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21 वर्ष बाद भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है महेंद्रगढ़ बस स्टैंड

Tue, 17 Jan 2017 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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बस स्टैंड के मुख्य सड़क पर उगी झाड़ियां
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सामान्य बस स्टैंड को बने हुए 21 वर्ष हो चुके हैं फिर भी यहां मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। बस स्टैंड के मुख्य रास्ते पर जंगली घास उगी हुई हैं, परिसर में पर्याप्त लाइटें भी नहीं हैं और यहां शौचालयों का अभाव है।
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बस स्टैंड के मुख्य द्वार पर गेट और अंदर के डिवाइडर भी टूटे हुए हैं, बस स्टैंड की खस्ता हालत को देखकर दूर-दूर तक नहीं लगता कि किसी अधिकारी ने बस स्टैंड के लिए कोई बजट जारी किया हो। 21 वर्ष में कई विधायक आए और गए लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। महेंद्रगढ़ बस स्टैंड से लगभग 6 लाख रुपये का रिवेन्यू नारनोल डिपो को जाता है। दो मुख्यमंत्री द्वारा सब डिपो की घोषणा होने के बाद आज तक महेंद्रगढ़ बस स्टैंड सब डिपो नहीं बन पाया है। लोगों का कहना है कि महेंद्रगढ़ बस स्टैंड के बजट के नाम पर जो रुपया आता है वो नारनौल में ही खर्च कर दिया जाता है।

घोषणा के बाद भी नहीं बना सब डिपो
पिछले 3 वर्ष के दौरान दो मुख्यमंत्रियों की घोषाण आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। महेंद्रगढ़ बस स्टैंड को हुड्डा सरकार एवं मनोहर सरकार दोनों ने सब डिपो बनाने की घोषणा कर चुके हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तो पिछले वर्ष 9 अप्रैल को महेंद्रगढ़ की सब्जी में आयोजित प्रगति रैली में सब डिपो का शिलान्यास भी कर चुके हैं। 9 माह बीत जाने के बाद भी महेंद्रगढ़ का सामान्य बस स्टैंड सब डिपो नहीं बन पाया। इससे पूर्व 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी सब डिपो की घोषणा की थी। उस दौरान भी महेंद्रगढ़ सब डिपो नहीं बन पाया।  
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6 लाख प्रति माह देता है रेवेन्यू
महेंद्रगढ़ बस स्टैंड 50 गांवों को कवर करता है, यहां से रोडवेज की नाम मात्र बसें चलती हैं जिनसे लगभग 6 लाख रुपये रिवेन्यू मिलता है। जबकि रनिंग में चलने वाली बसों में प्रतिदिन 1500 से अधिक यात्री यात्रा करते हैं।   

21 वर्षों में नहीं खुली दुकानें
महेंद्रगढ़ बस स्टैंड पर सब्जी, रेवड़ी पताशा शॉप, कैंटीन, बुक स्टाल सहित 7-8 दुकानें हैं। इन दुकानों में से एक चाय पानी की कैंटीन खुली है। बाकी कोई भी स्टाल आज तक नहीं खुली। स्टैंड पर दुकानों की हर वर्ष बोली लगती है लेकिन बोली लगाने वाला कोई नहीं मिलता। क्योंकि बस स्टैंड पर एक दुकान की सरकारी बोली 10 हजार रुपये से शुरू होती है।

सफाई व्यवस्था चौपट
बस स्टैंड की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। बस स्टैंड पर पुरुष एवं महिला का एक-एक शौचालय उनमें भी सफाई नहीं रहती। बस स्टैंड के एक रास्ते का तो बुरा हाल हो रखा है उस रास्ते की सफाई हुए ही वर्ष बीत चुके हैं। उसकी हालत को देखकर लोगों ने शौच एवं पेशाब करना शुरू कर दिया है। वहां बड़ी-बड़ी घास उग आई है।

टूटे पड़े हैं डिवाइडर
स्टैंड के डिवाइड पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। साइड में लगे पत्थर पूर्ण रूप से टूट चुके हैं। इसके अलावा परिसर के अंदर की सड़क की रोड़ियां भी बाहर आ गई हैं। चालक बस को घुमाते समय पूरा राउंड लेने की बजाया डिवाइडरों पर से ही कूदा देते हैं। जिससे नीचे खड़े यात्री बस की चपेट में आने की संभावना रहती है।

मुख्य द्वार पर है यह हाल
रात्रि के समय पता ही नहीं चलता कि यहां बस स्टैंड भी है। बस स्टैंड के मुख्य द्वार पर गेट नाम की चीज ही नहीं है। पहले लोहे के गेट लगे हुए थे वो टूट चुके हैं। मुख्य द्वार पर आज तक बोर्ड नहीं लगा है जिसमें लाइट जलती हो। लाइटों की व्यवस्था भी नहीं है। बस स्टैंड परिसर में रात्रि के समय चारों ओर अंधेरा रहता है। बस स्टैंड परिसर में बाहर कोई शौचालय नहीं हैं। पहले एक शौचालय था वो पूर्ण  रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है।  

बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए जो सुविधा होनी चाहिए वो नहीं हैं। स्टैंड परिसर में कैंटीन एवं अन्य शॉप आज तक नहीं खुली हैं उनको खुलवाना चाहिए। इसके अलावा बाहर शौचालय की व्यवस्था भी करवानी चाहिए। -बिजेंद्र
महेंद्रगढ़ बस स्टैंड की हमेशा अनदेखी हुई है चाहे कोई भी अधिकारी नारनौल डिपो में आया हो। किसी ने इस स्टैंड पर ध्यान नहीं दिया। महेंद्रगढ़ के नाम पर जो बजट आता है वो यहां लगना चाहिए। -रामनिवास।
बस स्टैंड पर रात्रि के समय बुरा हाल होता है। परिसर में कहीं भी लाइटें नहीं लगी हुई। केवल मात्र बिल्डिंग पर दो लाइटें ही लगी हुई हैं। बुजुर्ग व्यक्ति रात्रि को ठोकर खाकर गिर सकता है। इसलिए लाइटें बहुत जरूरी है। इसके अलावा यहां से बसें भी बहुत कम चलती हैं। -ब्रह्म प्रकाश।
बस स्टैंड पर सफाई व्यवस्था चौपट है। इसके अलावा डिवाइड टूटे हुए हैं सड़कें उखड़ी हुई है। स्टैंड पर कई समस्याएं हैं जो स्वयं बस स्टैंड की हालत बयां कर रही हैं। - रामसिंह।
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वर्जन:
स्टेंड का बजट अब मार्च में आएगा। बजट आने के बाद बस स्टेंड पर रिपेयरिंग आदि का काम किया जाएगा। लाइटों के बारे में उच्च अधिकारी को लिखकर दिया हुआ है।
- रामसिंह, अड्डा इंचार्ज महेंद्रगढ़।
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