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हरियाणा में पहली से पांचवी तक की किताबों में लगेगा क्यूआर कोड, स्मार्ट फोन से सुलझायेंगे किताबों की कठिन विषयों की गुत्थी-

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। हरियाणा शिक्षा विभाग में प्राइमरी स्तर पर पठन-पाठन में व्यापक सुधार करने जा रहा है। इसके लिए पहली बार कक्षा एक से 5वीं तक की किताबों में क्यूआर कोड लगाया जाएगा। जिससे बच्चों को संबंधित विषय वस्तु मोबाइल फोन पर बेहतर तरीके से व कई प्रकार से समझाया जा सके। दूसरी ओर इससे बच्चों के बैग के वजन कम करने में भी विभाग को मदद मिलेगी।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) गुरुग्राम में एजुकेशन टेक्रोलॉजी विंग के विषय विशेषज्ञ मनोज कौशिक ने बताया कि पहले चरण में पहली से पांचवीं तक की किताबों में क्विक रिस्पांस कोड (क्यूआर कोड) लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे एनराइज्ड टेस्ट बुक प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दिशा निर्देशानुसार दीक्षा प्रोजेक्ट के तहत इस पर काम किया जा रहा है। विशेषज्ञ ने बताया कि पहले चरण में टीचर मैनुअल में क्यूआर कोड लगाया जाएगा। जिससे टीचर इसका प्रयोग इको फ्रेंडली तरीके से कर सके। इसके बाद प्राइमरी की किताबों में क्यूआर कोड लगाया जाएगा। कक्षा एक से 5वीं तक की किताबें शिक्षा विभाग की है। ऐसे में इस कार्य को अगले शिक्षा सत्र से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद कक्षा छह से आठवीं तक की किताबों में क्यूआर कोड लगाने का कार्य होगा। किताबों में क्यूआर कोड लगाने को लेकर एससीईआरटी व डायट गुरुग्राम के टीचरों का एक वर्कशॉप हो चुका है। दूसरा वर्कशॉप अगस्त में किया जाएगा। इसे लेकर एससीईआरटी प्रदेश में नोडल एजेंसी के रुप में काम कर रही है। इसमें एससीईआरटी की ईटी विंग, डायट की ईटी विंग के अलावा एमएचआरडी दिल्ली की टीम मिलकर काम कर रही हैं।
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ऐसे काम करेगा-
कक्षा एक से 5वीं तक किताबों में जरुरत के अनुसार क्यूआर कोड लगाया जाएगा। टीचर मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर विषय सामग्री को प्रयोग कर सकता है। ऐसे में टीचर के सामने एक विषय को समझाने के कई विकल्प होंगे। ई-कंटेंट में ऑडियो, वीडियो के अलावा पाठ्य सामग्री होगी। इसके लिए छात्रा या टीचर को एक एप डाउनलोड करना होगा जो पुस्तकों पर दर्ज क्यूआर कोड को पढ़कर संबंधित पाठ्य सामग्री उपलब्ध करायेगा।
किताबों का वजन कम हो सकता है-
क्यूआर कोड, 2डी-3डी एनिमेशन, ई-बुक एवं अन्य वीडियो सुविधा के जरिये पठन पाठन की प्रक्रिया बेहतर होगी। माना जा रहा है कि इससें पाठ्य पुस्तकों का बोझ भी कम होगा।
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पहले चरण में कक्षा एक से 5वीं तक की किताबों में क्यूआर कोड लगाने की तैयारी है। हमारा प्रयास है कि इसी सत्र में प्राथमिक के साथ मिडिल स्तर स्तर की किताबों में क्यूआर कोड लगा दिया जाए। इसके लिए ई-सामग्री तैयार की जा रही है।
ज्योति चौधरी, निदेशक एससीईआरटी, गुरुग्राम
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शिक्षा में लगातर तकनीक का प्रयोग बढ़ रहा है। किताबों में क्यूआर कोड लगाने से टीचरों को विषय समझाने के लिए कई विकल्प मिल सकेंगे।
डॉ.जितेन्द्र भारद्वाज, टीचर नारनौल।
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