फोटो नंबर-08नारनौल का नागरिक अस्पताल।
नारनौल। स्वास्थ्य विभाग क्षेत्र के लोगों को नशे से दूर रखने और पीड़ितों के उपचार के लिए विशेष अभियान चला रहा है। वर्ष 2024 में नशे से ग्रसित करीब तीन हजार लोगों का उपचार किया गया है। वहीं लोगों को नशे से दूर रखने व उपचार के लिए प्रत्येक सप्ताह विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाए जाते हैं। 250 लोगों ने नशे को छोड़ दिया है।
बीते वर्ष नशे से ग्रसित जिन लोगों का उपचार किया गया। उनमें 25 से 40 साल के लोगों की संख्या अधिक रही। इनमें अधिकतर शराब, गांजा, चिट्टा, स्मैक, नशीले इंजेक्शन की लती थे। नशे की लत में पड़ने का सबसे बड़ा कारण गलत संगत है। गलत संगत के कारण युवा नशे के लती हो रहे हैं। वहीं क्षेत्र में मादक पदार्थ की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है।
नशे से ग्रसित लोगों का उपचार करने के लिए नागरिक अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध है। ओपीडी के अलावा नशामुक्ति वार्ड भी बनाया गया है। बीते वर्ष नशे से ग्रसित करीब तीन हजार लोगों का उपचार किया गया। इसमें से 250 लोगों ने नशे को छोड़ दिया है। उपचार शुरू होने के बाद काफी समय तक मरीज की गतिविधियों की परिजनों से जानकारी ली जाती है। नशे से ग्रसित कुछ मरीज ऐसे भी है, जो उपचार के दौरान कुछ समय के लिए नशा छोड़ देते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर से नशा करने लग जाते हैं।
वर्जन :
प्रयास है कि नशे से पीड़ितों का बेहतर उपचार कर उन्हें सामान्य जीवन जीने का हक दिया जाए। हर सप्ताह जिले में विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर लोगों को नशे के दुष्प्रभाव से जागरूक किया जाता है। क्षेत्र के लोगों से विशेष तौर पर युवाओं से अपील है कि नशे से दूरी बनाए रखें। दूसरों को भी प्रेरित करें। नशे के कारण आर्थिक, सामाजिक, मानसिक और शारीरिक पतन का सामना करना पड़ता है। -डॉ. अनिल यादव, मनोरोग चिकित्सक, नागरिक अस्पताल