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तैयारी 200 बेड का अस्पताल बनाने की, इमारत की हालत बहुत ही खस्ता

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। वैसे तो सरकार द्वारा नागरिक अस्पताल को ट्रामा सेंटर व 200 बेड का अस्पताल बनाने की तैयारी की जा रही है, मगर जिला के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की हालत बहुत ही दयनीय बनी हुई है। दो दिन पहले ही इसी अस्पताल के साथ बनी पुलिस चौकी के छत का प्लास्टर गिर गया था। कुछ यही हालत अस्पताल की बनी हुई है। यह अस्पताल इतना कंडम है कि बारिश के मौसम में इस अस्पताल के गिरने का डर बना हुआ है।
यहां के नागरिक अस्पताल की इमारत को खुद इलाज की दरकार है। अस्पताल की पुरानी इमारत में कई जगह जहां दरारें आ गई हैं, वहीं इमारत की छत का प्लास्टर भरभरा कर गिरने लगा है। प्लास्टर के अलावा कई जगह पर लेंटर भी गिरना शुरू हो गया है। इस पुरानी इमारत में अभी भी मरीजों का देखा जाता है। वहीं पुरानी इमारत के एक हिस्से में प्रशासनिक भवन भी है। जहां पर रोज प्लास्टर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। इससे विभाग के कर्मचारी व अधिकारी भी सहमे हुए हैं। इमारत के निर्माण को काफी साल हो गए हैं। इस इमारत को जर्जर भी घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद यहां पर विभिन्न विभाग चल रहे हैं।
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नारनौल के 100 बेड के अस्पताल का उद्घाटन 25 नवंबर 1970 को किया गया था। इसके बाद से यहां पर मरीजों को देखा जाने लगा। 2005-06 में आई बाढ़ के बाद इस पुरानी बिल्डिंग को खतरनाक घोषित करते हुए इसमें मरीजों को देखना व अन्य कार्य बंद कर साथ लगती दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिए गए थे, मगर अब फिर से यहां पर काम होने लग गए। अब हालात यह है कि इस इमारत की छत का प्लास्टर व लेंटर कई बार गिर चुका है। दीवारों में दरारें आई हुई हैं तथा कई जगह से पानी भी अंडरग्राउंड लाइनों से टपकता रहता है। इसके बावजूद यहां पर स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य विभागों का काम होता है। जहां पर मरीजों का आना जाना भी सुबह से शाम तक लगा रहता है। मगर पुरानी हो चुकी इस इमारत से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

कौन-कौन से विभाग हैं इस इमारत में
इस पुरानी इमारत में फिलहाल टीका विभाग, मरहम पट्टी कक्ष, प्रसूति वार्ड, सामान्य वार्ड, ब्लड सैंपल कक्ष, दंत विभाग व मैटरन आफिस आदि अभी चल रहे हैं। वहीं मरीजों को भी यहां देखा जाता है। जहां पर सैकड़ों मरीज रोजाना आ रहे हैं, जबकि यह इमारत खतरनाक करार दी जा चुकी है।
दूसरी इमारत का भी है यही हाल
सिविल अस्पताल के पूर्व की ओर मुख्य द्वार के पास बने प्रशासनिक भवन की इमारत का भी यही हाल है। इस इमारत का निर्माण 1967 में हुआ था। इसके बाद से इसका सही रखरखाव नहीं किया गया। जिसके कारण अब प्रशासनिक भवन की छत व प्लास्टर रोजाना गिर रहे हैं। इससे इस प्रशासनिक भवन में काम करने वाले कर्मचारी रोजाना जान हथेली पर रखकर सहमे हुए काम करते हैं।

कई विभाग के कार्यालय हैं यहां
इस इमारत में कैश ब्रांच, डीआईओ ब्रांच, फैमिली प्लानिंग विभाग, प्रतिरक्षीकरण विभाग तथा जन्म व मृत्यु पंजीकरण विभाग के कार्यालय के अलावा पुलिस चौकी भी इसी बिल्डिंग में बनाई गई है। जहां भी अस्पताल के कर्मियों के अलावा रोजाना सैकड़ों लोग आते-जाते हैं।

कई बार गिर चुका है यहां छत का प्लास्टर
इस इमारत की छत का प्लास्टर कई बार गिर चुकी है। नौ जुलाई को भी यहां पुलिस चौकी का प्लास्टर गिरा था। इसके अलावा 2016 में 20 जुलाई को यहां पर कैश ब्रांच की छत का प्लास्टर भरभराकर गिर गया था। इससे पहले भी इस इमारत के जन्म मृत्यु पंजीकरण विभाग का प्लास्टर भी गिरा था। जबकि पुलिस चौकी की छत का प्लास्टर भी तीन बार गिर चुका है। जिससे यहां काम करने वाले कर्मचारी अब दहशत में हैं।
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वर्जन
सिविल अस्पताल की पुरानी इमारत में जहां कहीं भी दरारें व अन्य टूट फूट है, उसे जल्द ही ठीक करा दिया जाएगा। इस बारे में उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों को लिखा हुआ है। जल्द ही कोई व्यवस्था यहां की जाएगी।
- इंद्रजीत धनखड़, सिविल सर्जन, नारनौल।
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