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कथा में श्रीकृष्ण लीला का वर्णन किया

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कथा में श्रीकृष्ण लीला का वर्णन किया
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। अग्रवाल सभा भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन वृंदावन से पधारे पंडित राधेश्याम शास्त्री ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कथा का वर्णन किया। कथा वाचक ने बताया कि भागवत में 18 श्लोक हैं। भागवत के ये 18 श्लोक 18 पुराण, गीता के 18 अध्याय और महाभारत के 18 पर्वों का सार है। इन सबका सार प्रभु प्राप्ति है। शास्त्री ने पूतना वध की कथा करते हुए बताया कि पूतना अविद्या है। जो अंदर से बुरी है, पर बाहर से सुंदर बनकर आई। हम भी अंदर से बुरे हैं। परंतु, बाहर से सुंदर दिखते हैं। उन्होंने माखन चोरी लीला का श्रवण करते हुए कहा कि माखन चोरी बृज गोपियों पर कृपा की लीला है। गोचारण के प्रसंग में कथा वाचक ने बताया कि सब देवताओं का निवास गोमाता में हैं। इसलिए गो सेवा जरूर करनी चाहिए। गो सेवा साक्षात गोविंद की सेवा है। उन्होंने गोवर्धन पूजा की कथा में बताया कि बृजवासियों द्वारा भी कृष्ण ने इंद्र की पूजा बंद कराके श्री गिरिराज महाराज का पूजन कराया। इस मौके पर गिरिराज महाराज की सुंदर झांकी का दर्शन कराया गया।
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