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आधी रात को मेहरबान हुए इन्द्रदेव, किसानों के चेहरे खिले

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल/महेंद्रगढ़। जिलेभर में शनिवार को दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। महेंद्रगढ़ में 70 एमएम तो नारनौल क्षेत्र में 44 एमएम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन तक बारिश हो सकती है। महेंद्रगढ़ जिले में पकी खड़ी लगभग एक लाख हेक्टेयर में बाजरे और कपास की फसल खराब होने की संभावना है। वहीं, बारिश होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच गई है। उपायुक्त डॉ. गरिमा मित्तल ने सभी विभागों को चेतावनी पत्र जारी कर अलर्ट रहने को कहा है। वहीं, बारिश के कारण शहर में जगह-जगह पानी भर गया है। इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के चलते महेंद्रगढ़ शहर में आठ से दस घंटे बिजली प्रभावित रही।
बारिश से नारनौल शहर में सैनचौक, रावका मोहल्ला और पुलिस लाइन एरिया के अलावा रेलवे के अंडरपासों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। इससे कई गांवों के लोगों का शहर से आवागमन कट गया। लोगों को दूर से होकर शहर आना पड़ा। दूसरी ओर बारिश के कारण नारनौल की कालोनियों में बिजली कट की समस्या से भी लोगों को जुझना पड़ा। आधे-आधे घंटे में बिजली के कट लगते रहे। नारनौल के किसानों का कहना है कि अबकी बार क्षेत्र में समय पर बरसात नहीं होने से पछेती खरीफ फसल को तवज्जों दी थी। एक पखवाड़े से क्षेत्र में बरसात न होने से धूप की तल्खी से पछेती बाजरे की फसल मुरझाने लगी थी। इससे फसल पर उत्पादन प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा था। जिन किसानों ने कुछ भूमि खाली छोड़कर जुताई कर रबी फसल के लिए तैयार कर रहे है। उनके लिए यह बरसात वरदान साबित होगी। हालांकि बाजरे की अगेती फसल के लिए यह बारिश नुकसानदायक है। बारिश से कही खुशी तो कहीं गम जैसा हाल है।
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महेंद्रगढ़ में 70 एमएम बारिश
क्षेत्र में शुक्रवार शाम से मौसम खराब हो गया था। आकाश में बादल छा गए थे। रात एक बजे बारिश शुरू हो गई जो सुबह छह बजे रुक-रुककर होती रही। शनिवार दिन में भी हल्की बारिश हुई। रात एक बजे से शनिवार दोपहर तीन बजे तक क्षेत्र में 70 एमएम बारिश दर्ज की गई। जोकि जिले में सबसे अधिक है। वहीं, नारनौल में 44 एमएम, अटेली में पांच एमएम और नांगल चौधरी में आठ एमएम बारिश हुई।

बाजरा पड़ सकता है काला
इस समय क्षेत्र में खरीफ फसल कटाई का समय चल रहा है। बहुत से किसानों ने अपनी बाजरे की फसल काटनी शुरू कर दी है। कृषि विभाग के एसडीओ संजय यादव ने बताया कि इस समय बारिश बाजरे की फसल के लिए नुकसानदायक है। बाजरे की कटी फसल दोबारा उगने की संभावना रहती है और चेपा रोग भी हो सकता है। वहीं, पका हुआ बाजरा काला पड़ जाएगा और उसकी गुणवत्ता में कमी आ जाएगी। जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। इस बार जिले में 77670 हेक्टेयर भूमि पर बाजरे की फसल बोई गई है।

कपास की फसल भी हो सकती है खराब
डॉ. संजय यादव ने बताया कि बारिश से कपास की फसल भी प्रभावित होगी। कटी हुई कपास भीगने से खराब हो जाएगी। खड़ी कपास की फसल के टींडे काले पड़ जाएंगे तथा पौधे उखड़ जाएंगे। ग्वार की फसल प्रभावित नहीं होगी। इस बार जिले में 22405 हेक्टेयर भूमि पर कपास की फसल बोई गई है। क्षेत्र के किसान सुरेश कूमार, राज सिंह, विनोद कुमार, सुनील कुमार, ओमप्रकाश, कृष्ण सिंह, मनीष कुमार, प्रकाश ने कहा कि बारिश होने पर उनके खेतों में कटाई की गई बाजरे की फसल को अधिक नुकसान की संभावना बनी है।
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यहां हुआ जलभराव
बारिश के कारण जिले में शनिवार को जन जीवन प्रभावित हो गया। बारिश से महेंद्रगढ़ शहर के अलावा कनीना और नारनौल शहर में भी जगह-जगह पानी भर गया। जिससे लोगों को आने जाने में परेशानी उठानी पड़ी। महेंद्रगढ़ में गंगा देवी अस्पताल, नगरपालिका कार्यालय, बीएसएनएल कार्यालय, अग्रसेन चौक, मो. महायचान आदि स्थानों पर पानी भर गया। इसके अलावा सड़कों के किनारों पर पानी भरा हैं। बारिश के चलते महेंद्रगढ़ में आठ से 10 घंटे बिजली प्रभावित रही।
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