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नारनौल में चार माह में हुई 215 रजिस्ट्रियां, 166 की एनओसी नहीं

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नारनौल। तहसील कार्यालय नारनौल में भी रजिस्ट्रियों में गड़बड़ी होने की आशंका है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 215 रजिस्ट्रियों में बिना एनओसी की 166 रजिस्ट्रियां हुई हैं। गड़बड़ी को देखते हुए अब तीन साल के अंदर हुई रजिस्ट्रियों की सरकार जांच करा रही है।
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बता दें कि एक व्यक्ति ने डीसी कार्यालय में आरटीआई लगाकर जनवरी से अप्रैल 2020 तक हुई रजिस्ट्रियों की जानकारी मांगी थी। इस पर आवेदनकर्ता को 23 जुलाई को तहसीलदार कार्यालय ने जानकारी उपलब्ध कराई। इसमें बताया गया हैं कि जनवरी से अप्रैल तक उनके कार्यालय से 215 सेल डीड रजिस्टर्ड हुई हैं। इनमें से 49 सेल डीड नगर परिषद नारनौल से एनओसी लेेने के बाद रजिस्टर्ड की गई है। इन डीड को रजिस्टर्ड करने के लिए डीटीपी से एनओसी की आवश्यकता नहीं थी। जबकि इसी आरटीआई में बताया गया है कि 166 सेल डीड नगर परिषद के एरिया में बिना एनओसी के रजिस्टर्ड की गई हैं। इसमें चौकाने वाली बात यह है कि जब 49 सेल डीड के लिए नगर परिषद से एनओसी ली तो 166 के लिए एनओसी क्यों नहीं ली गई। ऐसे में सेल डीड में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर लॉकडाउन में मई में बिना एनओसी की रजिस्ट्री करने की शिकायत पर तत्कालीन डीसी जगदीश शर्मा ने उस समय के रजिस्ट्री क्लर्क रामचंद्र को सस्पेंड कर दिया था,जो निलंबित है। इसकी जांच एसडीएम मनीष फोगाट कर रहे हैं।
तीन साल के अंदर हुई रजिस्ट्रियां जांच के दायरे में
जानकारी के अनुसार पहले लॉकडाउन में हुई रजिस्ट्रियों की जांच की जानी थी। इसकी जिम्मेदारी डीआरओ को दी गई थी। बाद में सरकार ने नारनौल में तीन साल के अंदर हुई रजिस्ट्रियों की जांच कराने का आदेश दिया है। इसके बाद डीसी ने लॉकडाउन और पहले की हुई रजिस्ट्रियों की जांच एसडीएम नारनौल को सौंप दी। अब इन सभी रजिस्ट्रियों की जांच एसडीएम मनीष फौगाट कर रहे हैं।
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क्या कहते हैं नायब तहसीलदार
नायब तहसीलदार रतनलाल ने बताया कि नगर परिषद की सीमा वर्ष 1974 की सीमा के अंदर पड़ने वाले स्थल जो 7ए की नोटिफिकेशन अनुसार अनापत्ति प्रमाण पत्र से छूट प्राप्त है। आरटीआई में 166 सेल डीड 13 जनवरी से 16 मार्च तक की है। 22 डीड केवल लॉकडाउन के दौरान की गई थी। इसकी जांच एसडीएम कर रहे हैं। इस बारे में तत्कालीन डीसी को पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी गई थी। उनके कार्यकाल के दौरान रजिस्ट्रियां नियमानुसार की गई ंहै।
नप को हुआ को नुकसान
नप में एनओसी के लिए प्रति सौ गज प्लॉट का करीब 20 से 25 हजार रुपये लेता है। इसमें विकास शुल्क, प्रॉपर्टी टैक्स और सफाई टैक्स शामिल हैं। प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होने से पहले नप को पैसे देने पड़ते हैं। ऐसे में यदि नप से एनओसी नहीं लगी गई तो उसे राजस्व का नुकसान हुआ है। ऐसे में नप को करीब 15-20 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। नप के अधिकारियों का कहना हैं कि कई खराब नंबर की रजिस्ट्रियों में पहले नप एनओसी दे चुका है।
इन दोनों पत्रों से समझे रजिस्ट्रियों का खेल
केस एक : शहर के पास एक गांव निवासी व्यक्ति साल 2019 में एक पत्र सीएम, विधायकों और डीसी को भेजा था। करीब एक साल इस पुराने शिकायत में व्यक्ति ने रजिस्ट्री क्लर्क द्वारा रजिस्ट्रियों में नेताओं समेत अन्य को पैसे पहुंचाने की बात कही है। उसने रजिस्ट्री करने वाले तत्कालीन कर्मचारी की रिकॉर्डिंग अपने पास होने का दावा किया है। पत्र के अनुसार पीड़ित से रजिस्ट्री क्लर्क कहता हैं कि रजिस्ट्री खर्चा कौन देगा। विधायक का भाई हप्ता लेने आ जाता है। ये रुपये अपने घर से नहीं दूंगा। काम करना हैं तो पैसे देगा नहीं तो चक्कर काटेगा। दूसरी रिकार्डिंग में रजिस्ट्री क्लर्क कहता हैं कि जो रुपये मांग रहा हूं, यह क्या मैं अपने घर ले जाऊंगा। तुम्हारे घर पर एक मैडम है और मेरे को दो-दो मैडमों का पेट भरना पड़ता है। एक मेरी घर की और अन्य उपर बैठी हुई हैं। तीसरी में एक नेता को पैसे देने की बात कर रहा है। शिकायतकर्ता का दावा हैं कि उसके पास कर्मचारी के साथ बातचीत की सात रिकार्डिंग हैं।
केस दो : दूसरी शिकायत करीब सात माह पुरानी है। इस व्यक्ति ने तहसीलदार को शिकायती पत्र लिखा है। इस पत्र में धर्मवीर नामक एक व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्री के एवज में तहसीलदार के नाम पर 27 हजार रुपये वापस दिलाने की मांग की है। इन पत्रों को देखते हुए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि नारनौल में बिना एनओसी की हुई रजिस्ट्रियों के खेल में कइयों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है।
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