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200 एकड़ जमीन से आय मात्र पांच लाख

Mon, 25 Jan 2016 12:28 AM IST
महेंद्रगढ़ / नारनौल
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विभिन्न कारणों से गायों की मौत के कारण चर्चाओं में आए गोपाल गौशाला के पास करीब 200 एकड़ जमीन है। इस जमीन से गौशाला को मात्र पांच लाख सालाना की आमदनी होती है। गायों की मौत के बाद रविवार को गौशाला पहुंची पशुपालन विभाग पंचकूला की तीन सदस्यीय टीम को यह जानकारी गौशाला प्रबंधन ने दी। प्रबंधन ने टीम को बताया कि गौशाला के अधीन कुल 200 एकड़ के करीब जमीन आती है।
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इसमें से 50-55 बीघा जमीन नदी क्षेत्र है। 110 के करीब बायल क्षेत्र में है। पानी की कमी के कारण उक्त जमीनों की कुल आय पांच लाख रुपये के करीब ही हो पाती है। इस पर गौ-भक्तों ने बताया कि 50-55 बीघा नदी क्षेत्र में है। इसमें से दिन-रात मिट्टी और बजरी का खनन किया जाता है। गौ-भक्तों ने टीम को गौशाला की जमीन पर हो रहे खनन की पूरी विडियो रिकार्डिंग दिखाई। पंचकूला से पहुंची टीम में पशुपालन विभाग पंचकूला के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. राजकुमार ग्रोवर, आचार्य योगेंद्र सदस्य गौ सेवा आयोग और डॉ. नसीब सिंह डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग शामिल थे। गायों की लगातार हो रही मौत के कारणों की जांच के लिए गोपाल गौशाला का स्थानीय और
पंचकूला की टीमें दौरा कर जानकारी हासिल कर रही हैं।

टीम के सदस्यों ने गौशाला में सफाई के साथ-साथ गायों के खाने-पीने और रहने के स्थानों का मुआयना किया। गौशाला प्रबंधन और गौशाला की अस्थाई कमेटी के सदस्यों से भी गौशाला की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान गौशाला प्रबंधन और गायों की देखभाल के लगाई बनी अस्थाई कमेटी के सदस्यों ने अपनी बातें टीम के सामने रखी। गौशाला प्रबंधन और अस्थाई कमेटी ने लिखित रूप में भी अपनी शिकायतें टीम के सदस्यों को सौंपी।
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रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंपेगी टीम
पशुपालन मंत्रालय के निर्देशानुसार कुछ दिनों से गोपाल गौशाला में गायों की मौत के मामले की जांच के लिए रविवार को गोपाल गौशाला में तीन सदस्यीय टीम पहुंची। टीम ने गौशाला प्रबंधन की हाजिरी रजिस्टर और गायों की संख्या के रजिस्टर को भी चेक किया। दोनों पर हस्ताक्षर कर अपनी रिपोर्ट में शामिल किया। इसके अलावा गौशाला के अधीन आने वाली जमीन और दुकानों से होने वाली आय के बारे में गौशाला प्रबंधन से जानकारी लेकर उसे भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया। टीम के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने गौशाला की जांच की है। इसकी रिपोर्ट जल्द ही तैयार कर मंत्रालय को सौंपी जाएगी।

टीम ने गौशाला प्रबंधन को दिए सुझाव
टीम के सदस्यों ने गौशाला की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद गौशाला प्रबंधन को कुछ जरूरी दिशा निर्देश दिए। टीम ने प्रबंधन को गौशाला में छोटे बछड़ों और गायों को अलग-अलग वार्ड में रखने का सुझाव दिया। उन्होंने बीमार पशुओं के लिए अलग वार्ड बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि अगर बीमार और ठीक पशुओं को एक साथ रखा जाएगा तो स्वस्थ पशु बीमार पशुओं को चारा नहीं खाने देते हैं। इसलिए सभी पशुओं के लिए अलग-अलग वार्ड निर्धारित किया जाए। इसके अलावा टीम ने गौशाला प्रबंधन को छोटे पशुओं के खाने -पीने के लिए अलग से व्यवस्था करने की भी बात कही।

प्रधान के बचाव में आए अनजान चेहरे
टीम के सामने जब गौ-भक्तों ने गौशाला प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठाया तो कुछ ऐसे चेहरे प्रधान के पक्ष में आए जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था। उन्हाेंने कहा कि वे प्रतिदिन गौशाला आ रहे हैं, यहां व्यवस्थाओं में कोई कमी नहीं है। इस पर गौ-भक्तों ने कहा कि वे तीन दिन से दिनरात गौशाला में गायों की देखभाल कर रहे हैं, आज से पहले इनको कभी नहीं देखा। इसके अलावा उन अनजान चेहरों ने प्रधान का बचाव करते हुए कहा कि वे प्रतिदिन सुबह पांच बजे गौशाला पहुंचकर गौ-सेवा में जुट जाते है। इस पर गौ-भक्तों ने कहा कि जिस दिन 20 गायों की मौत हुई थी। उस दिन प्रधान 12 बजे तक भी नहीं पहुंचे थे। इस तरह दोनों पक्षों के बीच जमकर तू-तू मैं-मैं होती रही।
 
तस्वीरें और वीडियो रिकार्डिंग लेकर गई टीम
मामले की गंभीरता को देखकर टीम ने पिछले कुछ दिनों में हुई कार्रवाई के सबूत अपने साथ लेकर गई। इसमें गौ-भक्तों की अस्थाई कमेटी ने पशुपालन विभाग की टीम को पिछले कुछ दौरान गौशाला में फैली अव्यवस्थाओं, मरी गायों और गायों को गौशाला प्रबंधन द्वारा किस तरह दफनाया गया, सहित अनेक तस्वीरें और वीडियो की रिकार्डिंग सबूत के तौर पर सौंपे।
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