता है। गांव की जमीन समतल है। इस जमीन पर लगभग 8000 पेड़ खड़े हैं।
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