संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। किसी भी परिवार की आजीविका के लिए सबसे पहली चीज रोजगार होती है। अंत्योदय परिवारों को रोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनाने में सभी विभागों के अधिकारियों का मुख्य रोल है। ऐसे में चौथे फेज के अंत्योदय मेलों में आए लाभार्थी परिवारों को जल्द सारी कार्रवाई करके उन्हें स्वरोजगार के साथ जोड़ें। यह बात अतिरिक्त उपायुक्त वैशाली सिंह ने वीरवार को मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना को लेकर विभिन्न विभागों तथा बैंकर्स की बैठक में कही।
सरकार ने प्रदेश के गरीब लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए परिवार पहचान पत्र के माध्यम से पहचान करके आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया है। अंत्योदय मेले उन्हीं प्रयासों को धरातल पर उतारने के लिए लगाए गए हैं। एडीसी ने बताया कि चौथे फेज के अंत्योदय मेले में 2163 गरीब परिवारों ने स्वरोजगार अपनाने व अपना कौशल विकास करने के लिए आवेदन किया है। इनमें से अधिकतर आवेदकों ने पशुपालन विभाग की मिनी डेयरी के लिए आवेदन किया है। बैंक अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि अपने फील्ड स्टाफ को भेजकर पशु पालकों को जल्द भैंस की खरीदारी करवाकर उनकी फाइल पशुपालन विभाग को भेजें, ताकि उन्हें सब्सिडी दी जा सके।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि यह हमारा सांविधानिक व नैतिक दायित्व बनता है कि गरीबों की मदद करके उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर उठाकर मुख्यधारा में शामिल करें। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 तक सभी परिवारों की न्यूनतम वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये वार्षिक की जाए। यह जिम्मेदारी हम सभी के कंधों पर है। ऐसे में इन गरीब परिवारों का आर्थिक उत्थान करने के इस अभियान में सभी विभागों के अधिकारी पूरी मेहनत के साथ कार्य करें। बैठक में एलडीएम विजय सिंह, सीएमजीजीए दिवाकर कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी अमित शर्मा, डीडीपीओ आशीष मान तथा पशुपालन विभाग के डीडीए डॉ. नसीब सिंह आदि अधिकारी मौजूद रहे।