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व्यापारी बिचौलिए बनकर बेच रहे हैं किसानों की सरसों

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महेंद्रगढ़। क्षेत्र के व्यापारी बिचौलिए बनकर किसानों की सरसों बेच रहे हैं। गेहूं की कटाई और कढ़ाई का समय होने के कारण व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। वो किसानों की सरसों समर्थन मूल्य से 400 से 700 रुपये सस्ती खरीद रहे हैं। अभी जिले की मंडियों में सरसों की खरीद का काम चल रहा है। साथ ही गेहूं की लावनी भी चल रही है। मंडियों में किसानों को सरसों बेचने में तीन से चार दिन लग रहे हैं। इसका फायदा उठाने के लिए व्यापारी गांवों में जाकर सीधे किसानों से संपर्क कर रहे हैं और किसान व्यापारियों को मजबूरीवश 3500 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल सरसों दे रहे हैं।
व्यापारी किसानों के टोकन लेकर मंडियों में समर्थन मूल्य 4200 रुपये के हिसाब से बेच रहे हैं। अमर उजाला टीम ने हुडा सेक्टर में इसकी पड़ताल की। इस दौरान काफी ट्रैक्टर व्यापारियों के पास खड़े दिखाई दिए। सरसों की पहचान किसानों द्वारा बताए गए तरीके से की गई। किसानों ने बताया कि जिन कट्टों या बोरियों की सिलाई रस्सी से की गई है, वह सरसों व्यापारियों द्वारा खरीदी गई है। जबकि जिन कट्टों को सामान्य तरीके से बांध रखा है, वो किसानों के हैं। इस दौरान टीम ने नांगल सिरोही के किसान से बातचीत की। उसके पास बहुत अधिक सरसों के कट्टे थे। उसने बताया कि यह सभी सरसों व्यापारियों की है। लगभग दस से 15 किसानों की यह सरसों हैं। किसानों ने मजबूरन कम रेट पर व्यापारी को सरसों बेच दी है। अब किसानों के टोकन पर व्यापारी सरसों बेचेंगे।
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दोबारा घंटों लाइन में खड़े किसान
किसानों को सोमवार को टोकन कटवाने के लिए दोबारा घंटों लाइनों में खड़ा होना पड़ा। जबकि 18 अप्रैल को बुडीन, छाजियावास, देवनगर, बुंदेबाजनगर आदि गांवों के किसानों ने अपना टोकन कटवाया था। बारिश के कारण दो दिन खरीद बंद रही थी। इसलिए उक्त किसानों सरसों की खरीद का दिन 22 अप्रैल निर्धारित किया था। सोमवार को किसानों को दोबारा टोकन कटवाना पड़ा। अधिकारियों ने किसानों को बताया कि वो टोकन हैफेड के द्वारा जारी किए गए थे। हैफेड का टारगेट पूरा हो चुका है। अब फूड सप्लाई विभाग सरसों की खरीद कर रहा है।

किसानों ने लगाया सिलाई में भेदभाव का आरोप
किसानों ने बैगों की सिलाई करने वाले श्रमिकों पर भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि महेंद्रगढ़ हुडा सेक्टर में श्रमिक किसानों से बैग सिलाई के लिए 200 रुपये ले रहे हैं। वे पैसे देने वाले किसानों का काम प्राथमिकता पर कर रहे हैं। जो किसान उन्हें पैसे नहीं दे रहे, उन्हें घंटों बैग की सिलाई करवाने के लिए इंतजार करना पड़ता है। सिलाई के बाद ही किसानों की सरसों का उठान होता है। इस प्रकार उनके उठान में भी समय लग रहा है।

हमने 18 अप्रैल को टोकन कटवाया था। उस समय अधिकारियों ने नहीं बताया था कि 22 अप्रैल को कौन सी एजेंसी खरीद करेगी? सोमवार को आए तो उन्हें दोबारा घंटों लाइन में लगकर टोकन कटवाना पड़ा।
- महेश कुमार, सरपंच छाजियावास

मैं तीन दिन से मंडी में हूं। अभी तक मेरी सरसों की खरीद नहीं हुई है। गाड़ी का पूरा किराया लग रहा है। इससे हमें कोई बचत होती नहीं दिख रही। इससे तो अच्छा हम गांव में ही व्यापारियों को बेच देते।
- रामचंद्र, बुडीन।

तीन दिन से परेशान हो रहे हैं। यहां प्रशासन की ओर से कोई सुविधा नहीं है। जो किसान कम दर पर बेच रहे हैं उनकी सरसों पहले खरीदी जा रही है। किसानों की अनदेखी की जा रही है।
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- अमीर सिंह, बुडीन।

न तो समय पर उठान हो रहा है और न ही खरीद हो रही। बैगों की सिलाई करने वाले श्रमिक किसानों से 200 रुपये ले रहे हैं, जो पैसे दे रहे हैं उनके बैगों की सिलाई कर रहे हैं जो नहीं दे रहें वो इंतजार कर रहें हैं। जब उनको पकड़कर लाते हैं तो झगड़ा करने लगते हैं।
- सतपाल, दूलोठ अहीर।
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