अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम के पास स्थित ऐतिहासिक सामेश्वर तालाब में मंगलवार दोपहर को जेसीबी चलाकर एक बार फिर कब्जा करने का प्रयास किया गया। तालाब के अंदर जेसीबी चलने की सूचना जैसे ही मोहल्ला सलामपुरा व पीरआगा के लोग मौके पर पहुंच गए और जेसीबी चालक का विरोध किया। लोगों के गुस्से को देखते हुए जेसीबी चालक मौके से भाग गया।
इसके कुछ देर बाद ही दोनों मोहल्लों के लोग भी पहुंच गए। जिन्होंने तालाब के मामले में दो अलग-अलग केस अदालत में दायर किए हुए हैं। जिनमें महाबीर प्रसाद एडवोकेट व रामचंद्र मुंशी ने अदालत की प्रतियां दिखाते हुए कहा कि उन्हें कोर्ट से तालाब व इसके तहत आने वाले जमीन की खरीद फरोख्त करने वाली पार्टियों के खिलाफ अदालत से स्टेटस-को मिला है।
इसके बावजूद भी मंगलवार को कुछ लोगों ने एक बार फिर सार्वजनिक व ऐतिहासिक धरोहर पर कब्जा करने का प्रयास किया है। जिसे किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा। मौके पर पहुंचे पंकज, भीम सिंह व राजेश सैनी ने बताया कि सामेश्वर तालाब की 1987 में गलत तरीके से सेल डीड सरकार ने किसी जय प्रकाश नामक व्यक्ति को करवाई हुई है। इस डीड के आधार पर जयप्रकाश तालाब व इसके तहत आने वाली जमीन को बेचने का एग्रीमेंट कर चुका है।
इसे लेकर मोहल्ले के लोगों ने डीड व एग्रीमेंट को अदालत में चुनौती दी हुई है। जिस पर अदालत ने मामले में स्टेट-को का आर्डर दिया हुआ है। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि इस मामले में जब तक अदालत का फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी व्यक्ति को जबरन इस सार्वजनिक जमीन पर कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। लोगों का कहना है कि 23 दिसंबर को नारनौल आ रहे मुख्यमंत्री मनोहर लाल से सामने मामला लाया जाएगा।
क्या है मामला
ऐतिहासिक तालाब स्टेडियम के पास मुख्य रास्ते पर स्थित है। करीब चार बीघा में यह तालाब वर्गाकार में बना हुआ है। मौके पर आज भी तालाब की मोटी-मोटी दीवारें, तालाब के घाट व इसकी सीढ़ियां मौजूद है। कुल मिलाकर करीब 13 बीघा तीन बिस्वा जमीन मौके पर है। इस तालाब के खसरे नंबर वाली भूमि को सन 1987 में एक व्यक्ति के नाम सेल डीड करवा दी थी। करीब 10 साल पहले इस जमीन को किसी अन्य को बेच दिया गया था। तभी से इस पर विवाद चला आ रहा है।