अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यापनरत शिक्षकों को व्यावसायिक विकास औरर क्षमता निर्माण के मोर्चे पर प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला के चौथे दिन उच्च शिक्षा में ई-लर्निंग और तकनीक के महत्व पर चर्चा हुई। कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ के निर्देशन और हरियाणा राज्य उच्च्तर शिक्षा समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में वीरवार को गुरू अंगद देव टीचिंग लर्निंग सेंटर के अध्यक्ष और पीडीएम यूनिवर्सिटी, बहादुरगढ़ के कुलपति प्रो. एके बक्शी विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे।
प्रो. एके बक्शी ने अपने व्याख्यान में बताया कि किस तरह तकनीक की मदद से किसी भी समय अध्ययन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि अन्य देशों के मुकाबले भारत में यह प्रक्रिया अभी धीमी है। सरकार की ओर से शिक्षा के डिजिटलीकरण पर नौ हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। उन्होंने कहा कि मूक्स पाठ्यक्रमों के विकास और उनकी स्वीकार्यता से स्पष्ट है कि विश्वविद्यालयों को अब इस तकनीकी पहलू को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को अध्यापन कार्य हेतु तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से हम शिक्षण प्रक्रिया को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बना सकते हैं।
डॉ. विमल रार ने कहा कि शिक्षकों के लिए अध्यापन कार्य में तकनीक की अहम भूमिका हो गई है। डॉ. विमल ने तकनीक के प्रयोग से शिक्षण कार्य की गुणवत्ता में आने वाले सुधार से भी अवगत कराया। कार्यशाला के अंतिम सत्र में डॉ. जसविंद्र सिंह ने प्रतिभागियों को मूक्स के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इन पाठ्यक्रमों की मदद से विद्यार्थी अब अपनी सहूलियत के हिसाब से अध्ययन कर सकते हैं और यह प्रक्रिया ऑनलाइन लर्निंग के विकास में उपयोगी हैं। मूक्स केवल एक तरफ संवाद तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालयों में यह पाठ्यक्रमों का नियमित हिस्सा बन रहे हैं। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. संजीव कुमार ने विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से विशेषज्ञों का धन्यवाद किया। प्रतिभागियों के साथ शिक्षा पीठ के अधिष्ठाता डॉ. प्रमोद कुमार और शिक्षा पीठ की प्रो. नीरजा धनखड़ सहित भी उपस्थित रहीं।