फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाई कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने सात मकानों को किया ध्वस्त

विज्ञापन
विज्ञापन
हाई कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने सात मकानों को किया ध्वस्त
विज्ञापन

नारनौल। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को जिला प्रशासन ने रेवाड़ी रोड पर दुकानों के पीछे बने पुराने बीजेपी कार्यालय के पास स्थित भाजपा कार्यकर्ता के मकान समेत सात लोगों के मकानों को ध्वस्त कर दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कई घंटों तक चली कार्रवाई में प्रशासन 1 बीघा 14 बिस्वा जमीन अतिक्रमण मुक्त कर मालिकों के सुपुर्द कर दिया। अपना आशियाना टूटता देख वहां मौजूद महिला, बुजुर्ग व बच्चों की आंखें छलक आई। महिलाओं ने बार-बार प्रशासन से मिन्नत करते हुए बसे हुए परिवार को न उजाड़ने की गुहार लगाई। वहीं अपना आशियाना टूटता देख एक बुजुर्ग जेसीबी मशीन के आगे लेट गया।
हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2017 को शंकरलाल पांडे नाम व्यक्ति में पक्ष में फैसला सुनाते हुए नारनौल प्रशासन को इस जमीन को कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे। जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार रोहताश सिंह को कब्जा दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। कब्जा दिलवाने के लिए तहसीलदार ने दो-तीन बार कब्जाधारियों को नोटिस भेजकर मकान खाली करने के आदेश दिए थे। वहीं तहसीलदार ने स्वयं लोगों के पास जाकर जमीन को खाली करने की बात भी कही थी। इसके बावजूद भी लोगों ने मकानों को खाली नहीं किया। इस पर तहसीलदार की ओर से 29 जुलाई को जमीन खाली करने के लिए अंतिम नोटिस भेजा था।
विज्ञापन


तहसीलदार के नेतृत्व में पहुंचा भारी पुलिस बल
शुक्रवार सुबह करीब साढ़े बारह बजे तहसीलदार रोहताश सिंह के नेतृत्व में गिरदावर, पटवारी जेसीबी मशीन के साथ भारी पुलिस बल लेकर काबिज जमीन पर पहुंचे। यहां कई घंटों की कार्रवाई के बाद टीम ने हाईकोर्ट के आदेशानुसार खसरा नं. 1977-1978-1980 मिन किता 3 तादादी 1-14 वाका रकबा जमीन मालिक को कब्जा दिलाया। तहसीलदार ने बताया कि इस जमीन में लालचंद पुत्र प्रभातीलाल, रमेशचंद पुत्र लक्ष्मीनारायण, रामेश्वर पुत्र लक्ष्मीनारायण, प्रेमचंद पुत्र लक्ष्मीनारायण, रामकुमार पुत्र रामजीलाल, जगदीश पुत्र रामजीलाल और सुभाष पुत्र रतीराम ने कब्जा किया हुआ था।

कब्जाधारियों ने जताया विरोध
प्रशासन की इस कार्रवाई पर कब्जाधारियों ने विरोध जताते हुए कहा कि उन्होंने शहर के एक चिकित्सक को पैसे देकर जमीन खरीदी थी। वर्ष 1989 में जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी। इसके बावजूद भी प्रशासन उनके परिवार को उजाड़ रहा है। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें इस जगह पर रहते हुए 26-27 साल हो गए हैं। परंतु प्रशासन यह कार्रवाई कर उन्हें बेघर कर रहा है।

आशियाना टूटता देख परिजनों के झलके आंसू
अपना आशियाना टूटता देख परिजनों के आंसू छलक आए। महिलाओं ने तहसीलदार से मिन्नत करते हुए उन्हें बेघर न करने की दुहाई दी। वहीं मकान खाली करने के लिए एक-दो दिन का समय भी मांगा। परंतु तहसीलदार ने समय देने से इनकार कर दिया। खेमचंद ने भी तहसीलदार के सामने रोते हुए अपना दुखड़ा रोते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 1989 में जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी। इसके बावजूद भी अब 26-27 साल बाद परिवार को उजाड़ा जा रहा है।

समय नहीं देने पर समेटने लगे सामान
तहसीलदार द्वारा मकानों को खाली करने के लिए समय नहीं देने पर परिजन अपने-अपने मकानों से सामान को समेटकर खाली पड़े प्लांट में रखना शुरू कर दिया। अपने मकानों को टूटता देख छोटे-छोटे बच्चों के भी आंसू निकल आए। जेसीबी मशीन जैसे ही मकानों को तोड़ने के लिए बढ़ी एक बुजुर्ग जेसीबी के आगे लेट गया। जिसे पुलिस ने उठाकर एक ओर कर दिया।
विज्ञापन


हाईकोर्ट के आदेश पर 1 बीघा 14 बिस्वा जमीन से अवैध कब्जा हटवाया गया। जमीन के मालिक शंकर पांडे ने हाईकोर्ट से केस जीता हुआ था। जिन सात लोगों ने घरों पर कब्जा किया हुआ था। उनको कोर्ट की ओर से आए 17 मार्च के फैसले के बाद भी चार महीने का समय दिया गया था। लेकिन जब कब्जाधारियों ने मकानों से कब्जा नहीं छोड़ा तो प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश पर कब्जा छुड़वाया। -रोहताश सिंह तहसीलदार नारनौल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें