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दावा पूरा, दवा कम, परेशान मरीजों का निकल रहा दम

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दावा पूरा, दवा कम, परेशान मरीजों का निकल रहा दम
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। सरकार भले ही आमजन को नि:शुल्क दवा और स्वास्थ्य जांच सेवाएं उपलब्ध करवाने का दावा करती हो, लेकिन हकीकत में देखा सरकारी अस्पतालों में न तो मरीजों को पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध हो पा रही हैं और न ही सही प्रकार से जांच होती है। इसको लेकर शनिवार को अमर उजाला टीम ने नारनौल के नागरिक अस्पताल का दौरा किया तो सामने आया की चिकित्सकों की लिखी दवाइयों में से कुछ ही मरीजों को अस्पताल में मिल रही हैं। अन्य दवाइयां मरीजों को अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से पैसे देकर लेनी पड़ी रही थीं। नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे को छोड़कर अन्य जांच के लिए कोई भी मशीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए मरीजों को सोनोग्राफी आदि करवाने के लिए निजी अस्पतालों के यहां जाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार की आमजन के लिए चलाई जा रही नि:शुल्क दवा और स्वास्थ्य जांच योजना दम तोड़ती दिखाई दे रही है।
नागरिक अस्पताल में सभी प्रकार की दवाइयां नहीं होने के कारण यहां आने वाले मरीजों को मजबूरन मेडिकल स्टोर से पैसे देकर दवाइयां लेनी पड़ रही हैं। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की लिखी दवाओं में से मरीजों को एकाध ही अंदर से मिल पाती है।
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मरीजों को दो बजे के बाद दी जा रही रिपोर्ट
शहर के आस-पास के गांवों से आने वाले मरीज सुबह जल्दी यह सोचकर अस्पताल पहुंचते है कि जल्द ही चिकित्सकों को दिखाकर वे अपने घर लौट सके। लेकिन, चिकित्सकों द्वारा अगर मरीजों की खून या पेशाब संबंधित जांच करवाने के लिए लिख दिया जाए तो मरीजों को वह जांच रिपोर्ट भी दो बजे से पूर्व नहीं मिल पाती है। जांच करने वाले कर्मचारी अक्सर मरीजों के सैंपल लेकर दो बजे तक रिपोर्ट लेने की बात कहते है। जबकि, अस्पताल में चिकित्सकों के बैठने का समय ही दो बजे तक है। इस प्रकार मरीजों को रिपोर्ट लेकर अगले दिन दोबारा से चिकित्सकों को दिखाना पड़ता है।
अस्पताल में लग रहीं मरीजों की कतारें
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें शहर के आस-पास के गांवों में मरीज भी इलाज के लिए पहुंचते है। अस कारण अस्पताल में सुबह चिकित्सकों के पहुंचने से पहले ही मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती है। जोकि, अस्पताल के निर्धारित समय अवधि तक भी लगी रहती है।
चिकित्सकों की कमी, मरीज परेशान
नागरिक अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में चिकित्सकों के साथ-साथ सर्जनों का भी टोटा बना हुआ है। सबसे अधिक कमी नारनौल के नागरिक अस्पताल में बनी हुई हैं। नागरिक अस्पताल में सर्जन चिकित्सक नहीं होने के कारण आपरेशन आदि नहीं हो पा रहे है। ऐसे में मरीजों को भारी परेशानी करनी पड़ रही है। यहां 42 चिकित्सकों में से केवल 18 ही पद भरे हुए हैं।

बच्चे को देखने के बाद चिकित्सक ने पर्ची में 3-4 दवाइयां लिखीं। अस्पताल से दवाइयां लेने पहुंचा तो फार्मासिस्ट ने केवल शीशी देकर अन्य दवाइयां बाहर से लेने के लिए बोल दिया।
-विनोद कुमार नांगलकांठा।

पहले पर्ची और बाद में चिकित्सक के केबिन के बाहर लंबी लाइन में लगने के बाद पांच से केवल एक दवाई ही मिली है। शेष दवाइयों को मजबूरन बाहर से खरीदना पड़ेगा।
-बीर सिंह, कांटी।

महेंद्रगढ़ से आया हूं। यहां चिकित्सकों को दिखाने के लिए बहुत देर तक लाइन लगा। जब दवा लेने के लिए खिड़की पर एक दवा मिली। अन्य को बाहर से लेने को कह दिया।
-मनबीर सिंह, मेघनवास

अस्पताल चिकित्सकों की पर्ची में लिखी सभी दवाइयां नहीं मिल रहीं है। इससे परेशानी हो रही है। पर्ची में लिखी चार में से दो दवाइएं ही अस्पताल में मिली है। बाकी बाहर से लेनी पड़ेंगी।
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-सोनू, सेका।

अस्पताल में दवाइयों को कोई कमी नहीं है। कभी-कभी कुछ कमी हो जाती है। उस कमी को भी समय पर पूरा करने का प्रयास किया जाता है। अस्पताल में करीब 200 से 250 प्रकार की दवाइयां नि:शुल्क दी जाती हैं।
- राजेश कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल, नारनौल
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